शीघ्र पतन / शीघ्र स्खलन [ Rapid Ejaculation ] - परिचय, कारण, लक्षण एवं कारगर चिकित्सा विधि क्या है? Rapid collapse / early ejaculation [Rapid Ejaculation] - Introduction, Causes, Symptoms and Effective Treatment

शीघ्र पतन / शीघ्र स्खलन [ Rapid Ejaculation ] 


शीघ्र पतन / शीघ्र स्खलन [ Rapid Ejaculation ] 


परिचय

योनि में शिश्न प्रवेश करने के कुछ ही क्षणों में वीर्य स्खलित हो जाय तो इसे ' शीघ्र पतन ' या ' शीघ्रस्खलन ' कहते हैं ।

रोग के प्रधान कारण  - 

- पुष्टिकारक एवं पर्याप्त भोजन का न मिलना । . 

- अर्जीण रोग । 

- हस्त मैथुन एवं अति स्त्रीप्रसंग । 

- प्रारम्भिक सम्भोग में अनुभव की कमी एवं मानसिक तनाव ।  

- अत्यधिक कामोत्तेजना ।  

- अत्यधिक दिनों के बाद रुके होने के बाद सम्भोग करना । 

- आत्मविश्वास की कमी । 


- अपरिचित वातावरण और एक अपरीचित स्त्री ( जैसे कि वेश्या के कोठे पर ) पुरुष भय और घबराहट के कारण । 

- प्रमेह( गुप्तांग से होने वाला स्राव ) , स्वप्नदोष की अधिकता ।

 - वीर्य का पतलापन । 

- वीर्य की अधिकता । 

- सुजाक का रोग ।


रोग लक्षण

- सम्भोग काल बहुत ही कम । 

- सम्भोग से पूर्व ही वीर्य का स्खलन । 

- आगे चलकर केवल आलिंगन( स्पर्श ) मात्र से ही वीर्य का निकल जाना । 


- अन्त में केवल स्त्री प्रसंग ध्यान मात्र से ही वीर्य स्खलित(वीर्य का बाहर निकलना ) हो जाता है । 

- रोग चलते रहने के बाद नपुंसकता । 

याद रखिये - शीघ्र पतन बहुत गम्भीर किस्म का यौन विकार है और यह नपुंसकता का पूर्व होता है । 

शीघ्रपतन 2 प्रकार का  - 1. विकृत जन्य शीघ्रपतन । 2. जन्मजात शीघ्रपतन । 

यह कोई रोग नहीं है एक प्राकृतिक बात है।


चिकित्सा विधि  -  

चिकित्सा से पूर्व रोगी का इतिहास मालूम करें और उसकी मैथुनिक प्रवृत्तियाँ मालूम की जायें और उसे विश्वास दिला दिया जाये कि अगली बार मैथुन( शाररिक संबंध बनाने कि क्रिया ) में वह अवश्य सफल रहेगा । 

- ब्रह्मचर्य पालन का सुझाव दिया जाये । 

- शामक( उत्तेजना शांत करने वाली ) ( Sadative ) औषधियों का प्रयोग ।

- जो कई बार सम्भोग में असफल रह चुके हैं उनके मस्तिष्क को चिन्तामुक्त करने के लिये चिकित्सकगण निःसंकोच संध्या के समय एक - दो पैग मदिरा के लेने की सलाह दे सकते हैं । 


पथ्यापथ्य एवं सहायक चिकित्सा -  


पथ्य -  गेहूँ , जौ , उड़द , छिले आलू , घुइयाँ ,   अपथ्य गोभी , भिण्डी , शकरकंद , केला , 

अपथ्य - नया अन्न , तेल की चीजें , खट्टे पदार्थ , पेशाब लाने वाली चीजें नहीं देनी चाहये । 

नोट - प्राणायाम और शीर्षासन इसमें रामबाण का काम करते हैं । 


निषेध - अधिक श्रम , मैथुन( सेक्सुअल एक्टिविटी ) , अधिक चिन्ता , दिन में सोना , तेज सर्दी - गर्मी में निवास , सड़ा - गला , बासी भोजन आदि से बचना चाहिये ।


शीघ्रपतन की औषधि चिकित्सा -  

पोटाशियम ब्रोमाइड इसकी एक उपयुक्त औषधि है । इसे 600 मि . ग्रा . की 1-1 खुराक में दिन में 3 बार ताजे जल से देना चाहिये । यह चिकित्साक्रम एक महीने तक चलाना पर्याप्त होता है । 

- सम्भोग से पहले 1.3 ग्राम पोटाशियम ब्रोमाइड ताजा जल के साथ लेना अधिक उपयुक्त रहता है। 

- आजकल ' ट्रान्क्विलाइजर ' औषधियाँ इस कार्य के लिये अधिक उपयुक्त मानी जा रही है । इनमें ' कम्पोज ' , ' वेलियम ' , और ' लिबरियम ' प्रमुख हैं । 

प्रारम्भ में रोगी को इनमें से किसी भी औषधि की 1/2 टेबलेट सुबह और आधी संध्या के समय सोने से 10-15 मिनट पहले खिला देना चाहये । 

- औषधि का सेवन करके 1-1 1/2 घण्टे बाद सम्भोग करना चाहिये । 

- यदि 1 सप्ताह सेवन कराने से वांछित लाभ न हो तो रोगी को पूरी 1 टेबलेट सोते समय खाने को देना चाहये ।। 

- जब लाभ हो जाये तब रोगी को केवल सम्भोग की रात ही औषधि सेवन करनी चाहिये । 

- लम्बे समय तक औषधि सेवन की सिफारिश न की जाये क्योंकि रोगी इनका अभ्यस्त( आदत ) हो सकता है ।


ज्ञातव्य - कुछ रोगियों का शिश्न मुण्ड( लिंग का आगे हिस्सा ) अत्यन्त संवेदनशील होने के कारण वे शीघ्रपतन के शिकार बने रहते हैं । ऐसी स्थिति में शिश्न मुण्ड की संवेदनशीलता कम करने के लिये ' बेन्जोकेन आइन्टमेण्ट का प्रयोग किया जाता है । इस मलहम को सम्भोग से आधा घण्टे पहले शिश्न मुण्ड पर तथा इससे तनिक ऊपर तक मल लेना चाहिये । 80 % तक लाभ मिलता है । 

शीघ्रपतन के रोगियों को सलाह- रात्रि में पहली बार स्खलित होने के दो घण्टे बाद पुनः सम्भोग कर लें । दूसरी बार के सम्भोग में वे निश्चित रूप से देर से स्खलित होंगे । साथ ही दो बार के सम्भोग से कोई हानि भी नहीं । 

शीघ्रपतन में सेवन कराने योग्य पेटेन्ट टेबलेट / कै .




1. लार्गेक्टिल ( Largactil ) नि . रोन पुलेंक 25 मि . ग्रा .  -  1-2 टेबलेट × रात सोने से 1 घण्टा पहले दें ।

2. जेरोबियान ( Gerobion ) मर्क  -   1 टेबलेट खाकर ऊपर से ' हेमिफॉस सीरप ( ज्योफर मेनर्स ) 2 से 3 चम्मच भोजन के पहले दें ।

3. स्पीमेन फोर्ट ( Speman forte ) ( हिमालय ) -   2 टेबलेट दिन में 2-3 बार ।

4. गार्डीनल ( Gardinal ) रोन - पुलेन्क  - 60 मि . ग्रा . की 1 टे . सोने से 1/2 घण्टे पूर्व दें ।

5. लिवरियम 10 मि.ग्रा . टि .  -  1-1 टे . प्रा . शा . एवं रात सोते समय । 

6. कम्पोज ( Calamposie ) 5 मि . ग्रा .  -   1 टेबलेट × रात सोते समय दें ।

7. वेलियम  -    1 / 2   -  1 / 2 टे . प्रातः एवं रात सोते समय। लाभ न मिलने पर 1-1 टे . दिन में 3 बार दें ।

8. पावर पिल्स ( Power Pills ) गैम्वर्स लैबो .  -  2 गोली मीठे दूध के साथ मैथुन से 2 घण्टे पूर्व दें ।

9. एण्डरेस्ट ( Andrest ) जोहन वाइथ  -  25 मि . ग्रा . की 1 टे . - दिन में 2-3 बार -  मलाई से ।

10. पेरेण्डूिन लिंग्वेट्स ( हिन्दुस्तान सिवा . गैगी मुख में रखकर 2-3 बार दिन में चूसें । )  -  

 
  

शीघ्रपतन में लगाने योग्य ऐलो . पेटेन्ट बाह्य औषधि


1. पेरेण्डूिन आपयन्टमेंट ( Perandren Oint ) ( हिन्दुस्तान सिवा गैगी )  -  रात को 5 - 10 मिनट तक ' लिंग पर मालिश करें । 

2. एनीथेन आयण्टमेण्ट ( Anethaine Oint ) ( ग्लिण्डिया )  -  सम्भोग से 15-20 मिनट पूर्व शिश्न पर लेप करने से शीघ्रपतन नहीं होता है । 

3. न्यूपर केनाल मलहम ( Neuper Cainal Oint ) ( हि . सिवा . गैगी )  -  सम्भोग से पूर्व पुरूष इन्द्री( लिंग ) की सुपारी पर मल देने से शीघ्रपतन नहीं होता है ।


- लंदन की सुप्रसिद्ध लेडी डाक्टर मेरी स्टोप्स का अभूतपूर्व नुस्खा  - 

टैनिक एसिड 1 भाग , ऐल्कोहॉल ( 90 % ) 10 भाग में मिला लें । इस दवा को सुपारी पर 4-5 मिनट तक लगा रहने दिया जाये , तत्पश्चात् रेक्टीफाइड स्प्रिट से साफ करके उसके ऊपर केओलीन 3 भाग , बोरिक एसिड 1 भाग मिलाकर मामूली मात्रा में छिड़कें । 


शीघ्रपतन की मिश्रित औषधि चिकित्सा  -  


1. गार्डिनल 1/2 टेबलेट , न्यूरोवियोन फोर्ट 1 टेबलेट , एण्ड्रेस्ट 25 मि . ग्रा . की 1 टेबलेट , ई - टॉपलैक्स 100 यूनिट का 1 कै . , मोहिम्बीन हाइड्रोक्लोराइड 1 टे .। इन सबको मिलाकर पीस लें । ऐसी 1 मात्रा प्रातः और रात सोते समय गर्म दूध से 2-3 सप्ताह तक दें । शीघ्र पतन में शीघ्र और शर्तिया लाभ होता है । 

2. टैस्टोफॉस ( मर्क ) 1 टेबलेट , ओकासा 1 टे . , मल्टी - विटाप्लेक्स फोर्ट 1 कै . , न्यूरोवियोन फोर्ट 1 टे .। ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार दें । साथ ही सम्भोग के समय लिंग की सुपारी पर बेन्जोकेन अथवा एनीथेन मलहम की मालिश करें ।

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