अत्यार्तव मैनोरेजिया- Menorrhagia ] रोग के कारण , परिचय, लक्षण व कारगर चिकित्सा विधि क्या है? Menorrhagia-menorrhagia] What are the causes, introduction, symptoms and effective treatment of the disease?

अत्यार्तव मैनोरेजिया- Menorrhagia ] 

अत्यार्तव मैनोरेजिया- Menorrhagia ]


नाम - अति रजोस्राव , अति आर्तव , रक्त प्रदर ( Metrorrhagia ) , मासिक स्राव का अत्यधिक प्रवाह । 

परिचय- इस विकृति में मासिक चक्र की अवधि सामान्य होती है पर मासिक स्राव अधिक दिनों तक चलता है और उसकी मात्रा सामान्य से कहीं अधिक होती है ।

रोग के कारण - सार्वदैहिक व्याधियाँ । 

- स्थानीय विकृतियाँ - जैसे - गर्भाशय पेशी अर्बुद( गाँठ ) , डिम्बवाहिनी ग्रन्थ शोथ( सूजन ) , अन्तगर्भाशय कला शोथ , दीर्घ गर्भाशय पेशीशोथ। 

- अन्तःस्रावी विकृतियाँ - जैसे - मिक्सीडीमा , अबदु अतिक्रियता ( Hyperthyroidism ) के प्रारम्भिक दिन , अबटु अल्पक्रियता । 

- गर्भ निरोधक साधक - जैसे - लूप , कापरटी रखने के परिणाम स्वरूप किसी - किसी महिला को । एवं किसी किसी को गर्भ निरोधक गोलियों से ।

..........

रोग के लक्षण - मासिक स्राव अधिक मात्रा में ।  

- कभी - कभी निश्चित समय से पूर्व । 

- कभी - कभी माह में 2-3 बार मासिक स्त्राव । 

- कभी - कभी एक ही बार इतनी अधिक मात्रा में रक्त आता है कि स्त्री के प्राण रक्त की कमी से खतरे में पड़ जाते हैं । 

.........

- रक्त निकल जाने से -->>  शारीरिक दुर्बलता , . रक्ता ल्पता , . शक्ति का ह्रास , . सिर चकराना , . कमर एवं पेडू में दर्द , .भूख न लगना आदि लक्षण ।
नोट - इसके सामान्य कारण फिजियोलोजिकल विकार , मानसिक , गम्भीर अनीमिया , गम्भीर रक्त विकार आदि हैं । 
अत्यार्तव की चिकित्सा

- मूल कारण को दूर करें । 

- प्रोजेस्टोजेन ( Progestogen ) जैसे - नोरइथीस्टेरोन ( Norethisterone ) 5 मि . ग्रा . दिन में 3 बार मुख द्वारा 10 दिन तक ।  

- हीमोस्टेटिक - जैसे - इथम्सिलेट ( Ethamsylate ) 500 मि . ग्रा . प्रति 4-6 घण्टे पर मुख द्वारा । 

..........

- स्त्री को हिलने - डुलने न दें । चारपाई का पायताना काफी ऊँचा रहे । 


अत्यार्तव में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट टैबलेट / कैप्सूल -

1. फरलुटाल ( Farlutal ) वाल्टर बुशनेल  -  रोग की तीव्रता के अनुसार 2-5 से 5 या 10 मि.ग्रा . प्रतिदिन 5-10 दिन तक 2-3 मासिक चक्रों में ।

.........

2. फरटूगार्ड ( Fertugard ) विडल सायर   3 टे . प्रतिदिन मासिक धर्म के 16 वें से 26 वें दिन तक । आ . नु . दुबारा ।

सावधान - .रक्त और जननांगीय कार्सिनोमा , यकृत की दुष्क्रिया एवं अस्वाभाविक जननांगी रक्तस्राव में इसका प्रयोग न करें।

3. प्रिमोल्यूट - एन ( Primolut - N ) ' जर्मनरेमेडीज   -  1-2 टेबलेट दिन में 1 या 2 बार । 

सावधान- . गर्भावस्था , दूध पिलाने की अवस्था , वृक्क एवं हृदय.शोथ की अवस्था में प्रयोग न करें । 

4. ओवूलेन ( Ovulen ) ' सलें  -  1-2 टेबलेट दिन में 2 या 3 बार ।

सावधान- . गर्भावस्था , मधुमेह की अवस्था में प्रयोग न करें । 

5. लाडोगाल ( Ladogal ) बिन - मेडिकेअर 200 मि.ग्रा . कै . -  1- 4 कै . प्रतिदिन 2 भागों में बाँटकर 3-6 माह तक ।

सावधान - नं .3 की भाँति । 

चिकित्सा में - साथ में इनका भी प्रयोग करें 

1. कैडिस्पर - सी ( Cadisper - C ) कैडिला  -  1 टेबलेट दिन में 3 बार । रक्त प्रदर में लाभकर ।

2. सिनकेविट ( Synkavit ) रोश  -  1 टेबलेट दिन में 3 बार दें । साथ ही मेथीर्जन ( Methergin- सैण्डोज ) 1-2 टे . दिन में 3 बार ।

3. कैल्सिण्डोन - डी ( Calcindon - D ) ' इण्डोफार्मा  2 टेबलेट रोजना दिन में 2-3 बार दूध के साथ । साथ में क्रोमरजेन ( Chromergen ) नि . लाईफ कं की 1-2 टे . 4-6 घंटे पर । अथवा इसका इन्जे . माँस में हर 12 घण्टे पर लगायें ।


अत्यावि / रक्त प्रदर में लगाने योग्य सुप्रसिद्ध ऐलो . इन्जेक्शन -
..........

 1. स्टिप्टोक्रोम ( Styptochrome ) ' डोल्फिन  -   2-4 मि . ली . माँस में । 

2. प्रिमैरीन ( Premarin ) ज्योफर मैनर्स   -  20 मि . ग्रा . की सुई माँस में या धीरे - धीरे आई . वी . 6-12 घंटे पर । साथ में आये घोलक को मिलालें ।

3. यूनिपम्बा ( Unipamba ) यूनिकेम '  -  5 मि . ली . ( 50 मि . ग्रा . ) से 10 मि . ली . ( 2 एम्पुल ) माँस या शिरा में धीरे - धीरे लगावें । आवश्यकता पड़ने पर पुनः लगाया जा सकता है ।

नोट - .साथ में इसकी 1 से 2 टे . भी दिन में दो बार खिलावें । 

4. एमिकार ( Amicar ) ' सायनेमिड 20 मि . ली . के वायल में   -  तीव्र दशा में 20 मि . ली . दवा को 5 % डेक्स्ट्रोज 500 मि . ली . में मिलाकर इन्फ्यूजन रूप में दें ।

नोट- . साधारण अवस्था में इसी औषधि की 1-2 टे . दिन में 2-3 बार नित्य जल से दें ।

  
मेडिकल व्यवस्था पत्र -  ( Rx )

- चारपाई पर पूर्ण विश्राम , पैताना ऊंचा । हिलने - डुलने की सख्त मनाही ।  

- योनि तथा पेडू( पेट का निचला हिस्सा ) पर बर्फ की थैली अथवा ठंडे पानी की गद्दी ।

........

- फिटकरी 1 चम्मच + 1/2 लीटर शीतल जल मिलाकर योनि में डूस । 

- इन्जे . स्टिप्टोबियॉन ( मर्क ) 4 मि . ली . माँस में नित्य । 

- कैडिस्पर - सी ( Cadisper - C ) 1-3 टे . दिन में 3 बार । 

- फरलुटाल ( Farlutal ) 10 मि . ग्रा . रोजाना 5-10 दिन तक । 2-3 मासिक चक्रों तक इसे आगे चलायें । 

- कैल्सिण्डोन डी ( इण्डो फार्मा ) 2 टेबलेट दिन में 2 या 3 बार प्रतिदिन गाय के दूध के साथ । 

- इन्जेक्शन यूनीफेरोन - एफ -12 ( Inj . Uniferon F - 12 ) रक्त की कमी में 2 मि . ली . माँस में नित्य या 1 दिन छोड़कर आ . नु . 4-5 इन्जेक्शनों तक । 

याद रहे -  अधिक रक्तस्राव के कारण महिलाओं में रक्त की कमी अवश्य मिलती है । नैदानिक परीक्षण करवाने के उपरान्त हीमोग्लोबिन और रक्त में लाल कणों की संख्या के अनुसार लौह ( Iron ) , विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड देने चाहिये।
 

Post a Comment

Previous Post Next Post