नपुंसकता / नामर्दी [ Impotency ]
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| नपुंसकता / नामर्दी [ Impotency ] |
नाम -
ध्वजभंग , इम्पोटेंसी ।
परिचय-
मैथुन कार्य में असमर्थता का होना नपुंसकता कहलाती है । कुछ चिकित्सकों की राय में नपुंसकता की परिभाषा इस प्रकार है ।
- शीघ्र स्खलन के कारण अथवा लैंगिक उत्थान( लिंग में तनाव ) के अभाव में पुरुष का स्त्री को संतुष्ट न कर पाना नपुंसकता कहलाती है ।
रोग के कारण -
- अनुचित विधियों से वीर्य नाश ।
- प्रमेह( एक प्रकार का बैक्टिरियल इंफेक्शन जिससे गुप्तांग में स्राव आने लगता है ) अथवा स्वप्नदोष ।
- वीर्य का छोटी आयु में ही अधिक खर्च करना ।
- शरीर के विभिन्न भाग जैसे नर्वस सिस्टम , हृदय , यकृत आदि में जब कोई रोग हो जाता है तो मनुष्य में कामवासना शक्ति घट जाती है ।
- कमजोर शरीर वाले मनुष्य या ऐसे व्यक्ति जिनको शक्तिवर्धक आहार नहीं मिलता।
- हस्तमैथुन एवं अधिक स्त्री प्रसंग( शाररिक संबंध बनाना ) ।
- अण्डकोष का छोटा होना या अंडकोष के रोग ।
- अफीम का अधिक सेवन ।
- बहुमूत्र एवं अग्निमांद्य रोग ।
रोग के लक्षण -
- मैथुन ( स्त्री सहवास - इरकोर्स ) करने की शक्ति का अभाव अथवा कम ।
- स्त्री प्रसंग की इच्छा बराबर बनी रहना पर मैथुन करने में पूर्णतया असमर्थ ।
- रोगी का स्त्री के पास जाने में भय ।
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- प्रसंग( सम्भोग ) करते ही श्वास का फूलना , शरीर से पसीने का आना एवं इन्द्रिय( लिंग ) का ठीक से उत्तेजित न होना आदि लक्षण ।
- रोगी का चिन्ता में रात - दिन ग्रस्त रहना ।
- नींद का न आना ।
- सिर में चक्कर , सिर दर्द , कलेजे का धड़कना एवं कब्ज ।
- चिकित्सा सम्बन्धी आधुनिक अनुसंधानों से पता चला है कि संसार में जितने पुरुष अपने को नपुंसक समझते हैं उनमें से 95 % वास्तव में नपुंसक नहीं होते । ये मानसिक नपुंसक होते हैं , उनकी कोई मानसिक समस्या होती है जो उन्हें नपुंसक बनाये रहती है । शेष 5 % शारीरिक रोग के कारण वास्तव में नपुंसक होते हैं ।
याद रखिये -
कुछ पुरुषों के वृषणों में पुरुष हारमोन का उत्पादन किसी कारण से बन्द हो जाता है , ऐसे पुरुषों का शिश्न छोटा रह जाता है और उनकी शारीरिक रचना मर्दो जैसी ठोस नहीं बन पाती । ये रोगी नपुंसक बन जाते हैं ।
चिकित्सा विधि -
- प्रथम कारण की चिकित्सा ।
- आश्वासन कि तुम्हें कोई रोग नहीं एक अच्छे खासे मर्द हो ।
- माया , मनोहर कहानियाँ , रोमान्टिक फिल्में , प्रेमालाप सम्बन्धी साहित्य पढ़ा करें , इससे कामवासना बढ़ेगी और नसों में जाग्रति आवेगी ।
- मृदु विरेचन( एक प्रक्रिया जिससे मल सुगमता एव आसानी से होता है ) आदि देकर शरीर की शुद्धि आवश्यक । एनीमा उत्तम है । पहले प्रमेह और स्वप्न दोष की | चिकित्सा करें , तत्पश्चात नपुंसकता की ।
- पाचन क्रिया को सबल बनावें । तत्पश्चात् वीर्य - विकारनाशक एवं धातु पौष्टिक औषधियाँ दें , साथ ही लिंग पर कोई लेप अथवा तिला आदि अवश्य लगवाये ।
पथ्य व्यवस्था -
पथ्य - दूध , मक्खन , मलाई , घी , मुर्गी के अण्डों की जर्दी , मछली , तीतर , भिण्डी , मूली , प्याज , साबूदाना , अदरक , चुकंदर , लौकी , परवल , बथुआ , बादाम , छुआरा , चिरौंजी , नारियल , तिल , किशमिश , मुनक्का , अंगूर , आम , अनार , गाजर , ताल मखना , पशुओं के अंडकोष - ये सभी नपुंसकता में उपयोगी पथ्य हैं ।

अपथ्य - तम्बाकू , वायुकारक( गैस बनाने वाली ) भारी पदार्थ , मूंग और मसूर की दाल , बैंगन , लाल मिर्च , खटाई , गुड़ , वनस्पति घी , एवं इससे बनी चीजें एवं तली हुई चीजें ये सभी अनुपयोगी एवं हानिकारक हैं ।

नोट - इसकी चिकित्सा निम्न उद्देश्यों को बनाकर करनी चाहिये -
- औषधियों द्वारा उपचार , यांत्रिक उपचार , प्राकृतिक चिकित्सा , जिसमें भोजन में सुधार और व्यायाम सम्मलित हैं एवं हारमोनों द्वारा उपचार ।
1. नपुंसकता की औषधि चिकित्सा -
- 95 % रोगियों में नपुंसकता मनोवैज्ञानिक कारणों से होती है । अतः उसे आश्वासन दें कि यह एक मामूली रोग है और उपचार से सभी ठीक हो जाते हैं , विश्वास ही सबसे बड़ी औषधि है ।
- इन रोगियों को कोई टोनिक , सीरप , मल्टीविटामिन्स टेबलेट , आयरन युक्त टॉनिक , कुचला , फास्फोरस अथवा संखिया युक्त टॉनिक पिल्स दिये जा सकते हैं , जिससे वह अपने को चुस्त एवं स्वस्थ महसूस करने लगते हैं ।
- कुछ रोगियों को कुछ दिनों तक परिश्रम करने , संभोग से बचने और पौष्टिक भोजन करने की सलाह दी जानी चाहिये । इस हेतु तंत्रिका तंत्र की शक्ति बढ़ाने वाला कोई टोनिक दिया जा सकता है । इसके लिये फासफोमिन टॉनिक अधिक उपयुक्त रहता है । अथवा निम्न योग दे सकते हैं :

2 . पोटाश ब्रोमाइड 600 मि . ग्रा . , टिंक्चर नक्सबेोमिका 0.3 मि . ली . , कैल्शियम ग्लीसरो फास्फेट 300 मि . ग्रा . , स्प्रिट क्लोरोफार्म 0.6 मि . ली . , जल कुल 30 मि . ली .। यह एक खुराक है । ऐसी 1 खुराक दिन में 3 बार दें ।
यह योग घबराहट , नींद न आना , नपुंसकता आदि में लाभकारी है ।
याद रखिये - जिन योगों में विटामिन्स , लिवर एक्स्ट्रेक्ट , माल्ट एक्स्ट्रेक्ट तथा शरीर को पुष्ट करने वाली तमाम औषधियाँ सम्मिलित होती हैं वह सब इस रोग में दी जा सकती हैं ।
2.यांत्रिक उपचार -
नपुंसक पुरुषों की सहायता के लिये समय - समय पर अनेक प्रकार के उपकरणों का उपयोग किया गया , पर कोई भी अधिक लोकप्रिय न हो सका । इनमें ' आर्गन डेवलेपर या वैक्यूम मसाज पम्प का उपयोग कुछ लाभकारी सिद्ध हुआ है ।
- एक सरल उपाय - जिन नपुंसक व्यक्तियों का लिंग ठीक रूप से उत्थान ( Errect and tight ) को प्राप्त नहीं होता है । यदि होता भी है तो एक थोड़े समय के लिये । साथ ही योनि में जाते ही ढीला पड़ जाता है और अंदर प्रविष्ट नहीं होता है, ऐसे में बड़ी शर्मिंदगी मालूम पड़ती है । ऐसे में लिंग की जड़ में एक रिबन बाँध लेने से लिंग में बराबर उत्थान बना रहता है । यहाँ तक कि स्खलित हो जाने के पश्चात् भी उत्थान में कमी नहीं आती है । इस प्रकार से सम्भोग में पूर्ण आनन्द प्राप्त होता है ।
याद रहे - रिबन न अधिक कड़ा न अधिक ढीला बाँधा जाये ।
- रिबन में केवल डेढ़ गांठ ही लगानी चाहिये ताकि आसानी से खोला जा सके।
- रिबन को तभी लपेटा जाये जब लिंग में उत्थान आ जाये ।
नोट - यह एक उपयुक्त और सरल यांत्रिकी विधि है ।
3. नपुंसकता की प्राकृतिक चिकित्सा -
- इस चिकित्सा में ' हिप बाथ ' , ' सिटज बाथ , गर्म के बाद ठंडे पानी से स्नान उपयोगी व्यवस्थायें हैं । इससे शरीर में ताजगी और स्फूर्ति आती है और मनुष्य अपने को मानसिक रूप से स्वस्थ अनुभव करने लगता है ।
- नपुंसकता में पौष्टिक भोजन विशेष महत्व रखता है । पौष्टिक भोजन लेने से रोगी की यौन सक्रियता बढ़ती है । जंघाओं की पेशियों के व्यायाम कराये जायें । इससे यौन सामर्थ्य बढ़ती है ।
4. नपुंसकता की हार्मोन चिकित्सा - नपुंसकता में -
हारमोन उपचार का एक महत्वपूर्ण स्थान है । इसमें टेस्टोस्टेरोन ' ( Testosteron ) नामक हार्मोन्स का उपयोग किया जाता है । इन्जेक्शन द्वारा देने से किशोरों में नपुंसकतां दूर होती है साथ ही लिंग की लम्बाई भी बढ़ जाती है एवं अन्य पुरुषोचित लक्षणों( जैसे- दाढ़ी, छाती के बाल इत्यादि ) का विकास तथा शारीरिक बढ़वार तेजी से होने लगती है । शक्ति एवं स्फूर्ति बढ़ती है । ये हार्मोन्स अधेड़ आयु के पुरुषों में उत्पन्न होने वाली नपुंसकता में भी बहुत प्रभावशाली है ।
- आजकल टेस्टोस्टीरोन का एक नया योग ' टेस्टोस्टीरोन ईनन्थेट नामक आने लगा है । इसका मांसपेशी इन्जेक्शन 250 मि . ग्रा . की मात्रा में प्रत्येक दूसरे या तीसरे सप्ताह में लगाया जाता है ।
मुख द्वारा सेवन कराने के लिये अल्ट्रेन्डन ( Ultrandon ) नामक योग आता है । इसकी 1 मि . ग्रा . की टेबलेट आती है और एक बार में 1-5 टेबलेट प्रतिदिन सेवन कराई जा सकती हैं ।
• नपुंसकता के रोगियों को पहले - पहल एक महीने तक टेस्टोस्टीरोन सेवन कराया जाता है । सप्ताह में तीन या चार दिन एक - एक इन्जे . पेशी में 10 से 25 मि . ग्रा . तक दिया जाता है । 6 महीने तक उपचार चलाया जा सकता है ।
- आजकल ' फ्लुआक्सीमेस्ट्रोन ' का उपयोग मुख द्वारा सबसे अधिक होता है ।
नोट - हारमोन के इन्जे . अथवा टेबलेट का सेवन सुबह को नाश्ता कर लेने के बाद ही करना चाहिये ।
नपुंसकता में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट कै . / टेबलेट -
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1. पेरेण्डूिन लिंगुएट्स ( Perandren linguets ) ( हिन्दुस्तान सिवागैगी ) 5 और 25 मि.ग्रा . टेबलेट - टे . नित्य जीभ के नीचे रखकर धीरे - धीरे घुलने दिया जाये ।
2. ओकासा ( Okasa ) - 2-2 टे . × दिन में 3 बार ।
3. गेरॉबियॉन ( Gerobion ) मर्क कं . - 1-3 टे . प्रतिदिन दें ।
4. हाइपोगोनैडल न्यो . हाम्बीयोल - एम ( इन्फार ) - 10-25 मि . ग्रा . की 1 टे . प्रतिदिन जीभ के नीचे ।
5. टेस्टोविरोन ( Testoviron ) ' जर्मन रेमेडीज - 1-2 टेबलेट दिन में 2 बार दें।
6. एक्वाविरोन बी 12 ( Aquaviron B12 ) ( नि . निकोलस ) 5 , 10 और 25 मि . ग्रा . की टेबलेट - 1 टि . दिन में 2-3 बार दें । इसकी छोटी और बड़ी 1-1 टि . कोई एक ली जा सकती है ।
7. टेस्टोफोस ( Testophos ) ( मैक ) - 1-2 ड्रेगी दिन में 2 बार आराम आने तक ।
8. सेन्सा ( Sensa ) विल्कोफार्मी - 2-2 टे . दिन में 2 बार 20 से 25 दिनों तक ।
9. एण्डरेस्ट ( Andrest ) ( जौहन झ्य ) - 1-1 टे . दिन में 2 बार जीभ के नीचे चुसवायें ।
10. सैक्सटोन ( Sextone ) जुपीटर फार्म - 1-3 टेबलेट दिन में 3 बार दें ।
11. जेरियाटोन ( जोहन वाइथ ) - 1-1 टेबलेट दिन में 2 बार ।
12. जेरियाट्रिक ( Geriatric ) इण्डोन - 1-1 टे . दिन में 3 बार भोजन के बाद एवं रात सोते समय ।
13. रेल्डरटोन ( Raldertone ) T.C.F. - 1-2 ड्रेगी हर खाने के बाद दिन में 3-4 बार ।
14. वी . एण्ड्रो ( Vi - Andro ) यू . एस . विटा . मिन्स - 1-1 कै . दिन में 3 बार खाना खाने के बाद दें ।
15. न्यूरीसोन - एच ( Neurison - H ) ' कैडिला - 1-1 कै . दिन में 2 बार हर खाने के बाद दें ।
टेस्टोविऑन ( मर्क ) 1 एम्पुल ( 3 मि . ली . ) की सुई मांस में सप्ताह में 2 बार लगावें । साथ ही एडीनॉल ( Edinol ) ( बेयर ) ला 1 कै . तथा जेरिएटोन ( वाइथ ) 1 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा नित्य सेवन करावें ।
• नपुंसकता में सेवन कराने योग्य अपटूडेट पेटेन्ट ऐलो . सीरप . -
2. ब्रोमीकाल ठ ( यूनीकेम ) - 2-2 चम्मच दिन में 2-3 बार दें ।
3. लेसिविन ( बंगाल केमिकल्स ) - 1-2 चम्मच दिन में 3 बार खाने के बाद दें ।
4. सोलोविटिन ( Solovitin ) ( विटामिन लेबोरेटरी ) - 2-3 चम्मच खाना खाने के बाद दिन में 2 या 3 बार दें ।
टेस्टोविरोन डिपो 50 मि . ग्रा . प्रति सप्ताह अथवा 100 से 250 मि . ग्रा . हर महीने मांस में लगावें।रोग की बढ़ी हुई अवस्था में 250 मि . ग्रा . प्रति सप्ताह 1 माह तक दें ।
नपुंसकता में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन . -
2. ट्रायोलैण्डूिन ( Triolandren ) सीबा कं . कंः ) - 150 एम . जी . की 1 मि . ली . मांस में लगावें ।
3. टेस्टोवीरोन ( शेरिंग कं ) ( Testoviron ) - वृद्धावस्था की नपुंसकता में 1 मि . ली . मांस में 1 दिन छोड़कर कुल 12 इन्जेक्शन लगावें ।
4. पेरेण्डूिन ( Parandren ) हिन्दुस्तान सिवा गैगी - 10 से 25 मि . ग्रा . का इन्जेक्शन मांस या त्वचा में लगावें ।
5. सुस्टानन 100 ( Sustanan - 100 ) ( इन्फार ) - 1 मि . ली . प्रतिदिन मांस में 2-3 सप्ताह तक लगावें ।
नोट- शीघ्र लाभ के लिये ' सुस्टानन प्रति 2 या 3 सप्ताह बाद इन्जेक्शन लगावें ।
सावधान - पुरुषों के छाती या पुरःस्थ के कैंसर में अथवा आशंका वाले रोगी में इसका प्रयोग न करें ।
6. टैस्टानन -25 ( Testanon - 25 ) ( इन्फार ) - 1 मि . ली . की सुई मांस में प्रति 2 या 3 सप्ताह बाद लगावें । विशेष लाभ के लिये टेस्टानन -50 का ।
7. टेस्टोबिऑन ( Testobion ) मर्क - 1 एम्पुल ( 3 मि . ली . ) की सुई मांस में सप्ताह में 2 बार लगावें ।
8. सैक्स - विगर ( Sex - Vigor ) हेक्सले - 1 मि . ली . का इन्जे . मांस में हर तीसरे दिन लगावें ।
9. टेस्टोस्टेरोन प्रोपियोनेट ( बूट्स ) - 1-2 मि . ली . मांस में लगावें ।
10. टेस्टोविरोन डिपॉट ( Testoviron depot . ) ( जर्मन मेडीज ) - 1 मि . ली . मांस में ।
• नपुंसकता में लिंग पर लगाने की पेटेन्ट औषधियाँ -
1. पेराण्ड्रेन मरहम ( Parandren Oint ) ( सीबा कं . ) - इसको लिंग पर लगाने से तत्काल उत्तेजना होती है ।
2. हिमकोलीन ( Himcolin हिमालय ) - लिंग पर रात को सोते समय लगावें।
लिंग को मोटा बनाने के लिये - सेंधा नमक , शहद दोनो को बराबर मात्रा में मिलाकर , पानी में पीसकर लिंग पर लेप करने से वह मोटा हो जाता है ।
• नपुंसकता नाशक मेडिकल प्रेस्क्रिप्शन . -
Rx -
- कारण की चिकित्सा एवं आश्वासन ।
- एनीमा अथवा मृदु विरेचक ।
- निओगाडीन इलिक्जिर - 2-2 चममच दिन में 3 बार ।
- टेस्टोविरोन 1-1 टेबलेट दिन में 2 या 3 बार दें ।
- टेस्टोविऑन ( मर्क ) 3 मि . ली . मांस में , सप्ताह में 2 बार ।
- एडीनॉल ( बेयर ) 1 कै . , जेरिएटोन 1 टे . 1 मात्रा रात सोते समय ।
- ' पराण्ड्रेन ' मरहम या हिमकोलोन लिंग पर रात को सोते समय लगावें ।
• नपुंसकता की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा -
1. नाड़ी दुर्बलता के कारण नपुंसकता - ' प्रिस्कोफेन ( सीवा कं ) की 1-1 टेबलेट नित्य दें ।
2. हस्तमैथुन के कारण नपुंसकता - टेस्टोफॉस ( सीगफ्रेड ) की 1-1 टे . दिन में 2-3 बार दें ।
3. बुढ़ापे के कारण नामर्दी - एक्वाविरोन ( शेरिंग कं ) 25 मि . ग्रा . की सुई , हफ्ते में 2 बार , मांस में 6-8 सप्ताह तक लगावें ।
4. प्रौढ़ों में नपुंसकता का रोग - रोवीगॉन ( रोशे कं . ) 1-1 टेबलेट दिन में 2-3 बार चूसने को काफी समय तक दें ।
नोट - चिकित्सकों का दावा है कि इससे रोग जड़ से समाप्त हो जाता है ।
5. मोटापा के कारण रोग - ' थाइराईड ' 1/4 ग्रेन वाली 1 टे . एवं रोवीगॉन की 1 टे .। ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार दें ।
6. शारीरिक दुर्बलता , शीघ्रपतन , एवं धातु क्षीणता से उत्पन्न नपुंसकता - पेरेन्ड्रान 10 मि . ग्रा . की 1 टे . , ओब्ली टोन - सी की 1 टे . , योहिम्वीन 1 टेबलेट ,
7. भम , मानसिक वहम , चिन्ता आदि से नपुसकता - 1 विटामिन बी कम्पलेक्स फोर्ट टेबलेट लें । सबको पीसकर 1 पुड़िया बना लें। ऐसी 1.पुड़िया दिन में 2 बार दें । ओव्लीवोल की 2-2 टेबलेट दिन में 2 बार दें । अथवा कोई नवीइनटॉनिक दें।
![नपुंसकता / नामर्दी [ Impotency ] नपुंसकता / नामर्दी [ Impotency ]](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiP819t4sKhXS81yAyjJaWhQMj_JecCNlVQjZEHr1h7XYx2LbazGqjE9qlkp6kYx6CyDliysJK7wu3KKco6slDSLnFcLMgr4IzIfCMVVvrlaIZmLzr5osXABxeN7ZYqR87a__DlRT8PQIQr/w601-h625/frustrated-sad-stress-depressed-man-preview.jpg)

