प्रथम ( मानव ) हृदय प्रतिरोपण कब किया गया ? When was the first (human) heart transplantation done?

प्रथम ( मानव ) हृदय प्रतिरोपण कब किया गया ? 

प्रथम ( मानव ) हृदय प्रतिरोपण कब किया गया ? When was the first (human) heart transplantation done?
heart transplantation, by - Henryk Michalak, Klinika Kardiochirurgii w Łodzi

सन् 1950 में हार्ट लंग मशीन ( heart lung machine ) बनने के बाद हृदय की शल्यक्रिया के क्षेत्र में व्यापक रूप से प्रगति हुई है । यह मशीन रक्त को शिराओं से धमनियों में इस तरह पम्प करती है कि उसे हृदय से होकर नहीं जाना पड़ता है । 

इस प्रकार की अधिकांश मशीनें रक्त का आक्सीजनीकरण भी करती हैं जिससे रक्त को फेफड़ों से होकर भी गुजरना नहीं पड़ता है । इस मशीन को प्रयोग में लाकर हदय गति को रोक कर हृदय को चार घंटे तक शल्यक्रिया के लिये खोला जा सकता है । 

इस प्रकार की आधुनिक मशीनों तथा उपकरणों के प्रयोग के फलस्वरूप ही मानवीय हृदय प्रतिरोपण सम्भव हो सका । प्रथम हृदय प्रतिरोपण दक्षिण अफ्रीका के ग्रुट शुर ( Groote Schuur ) अस्पताल , केप टाउन में 3 दिसम्बर 1967 को सम्पन्न किया गया था । 

डा . क्रिश्चियन बर्नार्ड ( Christian Barnard ) के नेतृत्व में 20 शल्य चिकित्सकों के एक दल ने 55 वर्ष के लुइस वाशकांस्की के हृदय को बदल कर नया हृदय लगाया । यह हृदय 24 वर्षीय डेनिस एन डार्वेल ( Denise Ann Darvall ) ने दान किया था जो एक सड़क दुर्घटना में मर गया था । 

प्रथम ( मानव ) हृदय प्रतिरोपण कब किया गया ? When was the first (human) heart transplantation done?

दाता और प्राप्तकर्ता का रक्त एक ही ग्रुप का था तथा हृदय को प्रतिरोपण से पहले तीन घंटे से ज्यादा अवधि तक ठण्डे आक्सीजनीकृत रक्त में रखा गया था । शल्य - क्रिया में पूरे पांच घण्टे का समय लगा । 

नये हृदय का आकार वाश्कांस्की के अपने हृदय की तुलना में आधा था । शल्य - क्रिया पूरी तरह सफल हुई । कुछ ही दिनों में वाश्कास्की उठ कर बैठ गया तथा उसने भोजन करना व प्रसन्नतापूर्वक बातें करना शुरू कर दिया । 

डाक्टर इस बात से चिंतित थे कि शरीर कहीं प्रतिरोपण को ठुकरा न दे । वे शल्य - क्रिया के बाद होने वाले संक्रमण ( infection ) के भय से भी चिंतित थे अंततः हुआ भी यही कि शल्य - क्रिया के बाद हुये संक्रमण से एक महीने बाद वाश्कांस्की की मृत्यु हो गई । 

जनवरी , 1968 में 58 वर्षीय दन्त चिकित्सक फिलिप ब्लेबर्ग ( Philip Blaiberg ) का हृदय बदला गया । फिलिप का शरीर भी नये हृदय को गुर्दे के जबरदस्त संक्रमण तथा फेफड़े को हुई हानि के कारण ग्रहण न करने की कोशिश कर रहा था लेकिन इन कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर ली गई और यह प्रतिरोपण सफल रहा । 

इस तरह हृदय प्रतिरोपण जल्दी ही बहुत लोकप्रिय हो गया । परिणामस्वरूप 1968 के अंत तक संयुक्त राज्य अमेरिका , ब्रिटेन , फ्रांस , भारत , दक्षिण अमेरिका , कनाडा , चैकोस्लोवाकिया व इजराइल में सौ से भी अधिक हृदयों का प्रतिरोपण कर दिया गया । इनमें 40 से अधिक रोगी जीवित रहे । 

ब्लेबर्ग 17 अगस्त , 1969 तक जीवित रहा तथा अन्य रोगी ढाई वर्ष तक जीवित रहे । सम्पूर्ण सफलता न मिलने के कारण धीरे - धीरे हृदय प्रतिरोपणों की संख्या कम हो गई । दिसम्बर 1970 से मई 1971 के बीच केवल 6 प्रतिरोपण क्रियाएं ही सम्पन्न की गई ।


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