स्वप्नदोष - नाईट डिस्चार्ज ( Night Discharge ) - पर्याय, परिचय, कारण, लक्षण तथा इस रोग से निदान की चिकित्सा विधि क्या है? Swapnadosh - Night Discharge - What is the synonym, introduction, causes, symptoms and medical method of diagnosis of this disease?

स्वप्नदोष - नाईट डिस्चार्ज ( Night Discharge )


स्वप्नदोष - नाईट डिस्चार्ज ( Night Discharge )

पर्याय

नोक्चूरल इमीसन , नाइट ड्रीम , नाइट फॉल , नाइट डिस्चार्ज । पोल्युशन ( Pollution ) 

परिचय

जब सोये हुए पुरुष काअनजान में वीर्य निकल जाता है तो उसे ' स्वप्नदोष कहते हैं । 

जब यह रोग पुराना हो जाता है तो मूत्र में वीर्य निकलने लगता है जिसे वीर्य प्रमेह या वीर्य का बहना भी कहते हैं । 

नोट - रात्रि को सोते समय वीर्य के स्खलित हो जाने को स्वप्नदोष कहा जाता है । पुरुषों में स्वप्नदोष 13 या 14 वर्ष की आयु में होने लगता है ।

रोग के प्रधान कारण

- कब्ज ( Constipation ) रहना । 

- शारीरिक परिश्रम न करना । 

- दिनभर बैठकर या वासनामय उपन्यास पढ़कर समय गंवाना । 

- बराबर सुन्दर स्त्री के साथ रहना ।

- अकेले में पराई स्त्री से बातचीत ।  

- बार - बार विशेषकर रात में ऐसा सिनेमा जिसमें नायक और नायिका प्रेमालाप करते हों , आपस में चिपक जाते हों , उनका अर्धनग्न या प्रायः नग्न चित्र विशेषकर सुन्दर युवती का दिखाये जाना । 


- टेलीविजन पर निरन्तर ' चित्रहार एवं रंगोली कार्यक्रम का देखना । 

- गन्दे और बुरे लोगों की संगति । 

- सम्भाषण( conversation ) एवं प्रेमालाप । 

- शिश्न के नीचे वाले स्थान में बूंघट की त्वचा के नीचे मैल जमा हो जाना । 

- हस्तमैथुन , गुदामैथुन एवं पशु मैथुन आदि गन्दे कार्यों में प्रवृत्ति । 

- शराब , बीड़ी , सिगरेट , चरस , गाँजा आदि मादक पदार्थों का अधिक सेवन । 

- स्त्री प्रसंग की अधिकता ।

- वेश्यागमन( वेश्याओ से संबंध ) आदि से पौरुष ग्रन्थि एवं वीर्यवाहिनी नलिका एवं अण्ड ग्रन्थियों में विकृति आ जाना । 

- सूर्योदय के बाद भी बहुत देर तक सोते रहना । 

- गर्म और गरिष्ठ( तला हुआ ) तथा उत्तेजक भोजन - पेय के सेवन से । 

- मल - मूत्र के वेग को रोकना । 

- साईकिल एवं घोड़े की सवारी अधिक करने से । 

- अधिक क्रोध या चिड़चिड़ापन । 

- कोमल एवं गद्देदार उष्ण शैया पर बराबर सोने का अभ्यास ।


रोग के प्रधान लक्षणप्रारम्भिक लक्षण - 

- हाथ और पैर के तलवों में जलन । 

- शरीर के अंग - प्रत्यंगों में स्निग्धता एवं पिच्छिलता( मतलब सामान्य शाररिक अनुपात जैसे - वजन, आकार में अंतर आना ), 

- मुख में मीठापन ।

- तन्द्रा( आलस्य ) एवं जम्हाई की अधिकता । 

- प्यास की अधिकता । 

- मुख , तालु एवं कंठ का सूखना । 

- शरीर से दुर्गन्धआना । 

- थोड़ा परिश्रम करने पर सांस का फूलने लगना । 

- आलस्य आ जाना । 

लगातार स्वप्नदोष बहुत दिनों तक होने पर । → 

- शक्तिहीनता एवं दुर्बलता ।  


- मुख की आकृति मलिन एवं उदासी । 

- चेहरे की रौनक ( कान्ति ) क्षीण । 

- स्मरण शक्ति की अत्यधिक कमी । 

- अधिक क्रोध आना । 

- सुस्ती एवं सिर दर्द । 

- बार - बार जुकाम की शिकायत । 

- समूचे शरीर में पीड़ा । 

- पेट एवं छाती में दर्द । 

- देखने की शक्ति कमजोर हो जाना ।

- बालों का पकने लगना । 

- बात - बात में भयभीत हो जाना । 

- अल्प परिश्रम से ही थकावट । 

- आवश्यक बात भी तुरन्त भूल जाना । 

- कभी - कभी सिर में चक्कर । 

- माथा भारी रहना । 

- कभी - कभी मूत्र के साथ वीर्य । 

- हर समय थकावट महसूस होना । 

- सोते रहने की इच्छा । 

- किसी काम में मन न लगना । 

- पसीना की अधिकता ।

अन्य कारण - कामोत्तेजक विचारों को बार - बार सोचना । 

- गर्म एवं उत्तेजक पदार्थों का अधिक सेवन । 

- मानसिक कार्यों की अधिकता । 

- अधिक चिन्ता एवं गम । 

नोट - अण्डकोष बढ़ जाते हैं । स्वप्न में मैथुन जैसा दृश्य उपस्थित होकर वीर्य स्राव होकर दुर्बलता आ जाती है । 

- शिश्न ( Penis ) पतला , छोटा , ढीला और टेढ़ा हो जाता है जिससे स्त्री - प्रसंग में स्त्री के सामने लज्जित होना पड़ता है । 

- आँखों के सामने काले धब्बे से पड़ जाते हैं । 

- यदा - कदा( कभी - कभी ) पैरों में झुनझुनी पैदा हो जाती है । 

- आहार में अरुचि , अग्निमांद्य , ध्वजभंग या नपुंसकता आदि लक्षण भी ।


वैज्ञानिक अनुसन्धान- . आधुनिक गुप्त रोग विशेषज्ञ वैज्ञानिकों का कहना है कि युवा व्यक्ति को माह में 2-3 बार स्वप्नदोष होना कोई बीमारी अथवा विकृति नहीं है , परन्तु जब इससे अधिक बार हो तो रोग समझकर चिकित्सा करनी चाहिये । 


पथ्यापथ्य , सहायक एवं आनुषांगिक चिकित्सा




पथ्य
- खाने में साठी चावल की भात , गेहूँ और चने के बेसन की रोटी तथा देशी घी का सेवन करें । परवल , आलू , टमाटर , रामतरोई की सब्जी और चना , अरहर , मूंग एवं मसूर की दाल खायें । प्रत्येक भोजन में देशी घी का सेवन करें । जौ की रोटी बहुत उत्तम है । धारोष्ठा दूध पीना अच्छा रहता है । 


अपथ्य - खट्टे , चटपटे , लाल मिर्च , अचार , कब्ज करने वाले एवं वातवर्द्धक पदार्थों से परहेज रखें । साईकिल की सवारी , घुड़सवारी तथा देर तक एक स्थान पर बैठे रहना और दिन में सोना वर्जित है । मन में थोड़ा भी वासनात्मक विचार न लायें ।

 

सहायक चिकित्सा में

रोगी को कब्ज होने पर उसे चने का बेसन और गेहूँ का आटा बराबर लेकर शुद्ध देशी घी के परांठे रात - दिन के भोजन एवं नाश्ते में खिलायें । पपीता एवं गाजर तथा खूब पके अमरूद अधिकाधिक लें । अंकुरित चने , मूंग एवं गेहूँ के दाने प्रातः - सायं थोड़ी सी मात्रा में कागजी नीबू के रस में मिले पिण्ड खजूर के साथ खिलायें । हर तीसरे दिन या आवश्यकता पड़ने पर 2 टेबलेट ट्रिफोलैक्सिन ( Trifolaxin- स्टैण्डर्ड ) या हबोलेक्स की 2 टे . रात सोते समय पर्याप्त जल से खिलायें ।

• आवश्यक निर्देशक एवं सुझाव

बर्लिन के प्रसिद्ध यौन रोग स्पेशलिस्ट डॉ . ईवाक ब्लाक ने स्वप्नदोष के निवारण के लिये मनोबल को बढ़ाने तथा मन को हर प्रकार के वासनात्मक विचार से दूर रखने पर विशेष जोर दिया है । 
इनका कहना है कि दुर्भाग्य से यदि किसी नवयुवक एवं पुरुष के मन में वासना का उद्वेग( विचार ) आ जाये तो उसे तुरन्त स्त्री सम्भोग करके उस उद्वेग को मिटा लेना चाहिये । यदि ऐसा सम्भव न हो तो कठोर परिश्रम वाला कार्य करके और मन को ईश्वर की ओर लगाकर वासना को शान्त करना चाहिये । 

- रोगी को सलाह दी जाये कि रात्रि में जिस समय आँख खुले उसे पेशाब कर आना चाहये क्योंकि मूत्राशय भरा रहने पर इसका बोझ शुक्राशयों पर पड़ता है जिससे वीर्य स्खलित हो जाता है।

- कुछ रोगियों में प्रातःकाल एक निश्चित समय ( लगभग पाँच या साढ़े पाँच बजे के बीच ) स्वप्नदोष होता है , इन रोगियों को ऐसा अभ्यास डालना चाहिये कि इस समय से पहले सोकर उठ जायें । इसके पश्चात् शौच आदि क्रियाओं से निबटकर खुली हवा में टहलने चले जायें । 

- रात को सोते समय नित्य शिश्न के अंदर की खाल को शीतल जल से अच्छी तरह साफकर हाथ - पैर धोकर सोयें । साथ ही कमर के बल न लेटें ।

मदिरापान का पूर्णतया निषेध आवश्यक है क्योंकि इससे उत्तेजना मिलने के कारण स्वप्नदोष होने की ज्यादा सम्भावना रहती है। 

याद रखिये

यदि , अविवाहित युवकों को महीने में 3-4 बार स्वप्नदोष न हो तो उनके दिमाग में भारीपन , सिर दर्द और शरीर की नसों में कुछ तनाव - सा महसूस होने लगता है । स्वप्नदोष हो जाने पर उनका शरीर खुल जाता है और दिमाग में हल्कापन अनुभव होता है । 

नोट- यह मानना गलत है कि स्वप्नदोष एक भयंकर रोग है और रोगी के शरीर को खोखला बना देता है , सच तो यह है यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है ।


Rx ( प्रेस्क्रिप्शन ) - 



- दिन में 1 बार - एट्रोपीन ( Atropine ) बी . आई .   -   1 / 2-1 मि . ली . त्वचा में इन्जे . लगायें । 

- दिन के 10 बजे - मील्टबे कैप्सूल ( Multibay Cap . )  -  1 कैप्सूल × जल से । 

- दिन में 2 बार - बिविनाल फोर्ट ( Bivinal Forte )  -  1 कै . × दिन में 2 बार जल से । 

- भोजन से पूर्व - विटाफिक्स ( Vitafix ) गैम्बर्स लेबो .  -  2-2 टेबलेट × जल से । 

- सोते समय - लालेक्टिल ( Largactil ) रोन - पुलेंक  - टेबलेट जल से । 

नोट- . रोग की अधिक तीव्रता में - लार्जेक्टिल का इन्जेक्शन -1 एम्पुल की सुई मांस में लगावें । एवं जेसिकेन मरहम नि . ( S.G.O. ) रात को सोने से पहले शिश्नमणि पर लगाकर हल्के हाथ से धीरे - धीरे मलें । 

उपरोक्त चिकित्सा क्रम के साथ - साथ ' कब्ज ' की चिकित्सा अवश्य करें। 

स्वप्नदोष में सेवन कराने योग्य ऐलो . पेटेण्ट टेबलेट - कैप्सूल .



1. हिप्नोटैक्स ( Hypnotex ) पी . सी . आई .5 , 10 मि . ग्रा . कै ..  -  1 कै . रात को सोने से 1/2 घण्टे पूर्व जल से  

2. ल्यूमिनाल ( Luminal ) ' बेयर ' कं .  -  30 मि . ग्रा . की 1 टे . सायं तथा 100 मि . ग्रा . की 1 टे . सोने से 1/2 घण्टे पहले जल से दें । 

3. निण्ड्राल ( Nindral ) ' टोरेण्ट   -  1-2कै . रात को सोते समय । 

4. प्रोडार्म ( Prodorm ) ' वालेस   -  1 टे . रात को या सोने से 15 मिनट पूर्व दे।

सावधान - ' गम्भीर यकृत रोग में प्रयोग न करें । 


ध्यान रहे

अब तक स्वप्नदोष की कोई सफल औषधि नहीं खोजी जा सकी है । इसमें केवल ऐसी औषधियाँ लाभ पहुँचाती हैं जो मानसिक और तंत्रिका तंत्र के तनाव को दूर कर सकें और उन्हें शिथिल व शांत कर सकें । इस दृष्टि से पोटाशियम ब्रोमाइड उपयुक्त औषधि है । 1-1 ग्राम पोटेशियम ब्रोमाइड दिन में 3 बार ताजे पानी के साथ देनी चाहिये । अन्तिम खुराक सोते समय।जैसे - जैसे स्वप्नदोष घटते जायें मात्रा घटाते जायें । 

- यदि स्वप्नदोष अधिक हो रहे हों तो चिकित्सा करने से पहले दो सप्ताहों में पोटेशियम ब्रोमाइड को पानी में घोल प्रत्येक खुराक 5 बूंद टिंचर ओपीयम मिला देना चाहिये । 

- फिर भी लाभ न मिले तो सोते समय ल्यूमिनल 60 मि . ग्रा . ताजे पानी के साथ खिलाना चाहिये।औषधि पर्याप्त लाभ होने तक देते रहें । 

नोट - भांग की ठंडाई इसकी एक उपयुक्त औषधि है । पर कालीमिर्च की मात्रा बहुत ही कम होनी चाहिये ।

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