छाजन - एक्जीमा [ Eczema ]
पर्याय नाम -
एक्जीमा के पारम्परिक नाम पामा , छाजन , अकौता तथा चम्बल आदि हैं ।परिचय -
तवचा की तीव्र अथवा लंबे समय तक संक्रमणीय व कष्ट युक्त की स्थिति का बना रहना उसके साथ असासर्गिक( जो कम ही लोगो मे होता है ) होती है । यद्यपि द्वितीयक संक्रमण सामान्यतः होता है । स्फुटन( यह रोग ) पहले फुसियों जैसा दिखायी देता है जो नम हो जाता है एवं अन्ततः पपड़ी बनती हैं ।प्रभावित भाग में बहुत जलन होती है एवं अन्य शारीरिक व्यवधान( समस्याएं ) भी उपस्थित हो सकते हैं । इसके कई प्रकार की उत्पत्ति में तीव्रग्राही( सेंसटिव ) होते हैं । ड्राई एक्जीमा जिसमें प्रभावित क्षेत्र सूखा होता है । वीपिंग एक्जीमा जिसमें सूखने एवं जख्म भरने के पूर्व प्रभावित क्षेत्र से सीरस( एक प्रकार का द्रब्य ) का स्राव होता है ।
प्रकोप -
इसका प्रकोप त्वचा पर , खाज - खुजली , जलन तथा दर्दयुक्त छोटी - छोटी बारीक सी पंसियों से प्रारम्भ होता है । यही छोटी - छोटी पुंसियाँ या दाने खुजलाते - खुजलाते घाव का रूप धारण कर वृहद( बड़ा ) आकार ग्रहण कर लेते हैं । इसके फफोलों , पुंसियों आदि पर जीवाणुओं / विषाणुओं और फंगस का घातक आक्रमण भी हो जाता है ।रोग के प्रधान कारण -

• क्रीम , पाउडर , लिपिस्टिक , केशरंजक द्रव्य( hair color liquid ) , प्लास्टिक के जूते , रबर के जूते , दस्ताने , धातु के बने पदार्थ जैसे घड़ियों के ढक्कन , कानों के कांटे , कृत्रिम धागों से बने वस्त्र , साबुन , कपड़े धोने के पाउडर एवं सल्फा , पेनिसिलीन औषधियों के प्रतिक्रिया( reaction ) स्वरूप कारक हैं ।
• कब्ज तथा पाचन विकार ।
• सूर्य का विकरणीय प्रभाव भी ।
• रक्त - विकार विशेष कारणों में से एक ।
• विशेष प्रकार के जीवाणुओं - विषाणुओं के आक्रमण के फलस्वरूप ।
• गठिया , सन्धिवात , आमवात के रोग प्रायः आक्रान्त( से प्रभावित ) ।
• महिलाओं में मासिक धर्म की गड़बड़ी ।
• अत्यधिक सोडा , साबुन , चूने आदि के सम्पर्क में रहने वालों को भी ।
• पसीनायुक्त पहने कपड़ों से शरीर को रगड़ना , अनुचित खान - पान , आहार विहार , माता के दूध की गड़बड़ी आदि कारणों से ।
• एक स्थान के एक्जीमा के घाव का स्राव बहकर अथवा किसी अन्य कारण से किसी अन्य स्वस्थ अंग पर लगने से ।
• बच्चों में पाचन शक्ति की गड़बड़ी तथा आँतों में कृमियों( कीड़ो ) का प्रबल संक्रमण आदि कारणों से ।
• नाड़ी संस्थान की कमजोरी , मधुमेह , आदि कारणों से ।
••• दुर्भाग्यवश अभी तक बहुत से एक्जीमा में यह पता नहीं चलता कि कारण क्या है । साधारणतः ऐसा विश्वास किया जाता है कि यह एलर्जिक प्रतिक्रियाओं के कारण होता है ।
रोग के प्रधान लक्षण -

• फुसियों में तीव्र खाजयुक्त जलन एवं वेदना( दर्द ) ।
• फुसियों का रंग लाल होता है और रोगी खुजला - खुजलाकर बेहाल हो उठता है । और वही छोटी - छोटी फंसियाँ घाव का रूप ले लेती है ।
• घाव से सफेद या पीले रंग का स्राव निकलता है ।
• रोग के अधिक विस्तृत होने पर रोगी का स्वास्थ्य तेजी से नीचे गिर जाता है एवं ज्वर की उपस्थिति ।
• तीव्रावस्था में त्वचा में लाली , शोफ ( इडीमा ) , छोटे - छोटे फफोले बनना , पानी रिसना , पानी टपकना एवं खुरंट जमना ये लक्षण मिलते हैं ।
• फोड़े - फुंसी के स्वस्थ हो जाने पर त्वचा पर अवशेष के रूप में दाग रह जाता है ।
• रोग पुराना पड़ने पर त्वचा मोटी एवं कठोर हो जाती है ।
••• बाह्य त्वचा का एक नवीन या जीर्ण शोथज( सूजन युक्त जिद्दी संक्रमणीय रोग ) रोग जिसमें पहले त्वचा लाल होती है और उसमें खुजली होती है तथा छोटी - छोटी पिटकायें ( फुसियाँ निकल आती है एवं जल स्फोट( द्रव्य से भरे छोटे उभार ) बन जाते हैं जो शीघ्र ही फूट जाते हैं जिससे त्वचा की सतह पर सीरम बहने लगता है । जो बाद में सूख कर पपड़ी बन जाता है इसे ' शुष्क ' छाजन कहते हैं । जब वाह्य त्वचा की सूजन जल स्फोटों के बनने से पूर्व गल जाती है तो इसे स्रावी छाजन कहते हैं ।
••• एक्जीमा की विशिष्ट औषधि चिकित्सा •••
एक्जिमा में मुख्य दो प्रकार से औषधि प्रयोग की जाती है ।- स्थानिक औषधि प्रयोग --
- मुख द्वारा औषधि सेवन --
• द्वितीयक संक्रमण को रोकने के लिये - एण्टीहिस्टामीन का प्रयोग । । अथवा एविल का प्रयोग करें । 1 गोली दिन में 3 बार दें ।
एक्जीमा की तरल अवस्था में ( Weeping Eezema ) - प्रारम्भ में 1 लीटर पानी में 125 मि . ग्रा . पोटाशियम परमैंगनेट घोल कर दिन में 2 बार इसमें कपड़े को तर( गिला ) करके 10 मिनट तक रोजाना प्रभावित स्थान पर रखना चाहिये । इस अवस्था में 1 % फेनोलयुक्त कैलामीन लोशन दिन में 4 - 5 बार लगावें । अथवा बेटनोवेट क्रीम ( Betnovate cream ) या सौफराडेक्स ( Sofradex ) क्रीम लगाना चाहिये । यह एक बहुत महंगी दवा है ।
• संक्रमण का संदेह होने पर — ' वायोफार्म क्रीम । डर्मोक्वीनाल आइन्टमेण्ट लगाना चाहिये । इसके लिये नियोमाइसीन मरहम अधिक उपयोगी है ।
2 . मुख द्वारा सेवन के लिये -
• ‘ एण्टीबायोटिक्स ' दे सकते हैं । जैसे ' एम्पिसिलीन 250 मि . ग्रा , दिन में 4 बार,
• फीनोबार्बिटोन ( Phenobarbitone ) 30 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । ।
• पुराने रोग में ‘ फ्लूकोर्ट मरहम या साधारण ' जिंक मरहम लगावें । ।
• अति विस्तृत( बड़ी हुई स्थिति ) रोग में पूर्ण विश्राम । ।
••• छाजन में सेवन कराने योग्य अपटूडेट एलोपैथिक पेटेन्ट टेबलेट / कै. ,•••
1 . एण्टीस्टीन ( Antistine tabs . ) ' सीबा - 1 - 1 टेबलेट दिन में 2 - 3 बार अथवा आवश्यकतानुसार दें ।
2 . ग्रीसोविन - एफ - पी . टेबलेट ( Grisovin F . P . Tabs ) ग्लैक्सों - 2 - 2 टेबलेट दिन में 2 - 3 बार अथवा आ . नु . दें । ।
3 . फोरिस्टाल टैब . ( Foristal tabs ) सीबा गायगी - 1 - 2 टेबलेट दिन में 2 - 3 बार ।
4 . हिजटूिल कैपसूल ( Histryl Caps ) ‘ एस्कायेफ - एलर्जी वाले एक्जीमा में 1 - 1 कै . दिन में 2 बार । इसका सीरप भी आता है ।
5 . इंसीडल टैबलेट ( Incidal Tabs ) वायर - 1 - 2 टेबलेट दिन में 3 बार ।
6 . पोलरामाइन टैबलेटस ( Polaramine Tabs ) फुलफोर्ड कं ' - वयस्कों तथा 12 साल तक के बड़े बच्चों को एलजीजन्य एक्जीमा में 1/2 - 1 टे . दिन में 2 - 3 बार दें । नन्हें शिशुओं को 1/4 टे . । इसका पीडियाट्रिक सीरप भी आता है ,
7 . टरफेड टैबलेट ( Terfed tab ) ' सिपला - वयस्कों और 12 साल तक के बड़े बच्चों को 60 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । 6 से 12 साल के बीच के बच्चों को 30 मि . ग्रा . दिन में 2 बार दें । इसका पीडियाट्रिक सीरप भी आता है ।
•• छाजन में लगाने योग्य ऐलो . पेटेण्ट क्रीम / लोशन / आइंटमेण्ट ••
1 . कोटारिल - एच क्रीम ( Cotaryl - H Cream F . D . C ) - रोगग्रस्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।
2 . टेनोवेट स्किन क्रीम ( Tenovate Skin Cream ) ग्लैकसो - प्रभावित भाग पर दिन में 1 - 2 बार लगावें ।
3 . यूरेक्स क्रीम ( EuraxCream ) गायगी - आ . नु . प्रभावित त्वचा पर लगावें ।
4 . बेटनोवेट क्रीम ( Betnovate Cream ) लीण्डिया - प्रभावित त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें । ।
5 . जेन्टीसिन - एच . सी . क्रीम ( निकोलस ) - आक्रान्त( प्रभावित ) त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।
6 . डिप्रोजे ण्टा क्रीम ( Diprogenta ) ‘ फुलफर्ड - रोगग्रस्त त्वचा पर 2 - 3 बार लगावें ।
7 . डेक्सीक्विन आइंटमेण्ट ( कैडिला ) - रुग्ण त्वचा पर आ . नु . लगावें ।
नोट - यह एक उत्तम औषधि है ।
8 . एक्जोलिन स्किन आइंटमेण्ट ( Eczolin Skin Oint ) एशियन कं - रोगग्रस्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।
9 . डेरोबिन स्क्रिन आयंटमेण्ट ( Derobin Skin Oint ) एलेनूबरीज - आक्रान्त त्वचा पर दिन में 2 - 3 बार लगावें ।
नोट - एक्जेबरोल इंजेक्शन ( Eezebrol Inj . - जुगत ) 10 मि . ली .
याद रहे -
• खारिश को कम करने के लिये ‘ एण्टीहिस्टामिन औषधि जैसे - एविल सी . पी . एम . , फोरिस्टाल आदि दें ।
• रोगी की आर्थिक दशा में अनुसार ' डिपसे लिंक , ‘ लूसीक्रीम ' , ' सोफ्राडेक्स अथवा बेटनोवेट सी या बेटनोवेट - एन का प्रयोग करें ।
• यदि इन्फेक्शन हो , तो विल्को 17 - 21 क्रीम अथवा अन्य कोई एण्टीबायोटिक क्रीम लगाना चाहिये ।

