आध्यमान , अफारा , अनाह [ Flatulence ]
| Flatulence |
पर्याय -
इसे सामान्य भाषा में पेट का फूलना कहते हैं । गैस ट्रबल भी इसी का नाम है ।
रोग परिचय -
' आमाशय ' , ' आन्त्रपथ ( गैस्ट्रो - इन्टेस्टाइनल ट्रेक्ट ) में गैसों के एकत्रित होने की अवस्था को ' अफारा कहते हैं । अजीर्ण , मन्दाग्नि , एवं अतिसार ( पेचिस ) के परिणामस्वरूप पेट में वायु एकत्रित होकर पेट फूल जाता है ।
इस रोग में पेट मशक( एक तरह का थैला जिसमें पानी भरा होता है ) की भाँति फूल जाता है,
रोग के मुख्य कारण -
■ पित्त की न्यूनता के कारण आहार का ठीक से पाचन न होने से ।
■ खान - पान में गड़बड़ी / असंतुलित भोजन एवं अत्यधिक भोजन ।

■ रात में अधिक समय तक जागना ।
■ जीर्ण अमाशय की सूजन ।
■ कब्ज ( मलबद्धता ) ( कान्स्टीपेशन ) ।
■ आँतों की कमजोरी ।
■ आंत्रिक ज्वर , निमोनिया , मस्तिष्का वरण शोथ ( रीड की हड्डी और मस्तिष्क के आस-पास मेनिंग झिल्ली में सूजन ) आदि में तीब्र विषमयता ( Toxicity ) के परिणामस्वरूप ।
■ अमीबारुग्णता ( एमोबिओसिस ) ।
■ कार्बोहाइड्रेट्स एवं प्रोटीन के किण्वीकरण ( Fermentation ) से गैस की उत्पत्ति ।
■ यकृत एवं फेफड़ों में रक्त प्रवाह की कमी ।
■ सुखा हुआ व बिना रस वाले खाद्य पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन ।
■ आमाशय का अकस्मात फैल जाना ।
■ मानसिक अस्थिरता एवं आमाशय के दीवार की कमजोरी ।
रोग के मुख्य लक्षण -
- पेट फूलना ।

● रोगी में घबराहट एवं बेचैनी ।
● छाती में जलन ।
● पेट में गुड़गुडाहट एवं पीड़ा ।
● छाती में दबाव ( वायु का ) पड़ने से दिल की सामान्य गति अपेक्षाकृत तेज ।
● डकार एवं गुदा मार्ग से इकट्ठी हुई वायु का समय - समय पर निकलना एवं मल त्याग के समय वायु का आवाज के साथ निकलना । अन्य - ' सिर दर्द , ' चक्कर आना ' , ' नाड़ी दुर्बलता ' आदि लक्षण भी मिलते हैं ।
डकार एवं गुदा मार्ग से वायु के निकल जाने से रोगी को कुछ शान्ति मिल जाती है ।
संक्षेप में -
इसमें पेट फूल जाता है , श्वास लेने में कठिनाई होती है । पेट में दर्द उठता है और बेचैनी बढ़ जाती है । जी मिचलाता है , खट्टी डकारें आती हैं । पेट अधिक फूल जाने से बैठा नहीं जा सकताऔर दर्द के कारण व्याकुलता बढ़ जाती है । हृदय की धड़कन बढ़ जाती है , बात करने में कष्ट होता है ।
नोट- कुछ ऐसे आहार हैं जिनके सेवन से बहुत सी गैस बनती है जैसे- मटर , चना एवं अरहर की दाल । सामान्य रूप से यह गैस बाहर निकल जाती है । परन्तु पेट की मांसपेशियाँ कमजोर होने पर यह गैस आँतों में फँस कर अफारा ( Tympanitis ) उत्पन्न करती है ।
याद रखिये-
अधिकतर वृद्धावस्था के लोग ही अधिक रोगी होते हैं । रक्त की मात्रा शरीर में कम हो जाने से इन्जाइमों का निर्माण कम होने लगता है । इस प्रकार से खाना पचता नहीं , सड़ने लगता है । सड़ने से गैस बनती है जो छोटी - बड़ी आंतों में भर कर पेट फुला देती है और पेट में दर्द होने लगता है।
रोग की पहिचान -
■ मशक के समान पेट का फूलना एवं नसों में तनाव ।
■ जी घबराना एवं सांस लेने में परेशानी ।
■ मलबद्धता ( कब्ज ) एवं बेचैनी ।
■ नाड़ी दुर्बलता आदि लक्षणों से इसे आसानी से पहिचान सकते हैं ।
- स्वयं जांच - उदर को बजाने से ढोल जैसी आवाज ।
रोग का परिणाम -
■ अति कठिनाई से कन्ट्रोल में आने वाला रोग है ।
■ पेट की गैस जब ऊपर उठ कर दिल पर दबाव डालती है तब दिल की धड़कन एवं बेचैनी बढ़ जाती है तथा अपना दम घुटता सा प्रतीत होता है ।
■ गैस ऊपर उठकर जब मस्तिष्क को प्रभावित करती है तब ' सिर - दर्द ' एवं ' सिर चकराने के लक्षण ।
■ नाड़ी दुर्बलता ।
चिकित्सा विधि -
चिकित्सा 3 रूपों में संयोजी जाती है। -
★ वायु शामक ( Gas absorbent ) चिकित्सा ।
★ आकुंचनहर ( Antispasmodic ) चिकित्सा ।
★ स्नायु दुर्बलता नाशक चिकित्सा ।
नोट - इसकी चिकित्सा में ' वातानुमोलन उपचार प्रमुख है । ' संचित हुए दूषित मल एवं वायु संचय को वातानुमोलन औषधियों के प्रयोग से बाहर निकालना चाहिये । इसके लिये वस्ति ( वस्ती कर्म में गुदा मार्ग के द्वारा पानी या वायु को बड़ी आंत में खींचा जाता है और फिर इसको निकाल दिया जाता है ) का भी उपयोग किया जाता है ।- इस रोग में पेट का पसीना , अभ्यंग( मालिश ) , गुदावर्ति ( Sapposi tory ) एवं वस्ति का उपयोग सही माना गया है ।
पथ्य अपथ्य एवं सहायक चिकित्सा -
■ पथ्यचिकित्सा अजीर्ण एवं मन्दाग्नि के अनुरूप ।
■ हींग , लहसुन , अदरख , उड़द , तिल , चावल की खिचड़ी , मूली , शलजम का उपयोग श्रेयस्कर है ।
सहायक चिकित्सा -
◆ शिथिल हुए पक्वाश्य ( पेट का वह स्थान जहां अमाशय में ढीला होकर अन्य जाता है और यही यकृत और क्रोम ग्रंथियों से आए हुए रस मिलते हैं ) को सक्रिय बनाने प्रयत्न करना चाहिये ।
◆ तारपीन के तेल को हींग और गर्म पानी में मिलाकर पेट की सिकाई ।
◆ नासा मार्ग से राइल्स ट्यूब डालकर अपशिष्ट को निकालना ।
◆ गुदा मार्ग से आध्यमान नलिका ( फ्लेट्स ट्यूब ) का प्रवेश एवं पेट पर तारपीन तेल की सिकाई ।
याद रखिये -
■ जनरल प्रैक्टिस में जो रोगी मिलते हैं , अधिकांश आध्यमान का कारण ' डिस्पेप्सिया ' , ' कान्स्टीपेशन तथा ' एमीबिओसिस एवं प्रवाहिका( दस्त ) के विशेष रूप से होते हैं ।■ जैसे ही आध्यमान का रोगी मिले इन कारणों की ओर ध्यान रखकर चिकित्सा करनी चाहिये ।
आध्यमान - औषधि चिकित्सा -
1. आमाशयिक अफारा ( Gastric Flatulence ) - टे . जाइमेट्स ( Zymets ) या जेलूसिल एम.पी.एस. ( Gelusil M.PS. ) 2 टेबलेट - भोजन के बाद । अथवा- सिमेकोल ( Simecol ) या पोलीक्रोल ( Polycrol ) 2 चम्मच , भोजनोपरान्त दिन में 2 बार ।
◆ कार्मीसिड फोर्ट ( Carmicide forte ) 1 चम्मच दिन में 3 बार भोजनोपरान्त जल के साथ ।
2. आन्त्रिक आध्यमान ( Intestinal Flatulence ) - टे . मरकिनजाइम ( Tabs . Mercken zyme ) अथवा टे . कोम्बीजाइम ( Tabs . Combizyme ) 1 टेबलेट हर भोजन के बाद ।
Rx - ( प्रेस्क्रिप्शन )
■ प्रोस्टिग्मीन ( Prostigmin ) रोशे - 1 मि.ली. + बीप्लेक्स ( Beplex ) ए.एफ.डी. - 1 मि.ली. ।( दोनों को मिलाकर कमर ( नितम्भ ) के गहरे मांस में )■ प्रोस्टिामीन 1 टेबलेट + बीप्लेक्स 1 टेबलेट दिन में 2 बार जल से ।■ एल्वीजाइम ( Alvizyme ) एलेम्बिक अथवा ' डिस्पेप्टाल ( 1 टेबलेट भोजन के मध्य , दिन में 2 बार )■ जाइमेट्स ( Zymets ) पी.डी. ( 1 टेबलेट भोजन के 1 घण्टे बाद एवं सोते समय )
आध्यमान की मिश्रित औषधियों द्वारा अनुभूत चिकित्सा -
★ वीकोसूल्स ( फाइजर ) 1 कै . , नार्मोजाइम ( यूनील्वाइड्स ) 1 टेबलेट , विवीनोल फोर्ट विद विटामिन ' सी ' 1 कै . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार ।
★ डिस्पेप्टाल ( बोहरिंगर ) 1 टेबलेट , लिबरियम 10 मि.ग्रा . की 1 टेबलेट , विटा. ' बी ' कम्पलेक्स विद ' बी-12 ,, की 1 टेबलेट , वेरिन 50 मि . ग्रा . की 1 टेबलेट , सीलिन 100 मि.ग्रा . की 1 टेबलेट । इन सबको पीस कर पुड़िया बनालें । ऐसी 1 पुड़िया दिन में 3 बार भोजन के बाद ।
विशेष उपयोग - गैस बनने एवं उससे उत्पन्न तमाम लक्षणों में उपयोगी ।
★ ' बीकोजाइम फोर्ट ( फ्रेन्को - इंडियन ) - 1 टे . इनजार ( वाल्टर वुशनेल ) 2 टेबलेट , एरोविट ( रोश ) 1 टेबलेट , पेप्सीनोजाइम ( स्टेडमेड ) 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार गर्म जल से ।

★ फेस्टाल ( हैक्स्ट ) 2 टेबलेट , सोडामिण्ट 2 टे . , कारविण्डोन ( इण्डोन ) 1 टे.। ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार जल से । साथ ही ग्लिसरीन सपोजीटरी गुदा मार्ग में प्रविष्ट करें ।
विशेष लाभ - आमाशय की अम्लता , अफारा , अजीर्ण , एवं वायु को रुकावट में तत्काल लाभकारी योग ।
★ पेप्सीनोजाइम ' ( स्टेमेड ) 2 टे . ' सोडामिण्ट ( बूट्स ) 2 टेबलेट , सीलिन 500 मि.ग्रा . ( गैलेक्सो ) 1/2 टेबलेट , बीप्लेक्स 1 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार जल से ।
विशेष लाभ - पाचन शक्ति को बढ़ाकर अफारा दूर करती है ।
★ ' यूनीइन्जाइम ( यूनीकेम ) 1 टे . , ' सोडामिण्ट या सोडा जिन्जामिण्ट ( एलेम्बिक ) 2 टे . , सीलिन ( ग्लैक्सो ) 500 मि.ग्रा . की 1/2 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार भोजन के बाद ।
विशेष लाभ - जब पेट फूल रहा हो , पेट में गड़गड़ाहट , अजीर्ण , पेट आमाशय के खट्टेपन में लाभकारी ।
★ ' नियो - आक्टीनम ( बी नोल ) 1 टेबलेट जल के साथ दिन में 3 बार दें । साथ ही - ' डिस्पेप्टाल ( बी नोल ) 1 टे . हर भोजन के साथ दें । सोते समय फेस्टाल 1 टेबलेट दें ।
अफारा की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा -
1. यदि अफारा को तत्काल दूर करना हो → पोलीक्रेस्ट फोर्ट ( Polycrest Forte ) निमार्ता - निकोलस - 1 टे . भोजन के बाद दिन में 3-4 बार चबाकर खायें ।
नोट- इसका तरल ( liquid ) भी आता है । मात्रा 5-10 मि.ली. जैल भोजन के बाद दिन में 3-4 बार पिलायें ।
2. अजीर्ण जनित अफारा → अल्ट्रासिल ( Ultrasil ) नि.- ब्लूक्रॉस , 1 टे . भोजन के बाद खूब चबायें । अथवा इसका सिरप 1 चम्मच की मात्रा में भोजन के तत्काल बाद दें ।
3. पेट में अधिक गैस बनना → यूपेप्टाइन ( Eupeptine ) नि . रेप्टाकोस - 1-2 चम्मच दिन में 3 बार भोजन के बाद दें ।
4. ऐंठन के साथ पेट फूलना → ' प्रोस्टिग्मीन या ' कार्बेकोल- 1-1 टेबलेट दिन में 3 या 4 बार ।
5. अरुचि के साथ अफारा → टे . फेस्टाल ( Tab . Festal ) -1 गोली . दिन में 3-4 बार ।
6. शूल युक्त आमाशय में गैस → ' पोलीक्रोल नि . ' निकोलस -1 हरी + 1 सफेद टेबलेट दिन में 2-3 बार दें । साथ ही- नियो - आक्टीनम - की 1 टेबलेट जल से दिन में 3 बार दें ।

7. ' डिस्पेप्सिया ' एवं ' अजीर्ण एवं ' अजीर्ण की स्थिति में अफारा → सीरप कार्मीसिड ( स्ट्रोंग ) -2 चम्मच दिन में 3 बार दें एवं मरकेन्जाइम 1 टे . भोजन के तुरन्त बाद दिन में 2 बार दें । साथ ही सीरप डीजीप्लेक्स 2 चम्मच दिन में 3 बार नास्ते या दोनों समय खाने के बाद थोड़ा जल मिलाकर दें ।
अथवा -
जैलूसिल एम . ( Gelusil MPS ) 2 टे . भोजन के बाद दिन में 2 बार चूसें । अथवा ' सेमीकोल ( Semicol ) या पोलीक्रोल -2 चम्मच दिन में 2 बार भोजन के बाद दें ।
8. मलबद्धता ( कान्स्टीपेशन ) से उत्पन्न अफारा रोग में → अधिकांश रोगी इसी स्थिति के मिलते हैं । इनकी चिकित्सा मलबद्धता में बतायी चिकित्सा के अनुसार करें ।
9. पेट के दर्द के साथ अफारा → ' नियो - ऑक्टीनम 1 टे . जल के साथ दिन में 3 बार दें ।
10. प्रातः सायं पेट आना → ' डिस्पेप्टाल नोल की 1 टे . खाने के बाद प्रातः सायं दें ।
11. अधिक गैस से पेट का अधिक फूलना → यूपेप्टाइन 1-2 चम्मच खाने के बाद दें ।
12. आन्त्र की शिथिलता से उत्पन्न अफारा रोग → ' पिट्रेसिन ' 1/2 मि.ली. या ' लिस्पामिन 2 मि.ली. या ' प्रोस्टिग्मीन का मांसपेशीगत इन्जे . लगायें । साथ ही टे . ' मरकेन्जाइम ' अथवा टे . ' कोम्बीजाइम 1 टेबलेट भोजन के बाद दिन में 2 बार दें ।
13. अमीबाजन्य आध्यमान → इसके 70 % रोगी मिलते हैं । इसके लिये
' अमीबारोधी औषधियों का प्रयोग करने से आध्यमान स्वयं दूर हो जाता है ।
14. यदि पेट की गुड़गुड़ाहट बंद न हो तो → केस्टर आयल का एनीमा दें । तत्काल लाभ होगा ।
■ इसके साथ कारण की चिकित्सा करें । कार्मीनेटिव , एन्टेसिड , इन्जाइम्स आदि द्वारा लाक्षणिक चिकित्सा करें ।
अफारा में सेवन कराने योग्य अपटूडेट एलो . लेटेस्ट टेबलेट एवं कैप्सूल -
1. डिसीलोक्स एम.पी.एस. ( Disilox MPS ) ( नि . स्टेडमेड ) → 1 से 2 टेबलेट दिन में 3-4 बार ।
2. जेलूसिल एम.पी.एस. ( Gelussil MPS ) नि . ' वार्नर → 1-2 टे . भोजन के 15 मिनट बाद / अथवा जब लक्षण तेज हों । ( ' डिस्पेप्सियाजन्य अफारा में लाभकारी । )
3. लोगास्सिड ( Logascid ) नि . ' एस्ट्राआईडियल ' → 1-2 टे . भोजन के बीच चबायें एवं सोते समय ।
नोट- Flatulence Dyspepsia में ।
5. पोलीक्रोल फोर्ट ( Polycrol Forte ) नि . ' निकोलस → 1 टे . दिन में 3-4 बार भोजन के बाद चबायें ।
नोट- डिस्पेप्सियाजन्य अफारे में ।
6. प्रोपामिड - एम.पी.एस . ( Propamid --MPS ) नि . सी.एफ.एल. → 1 से 2 टे . हर भोजन के बाद चबायें ।
निषेध - ' आमाशय रक्तस्राव की स्थिति में निषेध ।
7. रेल्सर टेबलेट ( Relcer tabs . ) नि . ' ग्लीनमार्क ' → 1-2 टे . भोजन के बाद दिन में 3-4 बार चबायें ।
8. साइलोक्स - फोर्ट ( Silox - Forte ) नि . ' सलें → 1-2 टे . दिन में 3-4 बार चबायें ।
9. सिमेको ( Simeco ) नि . ' वीर्थ → 1-2 टेबलेट दिन में 3-4 बार ।
10. विस्को टेबलेट्स ( Visco tabs . ) नि . एरिस्टो → 1 से 2 गोली दिन में 2-3 बार
11. जाइमेट्स ( Zymets ) ( P.D. Co. )→ 1-2 टे . भोजन के बाद ( 1 घण्टे पश्चात ) एवं सोते समय चबायें ।
1. डायोवोल फोर्ट सस्पेन्शन ( Diovol Forte Susp . ) नि . ' वैलेसी → 1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के साथ अथवा आवश्यकतानुसार ।
2. डिसीलोक्स एम . पी . fferas ( Disilox MPS Liquid ) नि . ' स्टेडमेड → 1-2 चम्मच 1/2 -1 घन्टे भोजनो परान्त ।
3. लोगास्सिड लिक्विड ( Logascid liquid ) नि . एस्ट्रा आईडियल → 1-2 चम्मच भोजन के मध्य एवं सोते समय ।
4. पोलीक्रोल फोर्ट जैल ( Polycrol Forte Gel ) नि . ' निकोलस → 1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के बाद ।
6. साइलोक्स फोर्ट जैल ( Silox Forte Gel ) नि . ' सलें → 1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के बाद ।
7. साइलोक्सोजेन जैल ( Siloxogene Gel ) नि . ' सलें → 2 से 4 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के बाद ।
8. सिमेको ( Simeco ) नि . ' वीथ ' → 2 चम्मच दिन में 3-4 बार ।
9. Farent friferas ( Visco liquid ) नि . ' एरिस्टों → 1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार ।
निषेध - रीनल फेल्योर में प्रयोग न करें ।
10. जाईमेट्स लिक्विड ( Zymets liquid ) नि . ' पी.डी. ' → 1-2 चम्मच ( 5-10 ml ) भोजन के 1 घण्टे बाद अथवा जब लक्षण तेज हों ।
11. faciriş4 ( Vitazyme ) नि . ई . आई . → 1-2 चम्मच दिन में 2-3 बार।
12. कोलीमेक्स ( Colimex ) नि . ' वैलेसी → 1-2 मि.ली. दिन में 3 बार ।
• अफारा याआध्यमान में लगाने योग्य अपटूडेट एलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन -
1. प्रोस्टिग्मीन ( Prostigmin ) नि . ' रोशे ' 1 मि.ली. एम्पुल → 1 एम्पुल लगायें / तत्पश्चात इसी की गोली 2 बार दें ।
2. पिटोसिन ( Pitocin ) नि . पी . डी . → 0.5 मि.ली. मांस में लगायें । मिनटों में अफारा दूर होता है ।

3. पिटोसिन ( Pitocin ) एसेरीन ( Eserine ) नि . ' कलकत्ता केमिकल → 0.5 मि.ली. , 0.4 मि.ग्रा . दोनों को मिलाकर मांस में लगायें ।
नोट - इससे अफारा दूर होकर सभी अन्य रोग भी शान्त होते हैं ।
पिटोसिन की जगह पिट्यूटी अथवा पिटोसिन का उपयोग किया जा सकता है।
अनुभूत चिकित्सा व्यवस्था पत्र -
Rx.★ विस्को ( Visco ) - 1 टे . प्रातः सायं जल से ।अथवा -डिस्पेप्ताल ( Dispeptal )★ लोगास्सिड लिक्विड ( Logascid Liquid ) - 2 चम्मच भोजन के मध्य एवं सोते समय ।★ पोलीक्रोल फोर्ट ( Polycrol Forte ) या जाइमेट्स ( zymets ) - 1 टे . भोजन के 1 घण्टे बाद चबायें ।★ तारपीन तेल + हींग + गर्म पानी से पेट की सिकाई प्रति 4 घण्टे पर ।
नोट- एलीसेटीन ( सैण्डोज ) 1 टे . , यूनीइन्जाइम 1 टि . , सोडामिन्ट ( बूट्स ) 2 टे . , सीलिन- ( ग्लैक्सो ) 1 टे . । सबको पीस कर 1 पुड़िया बना लें । ऐसी 1 पुड़िया दिन में 3 बार दें । साथ ही ' यूनीस्पाज्मिन ( यूनीकेम ) 2 मि.ली. मांस में लगायें । अथवा पिटोसिन 1 मि . ली . मांस में लगावें । तत्काल आराम आ जावेगा।











































































