दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ]
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| tooth ache |
पर्याय -
टूथ - एच , दाँत का दर्द । ओडोन्टाल्जिया ( Odontalgia ) , ओडोनटोडाइनिया ( Odonlodynia ) , पेन इन ए टूथ ( Pain in a tooth ) , दाँत में दर्द होना,परिचय -
दाँत में पीड़ा होना एक आम सी शिकायत बन गई है । किन्तु ऐसी पीड़ा का कोई एक कारण नहीं होता बल्कि भिन्न कारण हो सकते हैं । आज दंतशूल( दांत दर्द ) प्राइवेट जनरल प्रेक्टिस में वह अधिक देखने को मिलता है ।रोग के प्रमुख कारण →

• दंतशूल का सबसे बड़ा कारण दाँत या डाढ़ का खोखला होना या कीड़ा लगना कहलाता है । जिसे कैरीज रोग कहते हैं ।
• दाँत की जड़ों में मैल एवं उस मैल में जीवाणु पैदा हो जाने के कारण । एक या 2 - 3 दाँतों में भीषण दर्द ( Pain ) ।
• दाँतों की सफाई न करने से ।
• दाँत और मसूड़ों में शोथ( सुजन ) या गलन होने से जड़ के पास कुछ जगह खाली हो जाती है । बाट में खाते - पीते समय दाँत पर दबाव पड़ने से पीड़ा होती हैं ।
• ठंडे और गरम पानी से भी दाँतों में पीड़ा ।
• पायरिया के कारण दाँत खराब होने से ।
• पीड़ा - दाँत में सुराख उत्पन्न होने से भी ।
• दाँत टूट जाने से भी दर्द ।
• मुख में भयंकर चोट लगने से ।
• दाँत में पीड़ा होना इसका एक प्रमुख लक्षण है ।
• कभी - कभी दंतशूल के साथ - साथ मसूडों में भी सुजन । जिसका कारण दाँत के अंदर पीप एकत्र होकर मसूड़ों तक को इन्फेक्शन हो जाता है । इस दशा में बहुत तीव्र स्वरूप का शूल होता है एवं चेहरे पर भी लालिमा एवं सूजन दिखायी देती है ।
• हिलने - डुलने एवं गति करने से शूल में वृद्धि ।
• सूजन समाप्त होने पर दाँत को निकाल दें ।
• दाँत में सुराख होने पर सुराख की सफाई कर ‘ क्रियोजोट या कार्बोलिक एसिड अथवा अमृतधारा की फरेरी( जैसे रुई ) रख दें । अभाव में हींग का भी प्रयोग किया जा सकता है । पीडा शान्त हो जाने के बाद सूराख को मसाले से भरवाया जा सकता है ।
• यदि पायरिया की शिकायत हो तो उसकी चिकित्सा करें ।
• सूजन होने पर किसी भी ' सल्फा या एण्टीबायोटिक औषधि का प्रयोग करें ।
• पायरिया के कारण दाँत खराब होने से ।
• पीड़ा - दाँत में सुराख उत्पन्न होने से भी ।
• दाँत टूट जाने से भी दर्द ।
• मुख में भयंकर चोट लगने से ।
सम्भावित लक्षण –

• दाँत में पीड़ा होना इसका एक प्रमुख लक्षण है ।
• कभी - कभी दंतशूल के साथ - साथ मसूडों में भी सुजन । जिसका कारण दाँत के अंदर पीप एकत्र होकर मसूड़ों तक को इन्फेक्शन हो जाता है । इस दशा में बहुत तीव्र स्वरूप का शूल होता है एवं चेहरे पर भी लालिमा एवं सूजन दिखायी देती है ।
• हिलने - डुलने एवं गति करने से शूल में वृद्धि ।
नोट - इस रोग में दाँत एवं मसूड़ों में रह - रहकर भयंकर पीड़ा होती है ।
•• दंतशूल की पेटेन्ट औषधि चिकित्सा →
• एनाल्जेसिक + एण्टी - इन्फ्लामेटरीड्रग्स ( जैसे - ब्रुफेन ) ।• सूजन समाप्त होने पर दाँत को निकाल दें ।
• दाँत में सुराख होने पर सुराख की सफाई कर ‘ क्रियोजोट या कार्बोलिक एसिड अथवा अमृतधारा की फरेरी( जैसे रुई ) रख दें । अभाव में हींग का भी प्रयोग किया जा सकता है । पीडा शान्त हो जाने के बाद सूराख को मसाले से भरवाया जा सकता है ।
• यदि पायरिया की शिकायत हो तो उसकी चिकित्सा करें ।
• सूजन होने पर किसी भी ' सल्फा या एण्टीबायोटिक औषधि का प्रयोग करें ।
नोट - ० दांतों के शूल को नष्ट करने के लिये दाँतों पर लगाने और खाने की औषधियाँ सेवन करायी जाती हैं । साथ ही कारण की चिकित्सा ।
• यदि मधुमेह( डायबिटीज़ ) हो तो साथ में इसकी भी चिकित्सा करें ।
• अजीर्ण या कब्ज के कारण होने वाले दर्द में पेट की सफाई करें ।
•• दर्दनाशक तथा सूजन के लिये —
ब्रुफेन ( Ibuprofen tab . ) 200 , 400 एवं 600 मि . ग्रा . के रूप में शरीर भार के अनुसार दिन में 2 या 3 बार दें । अथवा ऑक्साल्जिन ( Oxalgia ) की 1 - 1 टेबलेट हर 4 घण्टे पर दें । यदि रोगी मुख द्वारा औषधि ले सके तो बैक्ट्रिम ( Bactrim ) अथवा ओरीप्रिम ( Oriprim ) की 1 - 1 टेबलेट दिन में 2 बार 5 दिन तक दें । अथवा इन्जेक्शन क्रिस - 4 ( Crys - 4 - साराभाई ) टेस्ट करके प्रतिदिन माँस में लगावें ।
• जब दर्द शान्त हो जाये तथा सूजन दूर हो जाये तो रोगी के दाँत को स्थायी रूप से निकाले जाने के लिये ' दन्त चिकित्सक के पास अवश्य भेज दें । अन्यथा यह दशा किसी भी समय पुनः हो सकती है ।
•• दंतशूल में सेवन कराने योग्य अपटूडेट एलोपैथिक पेटेन्ट टेबलेट ••
सावधान - अति सुग्राही रोगियों तथा पेप्टिक अल्सर एवं गर्भावस्था में प्रयोग न करे ,
2 . फोटजेसिक ( Fortagesic ) ‘ बिनमेडिकेअर ' - 1 - 2 टेबलेट दिन में 3 - 4 बार दर्द के समय दें ।
सावधान - ० अति सुग्राही रोगियों तथा गर्भावस्था में प्रयोग निषेध । ।
० सेवन काल में कोई वाहन न चलायें ।
3 . अल्गाफेन ( Algaphane ) वी . नॉल - 1 - 2 टेबलेट दिन में 2 या 3 बार ।
4 . फोरासेट ( Foracet - रैनबक्सी ) - दर्द होते ही 1 - 2 टे . दिन में 2 बार ।
5 . डिस्प्रिन ( Disprin ) ' रेकिट एण्ड कॉलमैन - 2 टेबलेट आवश्यकतानुसार।
6 . एवाफोन / एनाफोर्टेन - साधारण दर्द में 1 - 2 टे . दिन में 2 - 3 बार । । भयंकर दर्द की स्थिति में 3 मि . ली . का धीरे - धीरे शिरा या माँस में इन्जेक्शन लगायें ।
•• दंतशूल में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध एलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन ••
2 . पे थीडीन हाइड्रोक्लोराइड ( Pethidine Hydrochloride ) - 0 - 100 मि . ग्रा . ( प्रति सी . सी . ) की सुई माँस में लगावें ।
3 . फाइसेप्टोन ( Physeptone ) बरोज - वेल्कम - 1/2 - 1 मि . ली . माँस या नस में लगावें । ।
4 . सिबाल्जिन ( Cibalgin - सीबा ) - एम्पुल की सुई माँस में आ . नु , लगावें ।
5 . नोवोकेन ( Novocain ) होचेस्ट - 30 मि . ली . वायल में से 1 - 2 मि . ली . औषधि दर्द वाले दाँत के मसूड़े में लगावें । ।
नोट - भयंकर एवं गम्भीर दर्द में फोर्टविन ( Fortwin - रैनबक्सी ) का 1 मि . ली . का माँस या शिरा में इन्जेक्शन धीरे - धीरे लगावें ।
कीड़े से उत्पन्न दंतशूल में - -
• कार्बोलिक एसिड 25 ग्राम , कपूर 25 ग्राम - दोनों को मिलाकर एक शीशी में धूप में रख दें । पिघल कर औषधि तैयार । इस औषधि में फरेरी तर कर ( निचोड़कर ) दाँत के घोघले में रखें ।दंतशूल की उत्कृष्ट औषधि -
• कपूर 10 ग्राम , लौंग का तेल ( Cloves Oil ) 5 ग्राम , कार्बोलिक एसिड 10 ग्राम , थाइमोल 10 ग्राम , मेन्थाल 10 ग्राम । सब एकत्र कर शीशी में रख लें और मजबूत ढ़क्कन लगा दें । इसे आ . नु . दर्द के समय लगावें । ।नोट — अमृतधारा ( ठाकुरदास ) एवं दर दांत ( वैद्यनाथ एवं डाबर ) के ऐसे ही उत्पादन हैं ।
कीड़े मारने वाला तीक्ष्ण तेल -
• क्रियोजोट 10 ग्राम , कार्बोलिक एसिड 10 ग्राम , कपूर 10 ग्राम , लौंग का तेल 10 ग्राम । सभी द्रव्य एक शीशी में भरकर और डाट बंद करके धूप में रख दीजिये मिश्रण तैयार हो जावेगा ।अनुभूत योग -
• क्रोसिन 1 टे . . लार्गेक्टिल ( रोन पोलेन्क ) 25 मि . ग्रा . की 1 टे. , और सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1/2 टे . । ऐसी एक मात्रा दाँत दर्द के समय हर 4 – 6 घण्टे पर अथवा आ . नु . दे ,• बच्चों के दाँत के दर्द में क्रोसिन सीरप 1/4 - (1 - 1/4 )चम्मच आयु के अनुसार दिन में 4 बार ,
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दन्त रोग ( DENTOLOGY )
![दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ] आखिर क्यों हो जाता है ? क्या है इसके पर्याय , परिचय , कारण , चिकित्सा , लक्षण ? Dental / Toothache [Tooth - H - Tooth Ache] Why is it finally? What is its synonyms, intro, reason, medicine, symptoms? दन्तशूल / दाँत का दर्द [ टूथ - एच - Tooth Ache ] आखिर क्यों हो जाता है ? क्या है इसके पर्याय , परिचय , कारण , चिकित्सा , लक्षण ? Dental / Toothache [Tooth - H - Tooth Ache] Why is it finally? What is its synonyms, intro, reason, medicine, symptoms?](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEjhpvbYToidjixMdp0kt0jdLvLsAjzVRyDwgrzUnrb38uOfr6tAoqkVCNcGNeCm4E43A6SNn0alHUaY3_bNo-s4pUsgLGoHRyujCGaJEXoN9vgH1rdImnd8k0mWAKvuyoxP1jxCex09WI-W/s640/41891124385_750e2c04f2_b.jpg)

