मूत्र में जलन
![]() |
| मूत्र में जलन |
परिचय -
इस विकार में पेशाब करते समय जलन होती है ।
कारण -
मूत्र मार्ग में संक्रमण के फलस्वरूप पीप का पैदा होना , चोट , सूजन एवं प्रदाह( इंफेक्शन ) आदि कारणों से ।
लक्षण -
मूत्र में जलन । बार - बार मूत्र की इच्छा , पर मूत्र कम मात्रा में आना ।
•• चिकित्सा व्यवस्था ••
• अल्कासोल ( Alkasol - स्टैंडमेड ) या साइट्राल्का ( Citralka - पी . डी . ) 2 - 2 चम्मच बराबर जल मिलाकर दिन में 2 या 3 बार । ।
• मिल्क ऑफ मैगनेसिया ( फिलिप्स ) 2 - 2 चम्मच बराबर जल मिलाकर दिन में 2 - 3 बार ।
• सुप्रिस्टोल ( Supristol - जर्मन रेमेडीज ) 2 - 2 टेबलेट प्रति 12 घण्टे पर।
• इन्जेक्शन स्ट्रेप्टोपेनिसिलीन 1/2 ग्राम का 1 वायल, 2 एम . एल . डिस्टिल्ड वाटर में घोलकर नित्य माँस में लगावें ।
• ल्यूमीनाल ( Luminal - वायर ) आ . नु . 30 या 100 मि . ग्रा . की 1 टेबलेट दिन में 1 या 2 बार दें ।

