अण्डकोष प्रदाह / अण्ड शोथ ओर्काइटिस [ Orchitis ] ~ रोग के कारण, रोग के लक्षण एवं कारगर औषधि चिकित्सा? Orchitis [Orchitis] ~ Causes of disease, symptoms of disease and effective drug therapy?

अण्डकोष प्रदाह / अण्ड शोथ ओर्काइटिस [ Orchitis ] 


अण्डकोष प्रदाह / अण्ड शोथ ओर्काइटिस [ Orchitis ] ~ रोग के कारण, रोग के लक्षण एवं कारगर औषधि चिकित्सा?  Orchitis [Orchitis] ~ Causes of disease, symptoms of disease and effective drug therapy?
अण्डकोष प्रदाह / अण्ड शोथ ओर्काइटिस [ Orchitis ] 

नाम

वृषण शोथ । 

रोग परिचय

इस रोग में अण्ड ( Testicle ) और उसकी आवरक झिल्ली में शोथ( सूजन ) उत्पन्न हो जाता है । जिससे आक्रान्त( उसी स्थान पर ) स्थान पर तीव्र पीड़ा , कठोरता , त्वचा पर लाली एवं चिकनापन दिखायी पड़ता है । कभी - कभी तो असहनीय दर्द होता है ।

रोग के कारण  - 

- मुख्य कारण जीवाणु । 

- प्रोस्टेट ग्रन्थि के रोग । 

- सुजाक के परिणामस्वरूप । 

- टाइफाइड ज्वर के आक्रमण के पश्चात् प्रायः । 

- कनफ्रेड या कनसुआ रोग में । 

- चोट लगना । 

- उपदंश , गठिया , छोटे जोड़ों का दर्द , यकृत दोष , मूत्राशय की पथरी एवं मूत्राशय के रोगों में सम्भव । 

- फाइलेरिया आदि से भी हो सकती है ।


रोग के लक्षण

- प्रथम उरुसन्धियों( फेमोरल जॉइंट ) या ( Groin ) में पीड़ा । 

- थोड़ा - बहुत ज्वर( बुखार ) । 

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- वृषण या उपाण्ड में सूजन फूला हुआ एवं छूने में पीड़ा । 

- वृषण कोष लाल एवं उनमें सूजन । 


- पीड़ा के कारण मितली । 

- रोग प्रायः किशोरों में अधिक । 

- कभी एक कभी दोनों अंडकोषों में सूजन । 

- मूत्र में जलन । 

- पुराने रोग में ज्वर नहीं ।

ध्यान रहे - कई बार कामवासना की अधिकता में वीर्य अपने स्थान से निकलने के लिये गति करता है । यदि वह किसी कारण से न निकल सके तो भी अण्ड कोषों में शोथ ( सूजन ) उत्पन्न हो जाती है ।


• वृषणशोथ की औषधि चिकित्सा  - 

- रोगी को आराम देना चाहिये । 

- वृषण कोष के नीचे कपड़े की मोटी गद्दी रखकर हल्का सा लंगोट( या कोई भी ढीला- ढाला कपड़ा ) बाँधना चाहिये । 

- पीड़ा की स्थिति में गर्म पानी में कपड़ा भिगोकर सिकाई । 

- एवं एस्प्रिन या पैरासिटामोल की 1-1 टे . दिन में 2-3 बार दें । 

- यदि रोग मम्पस( एक प्रकार का संक्रमण ) के कारण हो तो स्टेराइड्स औषधि दें । इसके लिये प्रेडनीसोलोन 5 मि . ग्रा . की 1 टे . दिन में 3 बार 3 दिन तक दें । तत्पश्चात् केवल 1 टे . 3 दिन तक दें , एवं उसके बाद दो दिन तक रोजाना 1/2 - 1/2 टेबलेट दें । 

नोट - प्रेडनीसोलोन के स्थान पर डेल्टाकार्टिल का उपयोग किया जा सकता है ।
 
- कब्ज की स्थति में मैगसल्फ का विरेचन( एक प्रक्रिया जिससे विशेष औषधियो द्वारा पेट को साफ किया जाता है ) । 

- यदि सुजाक के कारण हो तो पेनिसिलीन दें । 

- वृषणों में पीव पड़ने पर ऑपरेशन । 

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- अधिक खराब स्थिति में वृषणों को काटकर निकाल दिया जाता है ।


• वृषणशोथ की मिश्रित औषधि चिकित्सा .

कोडोपायरीन 1 टे . , वैक्ट्रिम 1 टि . , सेप्टीलिन 1 टे . ऐसी 1 मात्रा दिन में 2-3 बार जल से दें । साथ ही स्ट्रेप्टो - पेनिसिलीन 1 / 2-1 ग्राम की सुई मांस में लगावें । 

नोट - साधारण दर्द में नोवाल्जिन या ब्रूफेन 600 की 1 टे . दिन में 2 या 3 बार दें । ग्लसिरीन वेलाडोना में इक्थियोल ( थोड़ा सा ) मिलाकर फोतों पर लगावें । नींद न आने की स्थिति में कम्पोज 1 टे . सोते समय दें । 

- यदि रोग फाइलेरिया के कारण हो तो हेट्रोजान की 2-2 टेबलेट खाने के बाद दें । साथ में दर्द की जगह इक्थियोल - बेलाडोना प्लास्टर लगावें ।

• अनुभूत व्यवस्थापत्र ( Prescribed Medical Prescription ) Rx ~



अण्डकोष प्रदाह / अण्ड शोथ ओर्काइटिस [ Orchitis ] ~ रोग के कारण, रोग के लक्षण एवं कारगर औषधि चिकित्सा?  Orchitis [Orchitis] ~ Causes of disease, symptoms of disease and effective drug therapy?

- इन्जे . बिस्ट्रेपेन ( Inj . Bistrepen ) एलेम्विक - 1/2 ग्राम की सुई मांस में प्रतिदिन ।  

- नोवाल्जिन 1 टेबलेट , सेप्ट्रान 1 टेबलेट , कोल्चिसिण्डोन ( इण्डो फार्मा ) 1 टेबलेट । 

- ऐसी 1 मात्रा दिन में 2-3 बार जल से दें । 

- एल्जिपान ( Algipan ) मरहम अथवा रिलेक्सिल क्रीम वस्त्र पर फैलाकर पीड़ित अण्ड कोष पर बांधे । 

- रोगी को पूर्ण आराम । 

- न्यो - ऑक्टिनम ( बी . नॉल ) 1-2 ड्रेगी जल से दिन में 2-3 बार ।

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