अतिसार [ Diarrhoea ] ( बार - बार आने वाले दस्त ), इसका परिचय, कारण, लक्षण, पहिचान, परिणाम, एवं चिकित्सा विधि ।। Diarrhoea (frequent diarrhea), its introduction, causes, symptoms, identification, consequences, and medical method.

अतिसार [ Diarrhoea ] ( बार - बार आने वाले दस्त ) 


अतिसार [ Diarrhoea ]


अतिसार को अंग्रेजी में ' डायरिया ' तथा बोलचाल की भाषा में ' दस्त होना ' कहा जाता है । 

रोग परिचय

गुदा मार्ग से पानी की तरह पतला मल का बार - बार परित्याग होना अतिसार ' कहलाता है । इसमें मल पतला होकर बार - बार बड़ी मात्रा में आता है । ' Acute Diarrhoea is defined an increase in the fluidity and volume of stool . 
" जब कोष्ठ में अधिक पल जमा होता है तो यह अतिसार द्वारा बाहर निकलता है।

 वक्तव्य

जब खाया हुआ भोजन आमाशय पचा नहीं पाता है तब वह अनपचे खाने के साथ जो पतले दस्त आते हैं , उनको ही ' अतिसार ' कहा जाता है ।


रोग के प्रमुख कारण

■ अजीर्ण , पाचन प्रणाली में दोष । 

■ अधिक मसाले युक्त , चिकने , सूखे , खाद्य पदार्थों का सेवन ।


■ आमाशयिक रसों का कम या नहीं बनना । 

■ दूषित जल एवं दूषित शराब का अति मात्रा में सेवन ।


जठर - ग्रहणी सम्मिलन ( Gastro Jejunostomy ) नामक ओपरेशन के उपरान्त अतिसार होता है । 

यूरीमिया , अवटु अतिक्रियता ( Hyper Thyroidism ) एवं पूति जीव रक्तता ( Septicaemia ) आदि । 

■ अधिक भय - शोकादि( मानसिक भावनात्मक उतार-चढ़ाव ) के फलस्वरूप मानसिक भाव । 

■ आमाशय में कृमि( कीड़ा ) , अर्श , ग्रहणी( अमाशय के बाद तथा छोटी आंत से पहले का हिस्सा ) एवं अजीर्ण रोग के परिणामस्वरूप । 

■ पाचन शक्ति से अधिक खाने । 

■ यकृत का सही से काम ना करना। 

■ तीव्र दस्त ( Acute Diarrhoea ) संक्रमण के परिणामस्वरूप होता है । इसमें बैक्टीरिया , वायरस , प्रोटोजुआ , वर्स ( Helminthic ) आदि द्वारा संक्रमित । 



■■ संक्रमण रहित कारणकोलीनर्जिक एजेण्ट्स , मैगनेसियम सम्बन्धित एण्टेसिड्स , ब्राड स्पेक्ट्रम एण्टीबायोटिक्स , जुलाब वाली औषधियाँ आदि ।


रोग के प्रमुख लक्षण -  

रोगी को पतले मल को त्यागने के लिये बार - बार जाना पड़ता है , जो इसका प्रमुख लक्षण है । 

पेट में गुड़गुड़ाहट एवं बार - बार गैस निकलना । 

● प्यास एवं अरुचि । 


● पेट को दबाने पर दर्द ।

● कभी - कभी मितली एवं उल्टी का आभास । 


● अधपचे खाने के दस्त पिचकारी छोड़ने के समान । 

जीभ सूखी ; लाल एवं पीली । 

● छोटी आंत का विकार होने पर नाभि के चारों ओर दर्द का आभास । 


● तीव्र अतिसार में पेट के सम्पूर्ण आधे भाग में शौच जाने से कुछ ही समय पूर्व दर्द एवं बेचैनी । 

● पेट कठोर । 

● कभी - कभी पेट में तीव्र दर्द होती है जो मल त्याग अथवा अधोवायु ( Flatus ) के निकल जाने के पश्चात शान्त हो जाती है। 


● बड़ी मात्रा में पानी जैसा पतला दस्त आने पर रोगी को थकान एवं बेहोशी हो सकती है । 

● साथ में - पसीना आना , हाथ - पैरों का ठंडा होना , कभी - कभी मूर्छा ( Syncope )( बेहोशी ) । ( in serious condition )


● तीव्र अतिसार ' एवं ' दीर्घ स्थायी अतिसार की स्थिति में शरीर भार में कमी । । 
● कभी - कभी रोग के कारण शारीरिक दुबलापन ( Emaciation )
आन्त्र की गतियों को बढ़ाने वाले यान्त्रिक ( Mechanical ) एवं रासायनिक ( Chemical ) पदार्थों का भोजन में अधिक मात्रा में होना अतिसार का सबसे बड़ा कारण है । 

याद रखिये

■ अतिसार प्रायः आमाशय से सम्बन्धित विकृतियों के परिणामस्वरूप होता है ।
■ भोजनोपरान्त पतले दस्त आना कई रोगियों में पायी जाने वाली अवस्था है । अतिसार का भले ही कोई कारण हो , भोजन के उपरान्त दस्त अधिक आते हैं जो घबराहट में और अधिक बढ़ जाते हैं ।


रोग की पहिचान

■ दस्त के पहले मन्द - मन्द दर्द की अनुभूति , पेट में गुड़गुड़ाहट , अफारा , दस्त पतले एवं बार - बार आना , प्यास की अधिकता , दुर्बलता , उदासी एवं आलस्य एवं पीड़ा आदि कष्ट होने पर इसे आसानी से पहिचाना जा सकता है ।


■ पेट के आसपास के क्षेत्र को दबाने पर दर्द बढ़ता है । साथ ही मितली होती है ।


रोग का परिणाम -  

◆ अतिसार ठीक हो जाने वाला रोग है । पर सावधानीपूर्वक पूरे समय तक चिकित्सा आवश्यक हैै। 

◆ आसानी से ठीक नहीं होने वाला कारक के परिणामस्वरूप होने वाला कष्ट युक्त अतिसार साध्य या असाध्य होता है ।

◆  भोजन के पश्चात होने वाला अतिसार की अवस्था प्रायः  बनी हो सकती है पर इसमें रोगी दुर्बल नहीं होता है ।


चिकित्सा विधि -  

■ विश्राम ( Bed Rest ) । 

■ अतिसार की असाध्यावस्था होने से पूर्व ही चिकित्सा आवश्यक । 
■ प्रथम रोग के कारण को दूर करें । 

■  तीव्र अतिसार में प्रारम्भ में ही दस्तों को रोकने की दवाई नहीं देनी चाहिये । 

■  प्रारम्भ के 24 घण्टों में खाने को कुछ न दें । उसे पर्याप्त मात्रा में जल पिलावें। 

■ यदि दोष हल्का हो , रोग का आक्रमण हल्का हो तो दूषित पदार्थों के निकल जाने के उपरान्त अतिसार स्वतः शान्त हो जाता है । ऐसी अवस्था में पाचन योग देना पर्याप्त होता है । 

■ कभी - कभी अतिसार में शरीर का जल अधिक मात्रा में निकल जाता है अतः जलाल्पता ( Dehydration ) के निवारण हेतु शिरामार्ग ( I.V ) से साधारण लवण , जल और ग्लूकोज देना आवश्यक हो जाता है ।

पथ्य एवं सहायक चिकित्सा


◆ पुराने चावल का भात , मूंग की दाल का यूष , मसूर का यूष , कच्चा केला , टमाटर , अदरख , लहसुन , हींग , बेल , आंवला का मुरब्बा , जीरा , मट्ठा , बकरी का दूध आदि लेने चाहिए । 


◆ नये अतिसार में साबूदाना दें । अनार एवं संतरे का रस दे सकते हैं । 



◆ पुराने अतिसार में → पुराने चावलों का भात - मसूर की दाल के साथ दें । साबूदाना भी उपयुक्त है । 


◆  शरीर को गर्म कपड़ों आदि से गर्म रखें । 

सहायक चिकित्सा के रूप में  रोगी को गर्म पानी और नमक का घोल ( शक्कर 2 चम्मच , नमक 1 चम्मच ) गर्म पानी को ठंडा कर मिलाकर 2-2 चम्मच बार - बार पिलावें ।


अतिसार की सामान्य चिकित्सा

कोडीन ( codeine ) 30 मि.ग्रा . दिन में 3 बार। 

अथवा - 

लोपरामाइड ( Loperamide ) 1-2 टेबलेट दिन में 3 बार । 

●● तरल एवं अर्धतरल ( Semifluid ) कम रेशे वाली ( Low Roughage ) आहार पेय की गम्भीरता के अनुसार दें । 

★ गम्भीर अवस्था में - ' जल एवं इलेक्टोलाइट्स की कमी दूर करें । 

★ यदि साथ में डिसेण्ट्री ( आंव - पेचिश ) की भी सम्भावना हो तो - ट्राइमेथोप्रिम ( Trimethoprim ) 200 मि.ग्रा . दिन में 3 बार जल से । 

अथवा -

सिप्रोफ्लोक्सेसिन ( Ciprofloxacin ) 500 मि.ग्रा . दिन में 2 बार दें । 
Correction of Dehydration is the main therapy in the treatment of Acute Diarrhoea .. 

याद रखिये - सामान्य जलाल्पता ( Dehydration ) की स्थिति में ओरल रिहाइड्रेशन ( मुख से ही तरल देना ) से काम चल जाता है पर गम्भीर स्वरूप की डिहाइड्रेशन में शिरागत ( आई . वी . ) तरल देने की आवश्यकता पड़ती है । खाने के लिये राइस वाटर ( Rice water ) । 
मेडिसिन चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों के अनुसार - केओलिन , पेक्टिन एवं ओपिएट्स जैसे - ' डाइफेनोक्सीलेट ' ( Diphenoxylate ) , ' कोडीन फास्फेट का तीव्र अतिसार में कोई लाभ नहीं । ..

डायरिया की सर्वमान्य चिकित्सा


★ नवीन अतिसार में ( In Acute Diarrhoea ) - 

■ विश्राम । 

■ मुख से केवल तरल ( Fluids ) 2 घण्टे तक । हल्की चाय , अरारूट , कांजी , नारियल का पानी , फलों का रस आदि । 


■ एक बार दस्त रुकने पर बटर मिल्क , केला , सेब , हल्के चावल एवं कर्डस ( Curds )  ,

पेक्टोकेब ( Pectocaib ) 2 चम्मच दिन में 4 बार । 

अथवा -

टे . लोमोटिल ( Tab . Lomotil ) 1 टे . प्रति 4 घण्टे पर । 

टे . मेक्सीगान ( Tab . Mexigan ) अथवा बेरालगन ( Beralgan ) 1 टे . दिन में 3 बार । 


टे . डिपेण्डाले एम ( Tab . Dipendal M ) 2 गो . दिन में 3 बार । 

अथवा -

टे . स्ट्रेप्टोटाइड ( Tab . Streptotried ) 2 गोली दिन में 3 बार । 

अथवा - 

कै . इमोसेक ( Cap . Imosec ) 2 कै . प्रति 8 घण्टे पर । 


★ जीर्ण अतिसार में ( In Chronic Diarrhoea ) - 

 कर्ड तथा बटर मिल्क दें । 

टे . पेन्जीनार्म ( Tab . Panzynorm ) 1 टे . 


  टे . कोडीन ( Tab.Codeine ) 1 टे . 
  
टे . स्पोरोलेक ( Tab . Sporolac ) 2 टे . ऐसी 1 मात्रा , दिन में 3 बार । 

कोबाडेक्स ( Cobadex ) या बीकोसूल्स ( Becosules ) - 1 कै . नित्य । 
काल्टिन ( Kaltin ) अथवा पेक्टीलिन एस.जी. ( Pectilin S.G. ) बोरवार्ड - 2 - 4 चम्मच प्रति 4 घण्टे पर । बालक 1 चम्मच प्रति 4 घण्टे पर । ( डायरिया कण्ट्रोल होने तक )
'लोमोटिल ' टेबलेट या लिक्विड अथवा ' लोमोफेन ' टेबलेट या सीरप तीव्र एवं जीर्ण डायरिया में उपयोगी है । 2 टेबलेट या 2 चम्मच लिक्विड य सीरप प्रति 6 घण्टे पर रोग सामान्य होने तक । 

Rx . ( प्रेस्क्रिप्शन )


★ प्रा.दो.शा.  -  लोमोटिल या लोमोफेन - 2 टेबलेट दिन में 3 बार - प्रातः दो .. शा . ।

★ दिन के 10 बजे , 2 बजे , 6 बजे स्ट्रेप्टोमेग्मा ( Streptomagma ) वाईथ 1 टे . + टे . डिपेण्डाल एम . ( Tab . Dipendal M ) एस.के.एफ. 

अथवा- 

★ एरिस्टोजिल- एफ टे . ( Aristogyl - E . Tabs . ) - 1 टे , । दोनों की 1-1 टे . दिन में 3 बार । 

★ सोते समय - कोबाडेक्स ( Cobadex )  - 1 कै . रात सोते समय । इन्जे . माइक्राबिन ( Inj . Macrabin ) 1 मि.ली. मांस में नित्य। 

★ दिन में कई बार - इलेक्ट्राल पाउडर - दिन में कई बार । 
अथवा -
Rx . ( व्यवस्था पत्र )

★ प्रा . दो . सा . -  लोपामाइड ( Lopamide ) टोरेण्ट या रिडोल निर्माता - ' गूफिक ' -2 टे . दिन में 3 बार रोग समान्य होने तक ।

★ 10 बजे , 2 बजे , 6 बजे , -  एमीक्लीन प्लस ( Amicline Plus ) फ्रेन्को इंडियन 2-2 टेबलेट 5 दिन तक । 

★ हर दस्त के बाद - आइमोडियम ( Imodium ) एथनार -1 कै . 

★ दिन में 1 बार - बीप्लेक्स फोर्ट इन्जे . 1 मि.ली. मांस में   नित्य । 

★ दिन में कई बार -  इलेक्ट्रोविओन ( Electrobion ) गर्म पानी में उबाल कर ठंडा कर । 

बच्चों के डायरिया में उपयुक्त अनुभूत व्यावस्था पत्र -


Rx . ( शिशु एवं बालको के लिए प्रयोगार्थ )

★ प्रा . दो . शा. - वालामाइसिन सस्पेन्शन ( Wallamy cin Susp . ) वैलेसी 5 - 15 मि.ग्रा . / किलो . , नित्य 3 भागों में विभाजित कर । 

★ 10 बजे , 2 बजे एवं 6 बजे - एल्डियामाइसीन ( Aldiamycin ) ' एल्केम ' 5 मि . ली . दिन में 3 बार 5-7 दिन तक ।

★ दो . 12 बजे एवं सोते समय -  टिनी - एफ सस्पेन्शन ( Tini - E . Susp . )  ' कोप्रान या एरिस्टोजिल - एफ सस्पेन्शन ( Arystogyl - F Susp . ) – ‘ एरिस्टों 1/2-1 चम्मच दिन में 2 बार । 

★ इलेक्ट्राल पाउडर ( Electral Powder ) एफ.डी.सी. -  गर्म पानी में घोल कर ठंडा कर दिन में कई बार पिलायें

डायरिया की मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Combination Therapy )



सल्फाग्वानेडीन 2 टे . , सल्फाडायाजीन 1 टे . , फोलिक एसिड 1 टे . , सोडाबाई कार्ब 600 मि.ग्रा . सबको मिलाकर 1 पुड़िया बना लें । ऐसी 1 पुड़िया दिन में 3-4 बार । समस्त प्रकार के अतिसार में उपयोगी । 

★  टे . डिपेण्डाल एम . 1 टे . , टे.ओरीप्रिम डी . एस .  1 टे . , सीलिन 500 मि.ग्रा . 1 टे . , फोलिक एसिड 1 टे . , स्ट्रेप्टोमेग्मा 1 टे . , लोपामाइड 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । समस्त प्रकार के अतिसार में उपयोगी । 


सल्फाग्वानेडीन 1 टे . , इण्टरोस्ट्रेप ( डेज ) 1 कै . , डिपेण्डाल एम 1 टे . , डिस्ट्राल 1 टे .। ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार दें ।

स्ट्रेप्टोमेग्मा ( वाईथ ) 1 चम्मच , ग्वानीमाइसीन सस्पेन्शन फोर्ट ( ग्लैक्सो ) 1 चम्मच । ऐसी 1 मात्रा बच्चों को दिन में 3 बार दें।  बड़ों को 2 बड़े चम्मच दिन 3 बार । विशेष - ग्रीमातिसार , संक्रामक अतिसार , मरोड़ वाले दस्त , आँतों की खराश एवं पित्त वाले दस्तों में उपयोगी । 

वेसिप्लोन ( खण्डेलवाल ) 1 कै . , ओरीप्रिम डी . एस . ( केडिला ) 1 टे . , इण्टरोवायोफार्म ( सिवा - गैगी ) 1 टे . , फुराक्सान ( S.K.F ) 1 टे . , सीलिन 100 मि.ग्रा . ( ग्लैक्सो ) 2 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार । बालकों को उनकी आयु के अनुसार । 

★  डिपेण्डाल एम 1 टे . , ओरीप्रिम डी.एस. 1/2 टे . , एमीक्लीन प्लस ( ग्रीफान ) 1 टे . , एल्डाए- माइसीन ( एल्केम ) 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा हर 6 घण्टे पर पर्याप्त जल के साथ दें । बच्चों को आयु के अनुसार मां के दूध अथवा फलों के रस के साथ । 

डिपेण्डाल एम 1 टे . , इण्टरोक्वीनोल 1 टे . , डिस्ट्राल 1 टे . , सल्फाग्वानीडीन 2 टे . , ओरीप्रिम डी.एस. 1/2 टे . , स्ट्रेप्टोमेग्मा 1 टे . । ऐसी एक मात्रा प्रति 3 घण्टे पर । 

लोमोटिल या लोमोपेन 2 टे . , सल्फाग्वानेडीन 2 टे . , स्ट्रेप्टोटाइड 1 टे . , डिपेण्डाल एम . 1 टे . , इण्टरोक्वीनोल 1 टे . , डिस्ट्राल 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । 

सल्फाग्वानेडीन 2 टे . , ऐल्यूड्राक्स ( वाइथ ) 1 टे . , कोमाइसीन ( स्ट्रेप्टोमाइसीन ) ग्लैकसोफार्मा 1 टे . , बी . कम्पेक्स ( ग्लैक्सो कं . ) 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार । बच्चों को इस मात्रा को 4 भागों में बांटकर प्रातः सायं मां के दूध के साथ दें । 

डायरिया की अनुभूत चिकित्सा


पेक्टिन केओलीन कम्पाउण्ड ( Pectin Keolin Co. ) 15-30 मि.ली. दिन में 3 बार प्रा . दो . सा . दें । 

एवं __लोमोटिल 1 टे . , दिन में 3 बार प्रा . दो . सा . यानी 10 बजे , 2 बजे , सायं 6 बजे साथ ही ' फूरामाइड 1 टे . । दो . , सायं 4 बजे एवं रात्रि सोते समय दें । 

■ इलेक्ट्राल पाउडर बना बनाया उपलब्ध न होने पर इसे इस प्रकार बना लें ग्लूकोज 40 ग्राम , सोडा बाईकाई 1/2 चम्मच , नमक 1/2 चम्मच , नीबू 1/2 , पानी 1 लीटर । इसी घोल को दिन में कई बार पिलायें । 

अतिसार ( डायरिया ) की लक्षणों के अनुसार विशेष चिकित्सा



1. गर्मी के दस्त ( Summer Diarrhoea ) आंत्र की शोथ से उत्पन्न दस्तों में → बायोमेबिक - एफ सस्पेन्शन ( Biome bic - F Susp . ) निमार्ता ' बायोकेम -2 चम्मच ( 10 मि.ली. ) दिन में 2 बार । 

निषेध - गर्भावस्था के प्रथम 3 माह , दूध पिलाने वाली माताओं , रक्तविकार एवं 1 मास से कम के शिशुओं में इसका प्रयोग न करें ।

2. विभिन्न संक्रमणों से उत्पन्न अतिसार , बैक्टीरियल अतिसार , विषैले भोजन से उत्पन्न अतिसार में   आइमोसेक - एस ( Imosec - s ) इथनॉर -1 कै . दिन में 4 बार 3 से 6 दिन तक ।

3. यकृत विकृति से उत्पन्न पतले अतिसारों में →  2 से 15 एम्पुल खाली पेट । बच्चों को 2 एम्पुल भोजन से 15 मिनट पूर्व खाली पेट । - इसका पाउडर एम्पुल में पैकआता है ।

4. विषैले भोजन से उत्पन्न आतिसारों एवं पुराने संक्रामक पतले अतिसारों में → जेटोसेक - एस ( Jetosec - s ) एंथनॉर 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों में 5 मि.ली. सीरप ।

5. साधारण अतिसार , यात्रियों के पतले अतिसार , बेसिलरी डिसेण्ट्री आदि के अतिसार   स्ट्रेप्टोट्रायड ‘ एम.वी .'- 2 टे . दिन में 3 बार । बच्चों को 1/2 - 1 टेबलेट दिन में 3-4 बार ।

6. बैक्टीरिया के संक्रमण से होने वाले शिशुओं एवं बच्चों के पतले दस्तों में  ' बालामायसिन सस्पेन्सन - 5-15 मि . ग्रा . प्रति किलो शरीर भार पर प्रतिदिन की मात्रा 3 भागों में बांट कर दें ।

7. अमीबाजन्य अतिसार , बेसिलरी पेचिश जन्य अतिसार → एमीक्लीन प्लस 2 टे . दिन में 3 बार 7 दिन तक जल से दें ।

8. किसी प्रकार का अतिसार , जल के समान पतले दस्त →  ' इन्टेरोमैक ( Enteromac ) मैक -2 चम्मच दिन में 4 बार । बच्चों को 1/4 - 1/2 चम्मच आयु के अनुसार दें ।

9. चिकनाई वाले पदार्थ खाने से उत्पन्न अतिसार में → फेस्टाल - की 1 टे . खाना खाने के बाद दें ।

10. पुराना अतिसार , संग्रहणी जनित अतिसार → फोलिक एसिड की 1-2 टे . दिन में 3 बार दे ।

11. अतिसार से हृदय का दुर्बल होना → कोरामीन की 1 टे . जल से दें । अथवा इसका इन्जे . दें । 

12. अतिसार के रोगी में द्रवांश की कमी होने पर → ' नार्मल सैलाइन या डेक्स्ट्रोज नार्मल सैलान ( आई . वी .) बूंद - बूंद कर चढ़ायें ।

13. कॉलरा जनित अतिसार में →' टेट्रासाइक्लीन 250 मि.ग्रा . दिन में 4 बार ।

14.शिजेला जनित अतिसार में →' टेट्रासाइक्लीन 250 मि.ग्रा . दिन में 4 बार । अथवा ट्राइमेथोप्रिम - सल्फामेथो क्साजोल -2 टेबलेट दिन में 2 बार ।
' एमीबिआसिस ' तथा ' जियार्डियासिस के लिये उपयुक्त चिकित्सा करें। 

डायरिया में प्रयोग आने वाली सुप्रसिद्ध एलोपैथिक पेटेन्ट मेडिसिनल टेबलेट / कै . 



1. एरिस्टोजिल - एफ टेबलेट ( Aristogyl -FTabs ) ( नि . एरिस्टो )  1-2 टेबलेट दिन में 2 बार । 7 दिन तक । 

● गर्भावस्था के प्रथम 3 मास , 1 माह से कम के शिशु तथा यकृत विकारों में इसका प्रयोग न करें ।

2. डिपेण्डाल - एम ( Dependal - M ) नि . ' एस.के.एफ. ' → 1 टे . 3 से 7 दिन तक दिन में 3 बार । बालक 1/4 - 1/2 टे . दिन में 3 बार 3 से 7 दिन तक । 

● 1 माह से कम आयु के शिशु तथा गर्भावस्था के प्रथम 3 मास में इसका प्रयोग न करें । 

3. डिसिनक्लोर ( Dysenclor ) नि . ' एस . जी . फार्मा  2 टे . दिन में 3 बार । समस्त प्रकार के अतिसार में ।

4. इमेन्टिड टेबलेट नि . ' एम.एम. लेब्स → 1 टे . दिन में 4 बार । बालक - 1/4 1/2 टे . दिन में 4 बार ।

5. इमेन्टिड - एम नि . एम.एम.लेब्स   1 टे . दिन में 3 बार 5-7 दिन तक । बच्चों को आधी ।


6. फ्लेजिल - एफ नि . Rhone- Poulenc   1-2 टे . दिन में 3 बार 2-5 दिन तक ।

7. फुरोक्सोन ( Furoxone ) नि . एस . के.एफ. '  1 टे . दिन में 3-4 बार । बालक 5 मि.ग्रा . / किलो . नित्य की 3 मात्राओं में विभाजित कर । 

8. इमोडियम कैप्सूल ( Imodium cap . ) नि . ' इथनोर  → तीव्र अतिसार में -2 कै . / तत्पश्चात हर दस्त के बाद 1 कै . । बालकों को 1 कै . तत्काल । तत्पश्चात 1 कै . हर दस्त के बाद ।

यही मात्रा - जीर्ण अतिसार के रोगी की है । 

9. इमोसेक- एस . ( Imosec - S ) नि . कै . ' इथनार  1 कै . दिन में 4 बार 3 से 5 दिन तक ।

10. इमोजोल ( Imozol ) नि . इथनोर  1 टे . दिन में 3-4 बार 2 से 5 दिन तक । 

निषेध -1 साल से कम के बालक में प्रयोग न करें ।

11. लोमोफेन ( Lomofen ) नि . ' सलें  2 टे . प्रति 6 घण्टे / बालक 1/4 - 1/2 टे . प्रति 6 घंटे पर डायरिया ठीक होने तक । 

चेतावनी- 6 साल से कम के बालक तथा ' कामला रोगी ( Jaundice ) में इसका प्रयोग न करें ।

12. लोमोटिल ( Lomotil ) नि . ' सलें 2 टे . प्रति 6 घण्टे पर डायरिया कण्ट्रोल होने तक ।शेष सभी लोमोफेन के समान ।

13. लोपामाइडटे . नि . टोरेण्ट  2 टे . । तत्पश्चात 1 टे . हर दस्त के बाद । अधिकतम 8 गोली नित्य । बालक 9 से 12 साल के -1 टेबलेट । तत्पश्चात हर दस्त के बाद 1 टे .।

14. निलामाइड ( Nilamide ) ( एल . ए . फार्मा )  2 टेबलेट । तत्पश्चात 1 टे . हर दस्त के बाद । अधिक से अधिक 8 टे . रोज । समस्त प्रकार के .अतिसार में उपयोगी ।

15. नोवोनिडाजिल ( Novonidagyi ) नि . ' पी.एन्ड . वी . '  1-2 टे . दिन में 3 बार । बालक - 5 साल अथवा ऊपर - 1/2 टे . ।

16. रिडोल ( Ridol ) नि . ' गूफिक  1 टे . , तत्पश्चात 1 टे . हर दस्त के बाद ( 8 गोली तक नित्य ) । डायरिया की लाक्षणिक चिकित्सा , तीव्र एवं जीर्ण स्वरूप के अतिसार में । 

17.सेरिल ( Saril ) नि . रैलिस  1-2 टे . दिन में 3-4 बार ।

18. स्पोरलेक ( Sporlac ) नि.'यूनीसंकाय 1-2 टे . दिन में 3 बार । नवजात शिशु , बालक एवं वयस्कों में । 

19. स्ट्रेप्टोमैगमा ( Streptomagma ) नि . ' वीथ  2 टे . दिन में 4 बार । बैक्टीरियल डायरिया में उपयोगी ।

20. स्ट्रेप्टोट्राइड ( Streptotriad ) नि . ' Rhone - Poulenc   2 टे . दिन में 3 बार । 1 हफ्ते से कम वाले शिशु में प्रयोग न करें । अतिसार , यात्राजन्य अतिसार में विशेष उपयोगी । 

21. टिनी - एफ टेबलेट्स ( Tini - E tabs . ) नि . ' कोप्रान  1 टे . दिन में 3 बार 2-5 दिन तक । मिश्रित संक्रामक अतिसार ( Mixed infected diarrhoea ) में उपयोगी ।

22. यू . लिक्स -पी . ( U. Lix - P ) - नि . ' ब्लूक्रोस  60 मि . ग्रा . / किलो । नित्य , विभाजित मात्रा में 5-7 दिन तक । वैक्टीरियल डायरिया में । यू - लिक्स -250 टे . भी आती है ।



अतिसार में प्रयोग आने वाले सुप्रसिद्ध लेटेस्ट पेटेन्ट पेय -



1. एल्डियामाइसीन ( Aldiamycin ) नि . ' एल्केम 2 चम्मच ( 10 मि.ली. ) दिन में 4 बार । बालक 1 चम्मच दिन में 4 बार 5-7 दिन तक ।

2. एरिस्टोजिल - एफ सस्पे . ( Aristo gyl - F Suspension )एरिस्ट   2.5-1 मि.ली. ( 1/2 - 2 चम्मच ) दिन में 3 बार 4-8 दिन तक । ( 1 माह से कम के शिशुओं में प्रयोग न करें )

3. डिपेण्डाल - एम सस्पे . ( Dependal MSusp . ) नि . एस . के.एफ. '   वयस्क 40 मि.ली. ( 8 चम्मच ) , बालक 1 साल तक 1/2 चम्मच , 1 से 5 साल -2 चम्मच । सभी को दिन में तीन बार ।


4. इमेन्टिड ( Emantid ) नि . ' एम.एम. लेब्स   शिशु 1/2-1 चम्मच । बालक 6 साल से नीचे 7.5 से 15 मि.ली. । वयस्क - 15-30 मि.ली. । सभी को दिन में 4 बार ।

5. इमेन्टिड एम सस्पे . ( Emanted -M Susp . ) F. ' M.M. Labs  2.5-5 मि.ली. ( 1/2-1 चम्मच ) दिन में 3 बार 5-7 दिन तक । ( 1 माह से नीचे शिशु में तथा गर्भावस्था के प्रथम मास में प्रयोग न करें )

6. इण्टरोजाइम ( Entrozyme ) नि . स्टेडमेड   10-20 मि.ली. प्रति 6 घण्टे पर / बालक -5 मि.ली. ।  ( प्रोटोजुआ तथा संक्रामक अतिसार में )

7. फ्लेजिल - एफ सस्पे . ( Flagyl - F Susp . ) F. ' Rhone - Poulenc    बालक 1 साल के 2.5 मि.ली. , 1 से 5 साल -5 मि.ली. एवं 5 साल से ऊपर 10 मि.ली. । सभी को दिन में 3 बार ।

8. फूरोक्सोन सस्पे . ( Furoxone Susp . ) नि . एस.के.एफ.   बालक 1 साल तक 1/4-1 चम्मच । 1 से 4 साल तक 1 चम्मच , 5 साल से ऊपर  1 से डेढ़ चम्मच । सभी को दिन में 4 बार ।

9. इमोडियम लिक्विड ( Emodium liquid ) नि . ' इथनोर   बालक ( 2-5 साल ) 0.08 मि.ग्रा . - 0.24 मि . ग्रा . , 24 घण्टे में 6 मात्राओं में विभाजित कर । अधिकतम 5 किलो भार पर 6 मि.ली. ।  ( चेतावनी -2 साल से नीचे प्रयोग न करें )

10. इमोजोल लिक्विड ( Emozol liquid ) नि . ' इथनोर   बालक 5-12 साल 5 मि.ली. । 1-4 साल 2.5 मि.ली. । सभी को दिन में 3-4 बार दें ।  ( 1 साल से कम को नहीं )

11. जेटोसिक - एस ( Jetosec - S ) नि . ' इथनोर   बालक 5 साल से कम 1.5 मि.ली. 15 साल से ऊपर 5 मि.ली. । सभी को दिन में 3-4 बार ।

12. काल्टिन विद नियोमाइसीन ( Kaltin with Neomycin ) नि . ' एव्वोट   शिशु -5 मि.ली. । बालक 2-6 वर्ष 15 मि.ली. । बड़े बालक तथा वयस्क 30 मि.ली. । सभी को दिन में 4 से 6 बार तक ।

13. नोवोनिडाजिल सस्पेन्शन ( Novoni dagyl Susp . ) नि. P & B.Labs . 2 चम्मच दिन में 3 बार । बालक 1 चम्मच दिन में 3 बार ।  ( समस्त प्रकार के अतिसार एवं पेचिश में )

14. पेक्टूकेब स्प्रेय . ( Pectokab Susp . ) नि . कमेज  10-15 मि.ली. दिन में 3-4 बार । बालक 1/2-1 चम्मच । समस्त प्रकार के अतिसार में ।

15. रिडोल सोलन ( Ridol Soln ) नि . गूफिक   विवरण पत्र के अनुसार ।

16. स्ट्रेप्टोमेग्मा सस्पे . ( Streptomagma Susp . )   30 मि.ली. दिन में 4 बार । बालक 6 साल तक आधी मात्रा वयस्क की ।

17. टिनी - एफ सस्पे . ( Tini - E Susp) कोपरांन  15-20 मि.ली. दिन में 4 बार । बालक 2.5 से 7.5 मि.ली. तक दिन में 4 बार ।

18. वेलामाइसिन सस्पे . ( Walamycin Susp . ) नि . ' बलेसी   शिशु और बालक 5-15 मि.ग्रा . / किलो . शरीर भार पर , 3 विभाजित मात्राओं में ।


अतिसार में लगाने योग्य अपटूडेट एलोपैथिक पेटेन्ट इन्जेक्शन



1.फोल्वाईट नि . ' लीडलें  → पुराने रोग में 1-2 मि.ली. मांस में 1 दिन छोड़कर । 

2. मैक्राबिन एच . नि . ग्लैक्सो फा . 1 मि.ली. नित्य मांस में । 

3. लिवर एक्स्ट्रेक्ट ( एलवर्ट डेविड )  → पुराने रोग में 2 मि.ली. मांस में प्रति तीसरे दिन । कोर्स 10-15 इन्जे . पर्याप्त । 

4. कम्पलेक्स बी फोर्ट ( ग्लैक्सो ) 1-2 मि.ली. नित्य मांस में ।


 

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