मूत्र में विष आपात यूरीमिया [ Uraemia Emergency ]
| मूत्र में विष आपात यूरीमिया [ Uraemia Emergency ] |
परिचय -
जब मूत्र में उपस्थित विषैला पदार्थ किसी प्रकार रक्त में पहुँच जाता है तो शरीर में यूरीमिया के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं जो अति विषैले होते हैं । इसमें साँस से गंध अमोनिया जैसी आती है ।
लक्षण –
सिर चकराना , तीव्र दर्द , अनिद्रा , बुद्धि विकार , रोगी के माँस से मूत्र की बदबू आना , तीव स्वरूप का ज्वर , क्षणिक अंधापन( दृष्टि का कम होना ) एवं आंशिक बहरापन । भूख न लगना , प्यास , अधिक उबकाई एवं वमन( उल्टी ) । ।
•• औषधि चिकित्सा व्यवस्था -
• द्रव पदार्थ अधिक मात्रा में ।
• डिहाइड्रेशन की उपस्थिति में 5 % डिक्स्ट्रोज आई वी । ।
एसीडोसिस के लिये - सोडियम लेक्ट्रेट 5 - 90 ग्राम दिन में 3 बार । ।
• संक्रमण के लिये - ‘ एण्टीवायोटिक्स ' । वेटूिम / ओरीप्रिम / सेप्ट्रान - 2 टेबलेट - 5 दिन तक ।
• चकचाप वृद्धि तथा हार्ट प्लोर की चिकित्सा करें ।
•• अनुभुत चिकित्सा - एक झलक -
• मैगसल्फ 16 ग्राम पानी में घोलकर 1 - 1 घण्टे बाद पिलावें । 2 - 4 दस्त खुलकर आ जाते हैं । अथवा ' मिल्क आफ मैगनेसिया ' 2 चम्मच बराबर जल मिलाकर दिन में 2 - 3 बार दें । एवं ‘ अंल्कासाइट्रोन ( ग्लूकोनेट ) 1 - 3 चम्मच बराबर जल मिलाकर दिन में 3 बार दें ।
• क्लैम्प ( Clamp ) सोल कं 1 - 1 कै . दिन में 3 बार ।
अथवा
• वायमॉक्स ( Wymox ) वाईथ - 250 - 500 मि . ग्रा दिन में 3 बार दें ।