नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] - नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि? Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] 


नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?
नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] 


नाम

रक्तपित्त ऊर्ध्व , नक्सीर , नाक से खून बहना ( Nose Blood ) अथवा हीमोरेज फ्रोम दी नोज । सामान्य भाषा में नक्सीर फूटना कहते हैं । 

परिचय

इसमें नाक से एकाएक रक्त आने लगता है । वह एक या दोनों नथुनों से आता है । वैसे यह एक आपातकालीन स्थिति है ।


नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण  -  


1. स्थानिक कारण

- चोट लगने से , जैसे गिर पड़ने पर , नाक पर घूसा लगने से या नाक में ऑपरेशन की वजह से । नाक के अंदर ज्यादा उंगली डालकर 

- खुजलाने से । 

- नाक में अर्बुद ( गाँठ ) । 

- बच्चों में एडिनायड्स ( एक प्रकार का गले का रोग जिससे गले मे दर्द या सूजन हो जाता है ) की उपस्थिति में । 

- नाक में बाह्य पदार्थ की उपस्थिति । 

- पीनस रोग ( Atrophic Rhinitis ) ! नाक में कीड़े पड़ने से ।

2. अन्य रोगों की वजह से - 

- रक्तचाप की वृद्धि । 

- धमनियों का कड़ा होना । 

- गुर्दे का संक्रमण / अर्थात् नेफराइटिस । 

- बहुत सख्त गर्मी अथवा सर्दी । 

नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

- परनीसियस एनीमिया , परप्यूरा , हीमोफीलिया आदि रक्त की बीमारियों से । 

- छूत के बुखारों की प्रारम्भिक अवस्था में । 

- सर की चोट की वजह से और एण्टीरियर क्रेनियल फोसा के फ्रेक्चर में ।


नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण  -  

- नाक से रक्त आने के पूर्व सिर दर्द एवं चक्कर आने जैसे लक्षण प्रतीति / अथवा माथे में कष्ट की अनुभूति । तत्पश्चात् नाक से रक्त । 

- प्रायः एक ही नथुने से रक्त आता है / अथवा कभी - कभी दोनों नथुनों से भी आता है । 

- रक्त एकाएक आनाप्रारम्भ । 

नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

- रक्त लाल एवं चमकदार होता है । 

- रक्त कभी - कभी नाक के पिछले भाग से बहकर पेट में और फिर आँतों में चला जाता है अथवा पेट में पहुंचकर वमन( उल्टी ) द्वारा बाहर आता है । कभी कभी खाँसी के साथ मुह से रक्त आता है । 

- नासा रक्त श्रवण प्रायः नाक की चोट अथवा नाक के मलने से बढ़ जाता है ।

नोट- नाक से रक्तस्राव अतिरक्त दाब( high blood pressure ) में काफी देखा जाता है । कई बार यही उसका संकेत हो सकता है । 

- इंफ्लूएंजा , पुनरावर्तक ज्वरों( बार-बार आने वाले )  , स्कार ज्वर , चेचक और मलेरिया में , और अन्त में , सिर में रक्ताधिक्य( blood cloting, con gestive ) , कुक्कुर खाँसी से भी नासा रक्त स्त्राव हो सकता है ।


रोग की पहिचान  -  

रोगी के नाक के आन्तरिक भाग को हैड मिरर से प्रकाश डालकर देखें कि रक्त छत पर से ( इथमोइडल बेसिल्स ) आता है | अथवा परदे के निचले भाग से आ रहा है ।

रोग का परिणाम - 

रक्त के अधिक निकल जाने से मृत्यु तक सम्भव । । 

- रोगी की उचित व्यवस्था न होने पर उसे तत्काल अस्पताल भिजवा देना चाहिये ।


चिकित्सा विधि  -   

रोगी को आगे की ओर सिर झुकाकर बैठाना चाहिये ताकि रक्त गले में न चला जाय । 

- युवावस्था के रोगियों में नाक छिड़क कर नाक में जमी हुई रक्त की खुरंट निकाल देनी चाहिये । तत्पश्चात दोनों नासा रन्धों को अंगुली और अंगूठे के बीच पकड़ कर 10 मिनट तक दबाये रखना चाहिये । 

- अन्य चिकित्सा सामान्य रूप से कारणों के अनुसार होती है । 

- मरीज का सिरहाना ऊँचा कर दें । 

- नाक पर ठंडे पानी की पट्टी ।


सहायक , आनुषांगिक चिकित्सा   -  

नाक को अंदर से पूरी तरह साफ कर दें । तत्पश्चात् स्टेरेलाइज्ड गाज को उबाल कर वैसलीन से चिकना कर ठंडा होने पर नाक को पूरी तरह से पैक कर दें । इससे रक्तस्राव स्वयं बंद हो जावेगा । अथवा टि . फैरी में रुई का फाहा भिगोकर नथुने में रखते हैं । 

- अन्य सामान्य चिकित्सा के अन्तर्गत विटा . ' सी ' , ' के ' , कैल्शियम और ग्लूकोज से युक्त औषधियों का मुख से तथा इन्जे . के द्वारा प्रयोग करते हैं । 

- नासा - रक्तस्राव की प्राथमिक चिकित्सा में रोगी को शान्त वातावरण में , कालर और बेल्ट आदि खोलकर रख दिया जाता है । आकस्मिक गति और नाक छिड़कने पर रोक लगा दी जाती है । सरल केसों में रोगी को बिस्तर में सिर को ऊपर करके दो या तीन तकियों के सहारे बिठा देना और रक्तस्त्राव रोकने के लिये उसे नासाक्षेप को नासा पट( दवार ) पर दबाने के लिये कहना पर्याप्त है ।


नकसीर की औषधि चिकित्सा  -  

इसका उपचार 2 भागों में है - 

1.स्थानीय ( Local ) और 
2. सामान्य ( General ) । 

1.स्थानीय ( Local ) चिकित्सा   -  यह चिकित्सा सहायक चिकित्सा के अनुरूप है जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है । अथवा - 
 
- यदि खून ज्यादा और बराबर निकल रहा है और ब्लीडिंग प्वाइन्ट वांसे के सामने के भाग में ( Anterior part ) दिखायी दे रहा है तो मरीज को सीधा बैठाकर उसका सर थोड़ा सा आगे को झुकाकर दोनों नथुनों को कसकर 15 मिनट तक दबाये रखना चाहिये । ऐसा करने से ज्यादातर रोगियों में खून बंद हो जायेगा । ऐसे में मुँह खोलकर हमेशा देख लेना चाहिये कि कहीं ऐसा न हो कि खून गले के अंदर बहता रहे और मरीज उसे घुटता जा रहा हो । 

- यदि खून बहने का स्थान दिखायी न दे रहा हो और रक्त काफी बह रहा हो तो - नाक में दोनों तरफ ' फिंगर स्टाल [ अभाव में खाली गाँज की पट्टी पैराफिन से तर( भिगोकर) करके ] चिकने करके डालकर उसमें कसकर गॉज( या कपड़े का कोई साफ टुकड़ा ) भर देना चाहिये । ज्यादातर रोगियों का इस तरह खून बंद हो जाता है । पैकिंग 24 घण्टे बाद निकाल देना चाहिये । लेकिन यदि जरूरत हो तो इन्हें 48 घण्टे तक भी रखा जा सकता है । 

नोट   -  यदि इतने समय बाद पट्टी निकालने पर खून आये तो फिर से पैकिंग की जा सकती है ।

2. सामान्य ( General ) उपचार - एक दृष्टि में -

- मरीज का सिरहाना ऊँचा कर देना चाहिये । 

- नाक पर ठंडे पानी की पट्टी । 

- मार्फिया की सुई आयु के अनुसार । 

- इन्फेक्शन रोकने के लिये एण्टीबायोटिक्स । 

नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

- अधिक रक्त निकल जाने पर रक्त का चढ़ाना आवश्यक । 

- खून बन्द करने वाली दवाइयाँ जैसे – ' स्ट्रिप्टोक्रोम की सुई3-3 घण्टे बाद लगायें । 

- यदि रक्तचाप ( B.P. ) बढ़ा हुआ हो तो उसके लिये अलग से औषधि दें । 

याद रखिये - कभी - कभी थोड़ी मात्रा में नकसीर - ‘ इन्फेक्शन , एडीनाइड्स , फारेन बाज नाक के बांसे के टेढ़े होने से फूटती है । इसलिये ऐसे रोगियों में इन कारणों को दूर करना च और मरीज की जनरल दशा सुधारने के लिये ' आइरन ' , ' मल्टी विटामिन्स ' , ' कैल्शियम ' विटामिन - सी देनी चाहिये ।

जब 40 साल से ऊपर के मरीज में नाक से एक तरफ से बराबर रक्त आ रहा हो तो सदैव नाक के कैंसर को ध्यान में रखकर उचित जाँच करा लेनी चाहिये ।

नकसीर में उपयोगी व्यवस्थापत्र  - 


Rx  - 

- विश्राम ( Rest ) 

- गॉज से नथुनों का पैकिंग 

- इन्जे . केपिलिन ( Inj . Kapilin ) 10 मि . ग्रा . मांस में / तत्पश्चात् - ( Stryptobion ) 1-1 टेबलेट दिन में 3 बार जल से । 

नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

- इन्जे . मार्फीन ( Inj . Morphine ) अथवा ' पेथीडीन - 75-100 मि . ग्रा . मांस में । 

- कारण की चिकित्सा । 

- ब्लड प्रेशरचेक करायें । 

नोट - क्लाउडेन ( Clauden ) ' नियोफार्मा ' की 2-2 टेबलेट दिन में 3-4 बार देने से नासा रक्त स्त्राव में अच्छा लाभ मिलता है ।


अनुभव के मोती - एक झलक -  

कैल्शियम लैक्टेट 100 मि . ग्रा . , केपिलिन 1 टे . , क्लाउडेन 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार दें । ' टि . फैरी ' में भिगोया फाहा नथुने में रखें एवं स्ट्रेप्टोबियोन 2 - 4 मि . ली . मांस में लगावें । 

प्रिमैरिन ( ज्योफ्रे कैवर्स ) 20 मि . ग्रा . , डेक्स्ट्रोज 12 % -50 मि . ली . I / V दें । 

बोटोपाज ( Botropase ) जुंगरफार्मा - 1 मि . ली . की सुई मांस में या शिरा में प्रत्येक 6 से 12 घण्टे बाद लगायें । 

केपिलिन ( ग्लैक्सो ) 10 मि . ग्रा . की 1 टे . , सीलिन 500 मि . ग्रा . की 1/2 टे . , स्ट्रिप्टोविट ( डोल्फिन ) 1 टे . । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार जल से दें । 


नासा रक्तस्राव में सेवन कराने योग्य ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट  -  


नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

1 . स्ट्रिप्टोविट ( Styptovit ) डोल्फिन   -  1-2 टे . प्रति 6 घण्टे पर दूध या जल दें । 

2. कैडिस्पर - सी ( Cadisper - C ) कैडिला   -  1 टेबलेट दिन में 3 बार जल से दें ।

3. वेनसमिन ( Venusmin ) ' मार्टिन एण्ड हैरिस -   2-6 टेबलेट नित्य दें । 

गर्भावस्था के प्रथम छ: माह में नहीं । 

4 . स्टिप्टोबियॉन ( Stiptobion ) मर्क '  -  1-2 टेबलेट दिन में 3 बार ।

5 . एमिकार ( Amicar ) ' सायनेमिड   -  1-2 टेबलेट जल से आ . नु . दें ।

6 . सी . वी . पी . ( C.V.P. ) USVLP   -  चिकित्सक के परामर्शानुसार । 

7 . डेफलोन ( Daflon ) सीर्दया   -  2 टे . दिन में 2 बार दें ।

8 . डिसीनीन ( Dicynene ) डोल्फिन 250 - 500 मि.ग्रा . टेबलेट   -  500 मि . ग्रा . दिन में 2 बार / बच्चों को आधी मात्रा दें ।

9 . स्टिप्टोसिड ( Styptocid ) ' स्टेडमेड '  -  1-2 टे . दिन में 2 बार दें ।

10 सायोक्रोम ( Siochrome ) एल्वर्ट डेविड   -   1-2 टे . दिन में 3 बार ।


नासा रक्त रक्तस्राव में लगाने योग्य इन्जेक्शन -


नासा - रक्तस्राव / एपिस्टैक्सिस [ Epistaxis ] -  नाम, परिचय, नासा रक्त स्राव के प्रमुख कारण, नासा रक्त स्राव के प्रमुख लक्षण एव सबसे उपयुक्त चिकित्सा विधि?   Nasa - Bleeding / Epistaxis [Epistaxis] - Name, introduction, major causes of Nasa bleeding, major symptoms of Nasa bleeding and most appropriate medical method?

1 . सायोक्रोम ( Siochrome ) एल्वर्ट डेविड  -  2 मि . ली . प्रति 6 घण्टे पर दें ।

2 . स्ट्रिप्टोसिड ( Styptocid ) स्टेडमेड  -  2 मि . ली . प्रति 6 घंटे पर दें । 

3. प्रिमैरिन ( Premarin ) मैनर्स   -  20 मि . ग्रा . की मात्रा में धीरे - धीरे शिरा में लगावें / बच्चों को 5-10 मि . ग्रा . का इन्जे . मांस या नस में लगावें ।

4. बोट्रोपेज ( Botropase ) जुगत   -   1 मि . ली . का मांस में या शिरा में प्रति 6 से 12 घण्टे पर लगायें ।

5 . एमीकार ( सायनेमिड )   -  तीव्र रोग में 20 मि . ली . की सुई शिरा में धीरे - धीरे लगायें । 

6 . डिसीनीन ( Dicynene ) डोल्फिन '   -  1-2 मि . ली . मांस में / आ.नु .6 घण्टे बाद पुनः दें ।

7. यूनिपम्बा ( Unipamba ) यूनिकेम '  -    2-5 मि . ली . शिरा में धीरे - धीरे लगावें ।


Post a Comment

Previous Post Next Post