छाती की जलन [ Heart Burn ] क्या है? इसके लक्षण, परिचय, कारण, एवमं चिकित्सा क्या है? What is heart burn What are its symptoms, introduction, causes, and treatment?

छाती की जलन [ Heart Burn ] 


छाती की जलन [ Heart Burn ]

पर्याय

अम्लपित्त , तुर्शी , आमाशय की अम्लता , हृद - दाह , हाइपर एसीडिटी ( Hyper acidity ) , एसिड डिस्पेप्सिया , गैस्ट्रोक्सिया ( Gastroxia ) आदि नामों से जाना जाता है । सामान्य भाषा में खट्टी डकारें आना । 

रोग परिचय

जब ऐसे खाद्य पदार्थ जिसे खाने से पित्त में एसिड की मात्रा बहुत वृद्धि हो जाती है उसे अम्ल पित्त या ( heart burn ) कहते हैं।
This is a Burning retrosternal sensation usually due to inflammation of the oesophagus as in reflux oesophagitis . Sometimes dysmotility of the oesophagus produces a similar sansation .

वक्तव्य 

भोजन ठीक है न पचने से अमाशय अधिक क्रियाशील हो जाता है जिससे अमाशय में हाइड्रो क्लोरिक अम्ल का निर्माण जरूरत से ज्यादा होने लगता है, जिसके परिणाम स्वरूप खट्टी डकार एक बार - बार आने लगती है।
यह कोई स्वतंत्र रोग नहीं , बल्कि कई रोगों का लक्षण मात्र है ।

रोग के कारण -  

◆ आमाशय और आंतों या लीवर के किसी भाग में छाले ( Gastro - duodenal ulcer ) ।

◆ अत्यधिक धूम्रपान ( Excessive Smoking ) 


◆ कार्बोहाइड्रेट्स का ठीक से पाचन न होने से शर्करा का किण्वीकरण ( Fermentation ) हो जाता है , जिससे अम्ल उत्पन्न होकर छाती में जलन होने लगती है । 

◆ रात को मसाले , मिर्चयुक्त चटपटे भोजन से पेट को भर कर सो जाने से प्रायः ऐसा होता है ।


◆ चर्बी , कच्चा या अधपका मांस आदि का अधिक सेवन । 

◆ पीत ग्रंथि द्वारा पित्त का अत्यधिक निर्माण, आमाशय के छाले जैसे रोग एवं ग्रहणी ( छोटी आंत का प्रारंभिक भाग ) में किसी प्रकार के अवरोध से। 

◆ भोजन को ठीक चबाकर न खाना एवं दाँतों का सड़ना ।


रोग के सामान्य लक्षण

● परिश्रम के बिना ही थकावट होना । 
● मितली( चक्कर ) आना । 

● कड़वी एवं खट्टी डकारें आना । 


शरीर में भारीपन , हृदय के पास एवं गले में जलन की अनुभूति । 

● अरुचि एवं गैस की समस्या । 

● अंगों में शक्ति कम महसूस होना । 

● सिर में भारीपन ।


खट्टे खाध्य पदार्थो, मद्य तथा खट्टे खाद्य पदार्थों , शारीरिक परिश्रम से रोग में वृद्धि होती है।

 रोग लक्षण -  

■ मुँह से पानी भर - भर कर आना । 

■ भोजन के 1-2 घण्टे बाद लक्षणों का प्रारम्भ । 

■ भूख प्रायः सामान्य रहती है पर बहुत खट्टी डकारें आती हैं । 
■ हृदय के पास में बेचैनी एवं हृदय की धड़कन असामान्य होना । 


■ खट्टी डकार एवं मुँह का स्वाद खराब । 

■ आमाशय में दर्द एवं नाभि के आसपास दर्द का अनुभव ।


 ■ कभी - कभी दस्तों की शिकायत । 

■ कभी - कभी आमाशय में तीब्र गैस , दर्द एवं मरोड़ । 

नोट- यह सब रोग लक्षण ' अम्ल पित्त ' को सूचित करते हैं । 


रोग की पहिचान

सीने में जलन एवं बेचैनी , खट्टी डकार , आमाशय में चुभन , भोजन के 1-2 घण्टे बाद लक्षणों का मिलना , मुँह में पानी भर - भर कर आना आदि लक्षणों से इसे आसानी से पहिचाना जा सकता है ।


रोग के परिणाम

कभी - कभी रोगी के आमाशय में असहनीय पीड़ा होती है । वैसे रोग आसानी से ठीक होने वाला है ।


इसमें रोगी को ऐसा होता है कि उसका मुंह बार - बार पानी से भर जाता है । आमाशय में उपस्थित पदार्थ आहार नलिका तक आने लगती है ।

चिकित्सा विधि


■ कारण को दूर करें । 

■ अपने हित के लिए संतुलित आहार, उचित औषधि या दवाइयों का सेवन करना । यह चिकित्सा का संक्षिप्त रूप है।  

■ रोगी को परिश्रम से बचायें । 

अम्लीयता निवारक औषधियों - ( Antacids ) का प्रयोग करें । 
नोट - चिन्ता , भय , शोक आदि मानसिक विकारों से रोगी को दूर रखने का प्रयत्न करना चाहिये । 

पथ्य एवं सहायक चिकित्सा

■ भोजन में अधिक मिर्च , मसाले , घी में तले पदार्थ , पकवान , चाय , कॉफी तथा शराब का सेवन नहीं करना चाहिए । 


■ पुराना चावल , जौ , गेहूँ , मूग , आँवले का मुरब्बा , मुनक्का , किशमिस , परवल , करेला , बथुआ , पालक , चौलाई , लौकी , दूध , मक्खन , घी , जीरा , सेंधा नमक , मीठे फल , मुसम्मी , खीर , मलाई आदि लिये जा सकते हैं । 


धूम्रपान , चाय , गरम भोजन , क्रोध एवं मनोविकार हानिकारक होते हैं । 
एन्टेसिड्स ( Antacids ) का प्रयोग । तरल औषधियाँ ( सिरप ) विशेष लाभकर । मात्रा • 10-15 मि . ली . । औषधि प्रयोग भोजन के साथ ।

औषधीय चिकित्सा ( Medicinal Treatment ) -


1. ' मेक्सेरोन ( Maxeron ) नि . कार्टर वालेस -  1 टेबलेट भोजन से 1/2 घण्टे पूर्व दिन में 3 बार । 

अथवा - 

न्यूट्राडोना ( Neutradonna ) शेरिंग -  2 टेबलेट भोजन से पूर्व दिन में 2-3 बार । 

2. सीमेटीडीन 400 mg . ( Cimetidine 400 mg ) पी . सी . आई . -  1 टेबलेट हर भोजन के बाद । 
अथवा - 

रेनीटिडीन ( Renitidine ) 150 मि . ग्रा . -  दिन में 2-4 बार भोजन के साथ और सोते समय । 

नोट- इसोफेगस शोथ ( Oesophagitis ) की स्थिति में - 
चिकित्सा कम से कम 6 सप्ताह तक चलानी चाहिये ।
3. सभी अवस्थाओं में एक नवीन औषधि -  ओमेप्राजोल ( Omeprazole ) 20 मि . ग्रा . ( ओसिड - Ocid नि . कैडिला ) का 1 कैप्सूल मुख द्वारा सप्ताह तक देने से विशिष्ट लाभ मिलता है ।

नोट- इस औषधि को एल्केम क . ने ' ओमेप्राज ( Omepraz ) क . , स्टेन्गेन  कं ,ने ओमेप्राजोल ( ओमेज Omez ) कै . तथा टोरेन्ट कं . ने इसे'ओमोजेक ( Omirac ) कै . के नाम से बनाया है।


4. अनीमिया की स्थिति में -  ' आयरन के योग' 'ब्लड ट्रान्सफ्यूजन' आदि की आवश्यकता हो सकती है । 
' ओमेप्राजोल औषधि ' ड्यूडेनल अल्सर ' , ' गैस्ट्रिक अल्सर , Renux Oesophagitis से उत्पन्न हुद - दाह में सर्वोत्तम लाभकारी औषधि है । 
◆  अल्माकार्ब ( Almacarb ) ग्लैक्सो -2 टेबलेट , दिन में 3-4 बार दें। 

अथवा 

◆  रेनीटिडीन -  1 टेबलेट भोजन के साथ दिन में 2 या 3 बार डि जल से । 

◆ ' ओसिड ' -  कै . दिन में 1 बार 12 बजे दिन के जल मे सप्ताह तक । 

◆ इन्जे . पेरीनार्म -  2 मि . ली . मांसपेशी में दिन में 1 बार 5 दिन ल तक । 

◆ हेमफर ( Hemfer ) ( एल्केम ) 2 चम्मच दिन में 2 बार दिन के 10 बजे एवं सायं 4 बजे ।
आवश्यक निर्देशपूर्ण लाभ के लिए क्लिनिकल परीक्षण के पश्चात ही मूल कारण को दूर करें ।

मिश्रित औषधि चिकित्सा ( Chemotherapy )



1. स्पाज्मिण्डोन 1 टेबलेट , वैलाडीनल 1 टेबलेट , सोडामिण्ट 2 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा दिन में 3 बार दें । साथ ही ' ओमेलेक कैपसूल ' नि . टोरन्ट 1 कै . दिन में 1 बार जल से । 

2. एल्यूड्रोक्स 1 टेबलेट ,टेबलेट 1/2 टे . , ईस्ट 1 टेबलेट, निलसर ( Nilcer ) नि . ' खण्डेलवाल 1 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 या 3 बार । 

3. ' इयूगास्ट्राइड ( Eugastrid ) 2 टेबलेट , पोलीक्रोल फोर्ट जैल 2 चम्मच । ऐसी एक मात्रा दिन में 3 या 4 बार ।

अम्लपित्त की लक्षणों के अनुसार विशेष चिकित्सा

1. गर्भावस्था की दौरान हृदय - जलन में म्यूकेन ( Mucaine ) निर्माता - ' वीथ- 2 चम्मच दिन में 4 बार भोजन से 15 मिनट पूर्व तथा रात सोते समय । 

2. आमाशय की बीमारी से उतपन्न हृदय - जलन में  डायोवोल फोर्ट डी जी एल ( Diovol Forte दाह में → D.G.L. ) नि. - वैलेसी- 1-2 चम्मच दिन में 2-3 बार भोजन के बीच एवं रात्रि सोते समय । 
 
◆ ' पेप्टिक अलसर से उत्पत्र हृदय - जलन में भी उपयोगी । 

3. अम्लपित्त के साथ तीव्र पीड़ा  ' बेलाडीनल ( सैण्डोज ) 1 टेबलेट दिन में बार दें । अथवा ' लार्गेक्टिल 10 मि . ग्रा . की 1 टेबलेट दें ।


हृदय-जलन में प्रयोग आने वाली उपयोगी पेटेन्ट लेटेस्ट गोलियाँ / कैप्सूल



1. एसीगोन टे . ( Acigon Tab . ) ( वोह रिंगर मेन्हेम ) 1-3 टेबलेट दिन में 2-3 बार भोजन के बाद एवं सोते समय ।

2. एक्ट्रीओल ( Actriol ) ( विनमेडीकेअर )  1-4 टेबलेट दिन में 3-4 बार मुंह में रख कर चबायें । गर्भावस्था के दौरान हृदय जलन में।

3. डायोवोल फोर्ट टे . ( Diovol Forte tab . ) ( वैलेसी )  1-2 टेबलेट भोजन के मध्य एवं सोते समय मुख में रख कर चबायें ।

4. डिसीलोक्स एम पी एस ( Disilox MPS ) ( स्टेडमेड )  → 1-2 चम्मच आवश्यकतानुसार । 


5. गेवीस्कोन ( Gaviscon ) ( रिकेट कोल्मन )  1-2 टेबलेट भोजन के बाद एवं सोते समय चूसें । 

6. लोगासिड ( Logascid ) ( Te आईडियल )  1-2 टेबलेट भोजन के साथ एवं सोते समय चूसें ।

7. मेटाड्रेट ( Metadrate ) ( फार्मानोवा )  1 टेबलेट दिन में 3 बार । 

8. पीएफटी ( PFT ) ( निकोलस )  1-2 टेबलेट दिन में 2-3 बार भोजन के बाद चूसें ।

9. रेल्सर टेबलेट ( Relcer Tab . ) ( ग्लीनमार्क )  1-2 गोली भोजन के मध्य अथवा भोजन के बाद मुँह में रखकर चबायें । 

10. सिमेको ( Simeco ) ( वीथ )  1-2 टेबलेट दिन में 4 बार । 

11. टालसिल फोर्ट ( Talsil forte ) ( जगत )  1-2 टेबलेट भोजन के मध्य एवं सोते समय मुह में रखकर चबायें ।

12. विस्को टेबलेट ( Visco Tab . ) ( एरिस्टो ) 1-2 टेबलेट दिन में 2-3 बार।


हृदय-जलन ' में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट पेय


1. डायजीन जैल ( Digene gel ) ( बूट्स )  1-2 चम्मच दिन में 4 बार भोजन के बाद ।


2. जेलूसिल ( Gelusil ) ( वार्नर )  3-6 चम्मच हर खाने के बाद ।

3.एनीटांल ( Anital ) ( टीटीके )  5-10 मि . ली . हर 1 / 2-1 घण्टे बाद भोजन के ।

4. डायोवोल फोर्ट डी जी एल ( Diovol Forte DGL )  1-2 चम्मच दिन में 2-3 बार भोजन के मध्य एवं सोते समय । 
- यह सीरप एवं सस्पेन्शन रूप में आता है ।

5. डिसीलोक्स एम . पी . एस . लिक्विड ( Disilox MPS Liquid ) ( स्टेमेड )  5-10 मि . ली . भोजन के 1/2 से 1 घण्टे बाद । 

6. लोगासिड Faraas . ( Logacid Liquid ) ( एस्ट्राआईडियल )  1-2 चम्मच दिन में 3 बार भोजन के मध्य एवं सोते समय । 

7. मेटाड्रेट सस्पेन्शन ( Metadrate Susp ) ( फार्मानोवा )  2 चम्मच दिन में 3 बार ।

 • ' इपीलेप्सी के रोगी में प्रयोग न करें ।

8. मूकेन सस्पेन्शन ( Mucaine Susp . ) ( वीथ कं . )  1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन से 15 मिनट पूर्व । 

9. पालीक्रोल फोर्ट जैल ( Polycrol Forte Gel ) ( निकोलस )  1-2 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के बाद ।

10. रेल्सर जैल ( Relcer Gel ) ( ग्लीन- मार्क )  2 से 3 चम्मच दिन में 3-4 बार भोजन के बीच । या बाद को दें ।

      

हृदय-जलन ' में लगाने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन -


1.बीकोजाइम ( रोशे ) बीकोजाइम सी फोर्ट  2 मि . ली . मांस में रोजाना 5 दिन । साथ ही- इसी की 1-2 टेबलेट दिन में 2-3 बार दें । 

2. हिपेटेक्स ' टी ' ( Hepatex - T ) ( ईवान्श )  2 मि . ली . मांस में रोजाना  लगावें । 

3. पेरीनार्म ( Perinorm ) ( इटका )  2 मि . ली . मांस में । 


4. मेक्सीरोन ( Maxeron ) ( वैलेसी )  2 मि . ली . मांस या नस में दिन में 2-3 बार ।

5. रेगलान ( Reglan ) ( सीएफएल ) 2 मि . ली . मांस या नस में ।


 विशिष्ट कम्बीनेशन थेरापी



1. डायोवॉल ( कार्टर वालेस ) 1 टेबलेट, एक्वीब्रोम ( ला मेडिका ) 1 टेबलेट । यह एक मात्रा है । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार जल से । 

2. टाका जाइम ( पी . डी . ) 1 चम्मच , न्यूट्रैडोना ( निकोलस ) 1/2 चम्मच । दोनों पाउडरों को मिलाकर पानी के साथ दिन में 2 बार ऐसी 1 मात्रा दें ।

3. एलूसीनॉल ( फ्रेन्को- इण्डियन ) 1 टेबलेट , न्यूट्रालॉन ( निकोलस ) 1 टेबलेट । ऐसी 1 मात्रा दिन में 2 बार जल से दें ।

 

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