कंठशालूक / एडीनोइड्स [ Adenoids ] ~ नाम, परिचय, रोग के कारण, रोग के लक्षण एवं उपयुक्त चिकित्सा विधि ? Laryngitis / Adenoids [Adenoids] ~ Name, Introduction, Causes of Disease, Symptoms of Disease and Appropriate Medical Practice?

कंठशालूक / एडीनोइड्स [ Adenoids ] 

कंठशालूक / एडीनोइड्स [ Adenoids ] ~ नाम, परिचय, रोग के कारण, रोग के लक्षण एवं उपयुक्त चिकित्सा विधि ?  Laryngitis / Adenoids [Adenoids] ~ Name, Introduction, Causes of Disease, Symptoms of Disease and Appropriate Medical Practice?
कंठशालूक / एडीनोइड्स [ Adenoids ] 

नाम

एडीनाइटिस ( Adenitis ) । एडीनॉयड , ग्रसनी टॉन्सिल की अतिवृद्धि ( Hypertrophy of the Pharyngeal Tonsil ) 

परिचय

ग्रसनी के नाक के भाग का टॉन्सिल या लस धातु जब मोटा हो जाता है और लक्षण पैदा करता है तब उसको एडीनॉयड कहते हैं ।


रोग के कारण  - 

- आनुवंशिक कारण । 

- लड़का - लड़की में समान रूप से । 

- प्रायः 3 से 7 वर्ष की आयु में अधिक । कभी - कभी युवाओं में भी । 

- ठंडी जगह अथवा बदलते समय( मौसम ) में अधिक । 

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- तीव्र संक्रामक रोग ।  

- श्वसनतंत्र के ऊपरी भाग में तीव्र अर्ति( पीड़ा या कष्ट ) होना । 

- विस्फोटक ज्वर ( मिजिल्स , माता ) के बाद बच्चे को इस रोग के होने की अधिक आशंका ।


रोग के लक्षण -

-  बच्चा अन्य बच्चों से अलग रहता एवं अधिक शर्मीला हो जाता है । 

- शैया पर ही मूत्र त्याग एवं खराब सपने देखते हुआ चिल्लाना ।  

- बहरापन होने के कारण मानसिक क्रियायें शिथिल । 

- छाती चिपटी एवं सटे हुए दाँत अथवा एक दूसरे पर चढ़ जाते हैं । 

- नाक में रुकावट एवं सांस लेने में कष्ट । 

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- सांस लेते समय आवाज एवं नींद में कमी । 

- नाक से स्राव एवं मध्य कर्ण शोथ( कानो के बीच सूजन ) ।  

- बच्चा अनीमिक एवं दुर्बल ।  

- छाती कबूतर के समान ( Pigeon Chest )


चिकित्सा - साधारण लक्षण की स्थिति में ~

- गर्म पानी में 2 चम्मच टे . बेन्जोइन डालकर भाप सुंघायें । 

- एण्टीबायोटिक यथा( जैसे ) - ' एम्पीसिलीन एवं कीमो - थेरापिक औषधि दें । 

- नाक में रक्तवाहिनी सिकोड़ने वाली औषधि डालें । 

- स्वास्थ्यवर्धक औषधि की व्यवस्था । 

- प्राणायाम अथवा नियमपूर्वक श्वास अंदर खींचें और निकालें । 

- एलर्जीजन्य नासा शोथ ( नाक का सुजन ) एवं साइनस शोथ (  शिरानाल की सूजन ) की चिकित्सा करें ।


कण्ठशालूक में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट / कैप्सूल . ~


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1. आइसोनेक्स ( इसोकिन- Esokin ) फोर्ट( 300 मि.ग्रा.टे. )  -. 1 टे . प्रतिदिन 3 भागों में बांटकर दें ।  

2. कॉक्सीनेक्स ( Coxinex ) एरिस्टों. -  1 कैप्सूल नित्य दें । 

3. टिबीरिम आई . एन . एच . ( रैनवैक्सी )  -  1 टे . अतिदिन नास्ते के आधे घण्टा पूर्व । 

4. नाइड्राजिड ( Nidrazil ) स्क्विव   -  1-1 गोली दिन में 3 बार दें । 

5. निओ . पी . ए . सी . ( Neo.P.A.C )  -  1-4 गोली दिन में 4 बार दें ।


• कण्ठशालूक में लगाने योग्य ऐलो . इन्जेक्शन ~


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1. केनाकॉर्ट ( Kenacort ) साराभाई  -  तीव्र अवस्था में 0.1 से 0.3 मि . लि . का इण्ट्राडरमल इन्जे . लगायें ।

नोट - साधारण अवस्था में 8-32 मि . ग्रा . का प्रतिदिन की मात्रा को 4 बराबर भागों में बाँटकर दें । 

2. स्ट्रेप्टोनेक्स ( Streptonex ) फाईजर'0.75 से 1 ग्राम नित्य मांस में इन्जेक्शन लगावें  बच्चों को 20 मि . ग्रा . प्रति किलो शरीर भार के अनुसार मांस में प्रतिदिन इन्जेक्शन लगायें ।


लक्षण जीर्ण तथा अधिक कष्टदायक होने पर

ऐसी स्थिति में एडिनॉयड को काटकर निकाल दिया जाता है । यह क्रिया टॉसिल्स निकालते समय या अकेले भी की जा सकती है । जब एडिनॉयड तथा टॉसिल्स दोनों साथ निकालना पड़ता है तब एडिनॉयड को पहले निकाला जाता है । एडिनॉयड को नासा ग्रसनिका की पीछे की दीवार से क्यूरेटस के द्वारा निकाला जा सकता है । 

- एडिनॉयड निकालने के बाद भी यदि वह बार - बार बढ़ जाये तब डीप एक्स - रे अथवा रेडन - सीड ( Irradiation ) से चिकित्सा करें । 

याद रखिये - यदि बार - बार नेसोफारिन्क्स का शोथ होता रहता है और दवा करने पर भी नैसोफारिंजियल टाँसिल ठीक नहीं होते तो इनको ऑपरेशन करके निकाल देना चाहिये । 

ऑपरेशन से पहले रोगी के खून और पेशाब की परीक्षा कर लेनी चाहिये । जिससे कोई ऐसी जनरल बीमारी जैसे हीमोफीलिया , ल्यूकेमिया इत्यादि न हो , जो घातक हो ।
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ऑपरेशन के बाद

रोगी को 3-4 दिन तक आराम कराना चाहिये और एण्टीबायोटिक्स देना चाहिये । पहले दिन ठंडे पेय फिर दूसरे दिन दूध और मुलायम चीजें खाने को देनी चाहिये । एक हफ्ते के बाद पूरा भोजन दिया जाता है ।  

- ऑपरेशन के बाद ' राइनाइटिस और कान की खराबियों का लग कर इलाज करना चाहिये और स्वास्थ्य ठीक करने के लिये स्वास्थ्यवर्धक दवायें ( टॉनिक्स ) देना चाहिये । 

- ऑपरेशन के बाद कभी - कभी मध्य कर्ण शोथ हो जाता है इसकी चिकित्सा जैसी होती है वैसी करनी चाहिये । 

- गर्दन में दर्द हो सकता है इसके लिये ' एस्प्रिन दें । 

- कभी - कभी कोमल तालु का लकवा हो जाता है इसमें विटामिन बी . कम्पलेक्स की सुइयाँ लगा दें । 2-3 सप्ताह में रोगअपने आप ठीक हो जाता है ।

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