शरीर के अवशेषी ( Vestigial ) अंग कौन - से हैं ?
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| By - BruceBlaus. |
सामान्य रूप से हमारी धारणा यह है कि शरीर के जितने भी अंग हैं उनकी हमारे लिये कोई न कोई उपयोगिता है । लेकिन यह सच नहीं है । हमारे शरीर में कुछ हिस्से ऐसे हैं जिनका वास्तव में कोई उपयोग नहीं है । शरीर के इन्हीं हिस्सों को अवशेषी अंग कहा जाता है ।
क्या तुम जानते हो ये अवशेषी अंग क्या हैं और ये शरीर के लिये अनुपयोगी कैसे हो गये ?
मानव - शरीर में सौ से भी अधिक ऐसे अंग हैं जो अब अनुपयोगी हो चुके हैं । ये कभी शरीर के लिये उपयोगी रहे होंगे । लेकिन समय के साथ - साथ ये सब नाकाम हो गये ।
शरीर के कुछ अवशेषी अंग इस प्रकार हैं : - एपेंडिक्स ( appendix ) , कशेरुका की बेकार हुई पूंछ ( fused tail vertebrae ) , अक्ल दाढ़ ( wisdom teeth ) , कानों को कुलबुलाने वाली मांस पेशियां , निमेषक पटल ( nictitating membrane ) , पुरुषों के सीने पर निकले हुये चूचक ( nipples on male ) इत्यादि ।
इन अंगों की शरीर में मौजूदगी यह बताती है कि पैतृक रूपों ( ancestral forms ) में वे मौजूद रहे होंगे तथा कुछ क्रियाओं के लिये उनका महत्त्व भी होगा । लेकिन किसी प्रकार उनकी उपयोगिता समाप्त हो गयी तथा वे निष्क्रिय हो गये ।
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| wisdom teeth, by - Coronation Dental Specialty Group |
क्या तुम जानते हो कि ये अंग बेकार कैसे हो गये ?
अपने क्रमिक विकास में जीव - जंतु तथा वनस्पतियां अनुकूली आकारिकीय ( adaptive morphological ) परिवर्तनों के दौर से गुजरते रहे हैं जिनसे उन्हें कुछ परिस्थितियों में जीवित बने रहने की सामर्थ्य हासिल हुई ।
लगातार होते रहने वाले परिवर्तन के कारण किसी अंग के आकार तथा क्रिया में कमी आ सकती है । फिर पर्यावरण में होने वाले परिवर्तन के कारण किसी अंग की उत्तरजीविता ( survival ) अनावश्यक भी हो सकती है । परिणामस्वरूप कई वनस्पतियों तथा जीवों के कुछ अंग बेकार , पतित तथा जरूरत से छोटे आकार के हो गये हैं ।
मनुष्य के लिये बेकार हो चुके अंग अभी भी अन्य जीवों के लिये उपयोगी बने हुए हैं । उदाहरणार्थ , अभी भी बड़ी संख्या में जीव - जंतु अपने कानों को चलाने के लिये कानों की मांसपेशियों का उपयोग करते हैं ।
निमेषक पटल का जलीय कशेरुकी ( aquatic vertebrate ) में आंख की सुरक्षा करने के लिये प्रयोग किया जाता है । अंधान्त्र परिशोषिक ( vermiform appendix ) का कुछ शाकभक्षियों ( herbivores ) में सैलूलोस ( cellulose ) को पचाने के लिये इस्तेमाल किया जाता है । इस तरह के कई अन्य उदाहरण भी हैं ।
अवशेषी अंगों के अध्ययन से आवयाविक क्रमिक विकास ( organicevolution ) के सिद्धांत के समर्थन में कई महत्त्वपूर्ण प्रमाण मिलते हैं ।
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