दिल का दौरा क्यों पड़ता है ?
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| Why does a heart attack occur? |
हम अक्सर सुनते हैं कि अमुक व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई । कभी - कभी तो दिल का दौरा इतना भयानक होता है कि मनुष्य की पलभर में ही मृत्यु हो जाती है ।
क्या तुम जानते हो कि दिल का दौरा क्यों पड़ जाता है ?
दिल हमारे शरीर का बहुत ही महत्त्वपूर्ण अंग है । यह एक ऐसी मांसपेशी है जो एक पम्प का काम करती है । हमारे दिल का आकार मुट्ठी के बराबर होता है । यह छाती के बायीं ओर दोनों फेफड़ों के बीच में स्थित है ।
यह निरंतर सिकुड़ता और फैलता रहता है । सिकुड़ने और फैलने की क्रिया से यह शरीर में रक्त वाहिनियों द्वारा खून भेजता रहता है । रक्त में शारीरिक क्रियाओं के लिए आवश्यक आक्सीजन और ग्लूकोज़ जैसे पदार्थ होते हैं ।
चूंकि हृदय एक मांसपेशी है , इसलिए इसे अपना काम करने के लिए स्वयम् भी रक्त की आवश्यकता होती है । रक्त धमनियां जो हृदय को रक्त देती हैं , कोरोनरी धमनियां कहलाती हैं । ये धमनियां दिल के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं ।
जब तक ये हृदय को उपयुक्त मात्रा में रक्त भेजती रहती हैं , तब तक हृदय सुचारुरूप से काम करता रहता है । दिल वास्तव में बैंक का खजांची है , जो दूसरे लोगों को पैसा देता है , लेकिन स्वयम् भी अपने निर्वाह के लिए वेतन लेता है ।
अब प्रश्न उठता है कि दिल का दौरा क्यों पड़ जाता है ?
दिल के दौरे का अर्थ है कि रक्त की कमी के कारण इसके किसी हिस्से का विनाश हो जाना । इस विनाश के कई कारण हैं - यदि हृदय को रक्त देने वाली धर्मानयों के अंदर चिकनाई जमा हो जाती है , तो उनका रास्ता संकुचित हो जाता है , जिससे ये धमनियां उचित मात्रा में हृदय को रक्त नहीं दे पातीं । चिकनाई युक्त और तले पदार्थ खाने से ऐसा होता है ।
जब इन धमनियों में कहीं रुकावट आ जाती है , तो दिल में रक्त की कमी से दर्द होने लगता है । इसे एनजाइना पेक्टोरिस कहते हैं । यदि हृदय के अंदर रक्त का संचार रुक जाए तो वह हिस्सा निष्क्रय हो जाता है । यदि इस हिस्से को शरीर पुनः सक्रिय नहीं कर पाता तो ऐसी स्थिति को हम दिल का दौरा पड़ना कहते हैं ।
रयूमेटिक फीवर के कारण भी दिल का दौरा पड़ जाता है । यह रोग एक प्रकार के बैक्टीरिया द्वारा पैदा होता है । इन बैक्टीरियाओं को स्ट्रेप्टी कोकी कहते हैं ।
इनके आक्रमण से हृदय के ऊतकों में सूजन आ जाती है । सूजन बहुत बढ़ जाने पर दिल अपना काम करना बंद कर देता है और दिल का दौरा पड़ जाता है । कम सुजन से भी हृदय पर बुरा प्रभाव पड़ता है , इससे दिल कमजोर हो जाता है । ऐसी स्थिति में भी दिल काम करना बंद कर सकता है ।
तीसरे प्रकार के हृदय सम्बन्धी रोग जन्म से ही होते हैं । पैदा होने वाले अधिकतर बच्चों के हृदय मजबूत होते हैं , लेकिन 200 बच्चों में से किसी एक बच्चे के दिल के वाल्व का विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पाता ।
कभी - कभी दिल की दीवार में गैप रह जाता है । इन सब दोषों के कारण हृदय अपना काम ठीक प्रकार नहीं कर पाता । गहरे रंग के बच्चों के हृदय में ऐसे ही दोष होते हैं ।
जब दिल का दौरा पड़ता है तो उसके कुछ विशेष लक्षण होते हैं । सबसे पहले दिल में दर्द महसूस होता है । बायीं भुजा में दर्द होता है । यह दर्द असहनीय होता है , बायां हाथ सुन्न होने लगता है , सांस लेने में कठिनाई होती है , नब्ज तेजी के साथ चलने लगती है ., व्यक्ति का तन - मन ऐसी बेचैनी महसूस करने लगता है कि जैसे उसका दम घुट रहा हो ।
इन सभी लक्षणों में व्यक्ति को चाहिए कि वह बिस्तर पर लेट जाए और तुरंत ही डाक्टर को दिखाए । जीवन में कुछ सावधानियां बरतने से दिल के दौरे से बचा जा सकता है । ये सावधानियां निम्नलिखित हैं : -
अधिक चिकनाई वाले और तले पदार्थों को कम से कम खाना चाहिए । प्रतिदिन हल्का व्यायाम करना चाहिए । शराब और धूम्रपान नहीं करना चाहिए । भोजन में दूध और फलों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए । शरीर को थकान महसूस होने पर पर्याप्त विश्राम देना चाहिए ।