कृमिदन्त / दंतकृमि डेन्टल केरीज - Dental Caries ]
![]() |
| Dental Caries |
परिचय -
दाँतों को साफ न रखने से कीटाणु दाँत के तने में घुस जाते हैं । अन्त में यह दन्तमज्जा तक प्रसारित हो जाते हैं । जहाँ से ये दन्तमज्जा के गढ़ में पहुँचकर सड़न की जलन पैदाकर बहुत दर्द होकर सड़न रोग पैदा करते हैं ।कारण -
• जो न तो प्रातः मंजन या पेस्ट आदि से दाँत साफ करते हैं और न ही भोजन के बाद अच्छी तरह कुल्ला ही ।
• गंदा पानी और सड़ा - गला दूषित भोजन ।
लक्षण -

• समय - समय पर तीव्र दर्द के दौरें ।
• पीड़ा के समय बेचैनी ।
• इसमें दाँत के भीतर खोल सा बन जाता है अथवा दाँत गल - गलकर गिरता जाता है ।
• खोल में वस्तु के जाने से असहनीय पीड़ा ।
नोट – दाँत भली प्रकार साफ न करने से , दाँतों एवं मसूड़ों में कीड़ा लग जाने से मुख दुर्गन्धित हो जाने से , दाँतों में पायरिया के कीड़े पड़कर दाँतों में दर्द होने लगता है । दर्द से व्यक्ति बेचैन होकर छटपटाता है ।
चिकित्सा -
• खट्टी , मीठी , अधिक ठंडा और गर्म चीजें न दें ।• गरम चीज खाने के बाद तुरन्त ठंडा वस्तु न दें ।
• पोटाश परमैंगनेट के गरम घोल से कुल्ला ।
• दाँत के छेद में अमृतधारा / आयल क्लोज / क्रियोजोट / कार्बोलिक एसिड की फरेरी( रुई ) रख दें ।
• दर्द दूर करने के लिये सेरीडोन अथवा ब्रुफेन की 1 - 1 टे. दें ।
• खोखली जगह में मसाला भराया जा सकता है ।
• यदि दाँत खूब हिलता हो और लगातार दर्द रहता हो तो उस दाँत को अवश्य निकलवा दें ।
विशिष्ट चिकित्सा -
• ऑप्टालिडॉन 1 टे . + वैक्ट्रिम 1 टे . / ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 - 4 बार गर्म जल से दें । । अथवा आप्टालिडॉन 1 टे . + डुरासाइक्लीन 2 कै . प्रथम दिन और उसके बाद 1 कै . प्रति दिन दें ।• तीव्र दाँत दर्द में स्प्रिट क्लोरोफार्म रुई की फुरेरी से लगावें ।
नोट - • एल्वाइट फोर्ट ( Alvite forte ) का 1 - 2 कै . हर खाने के बाद दें । • सोलूपेन ( Solupen - सिपला ) 1 - 3 चम्मच रोजाना दें ।
• ब्रासील 500 मि . ग्रा . का एक वायल में डिस्टल्ड वाटर मिलाकर माँस में नित्य लगावें । ।
• कॉरबुटिल 1 टे . + वैक्ट्रिम 1 टे . - ऐसी 1 मात्रा गर्म जल से दिन में 3 - 4 बार दें ।
Tags:
दन्त रोग ( DENTOLOGY )
