वीर्य प्रमेह / शुक्रमेह स्परमेटोरिया [ Spermatorrhoea ]
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| वीर्य प्रमेह / शुक्रमेह स्परमेटोरिया [ Spermatorrhoea ] |
नाम -
वीर्य स्खलनता , ( धातु स्राव ) ।
परिचय-
इस रोग में पाखाना करते समय जोर लगाकर मल त्याग करने पर मूत्र के साथ पहले अथवा बाद में वीर्य निकल जाता है , वीर्य प्रमेह कहलाता है ।
दूसरे शब्दों में - लैंगिक उत्तेजना के बिना बार - बार वीर्य की अनियन्त्रित निकासी होना शुक्रर्मेह , वीर्यस्खलनता कहलाती है ।
Frequent involuntary escape of the seman without sexual excitement .
रोग के कारण -
- जवानों में आजकल यह रोग अधिक ।
- हस्तमैथुन इसका प्रमुख कारण ।
- कब्ज ( कॉस्टीपेशन )
- अधिक स्त्री सहवास( अधिक शाररिक संबंध बनाना ) ।
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- आहार - विहार के ठीक व्यवस्थित न होने से ।
- दिन भर बेकार बैठे रहने , अधिक सोने से , गुड , शक्कर , मिर्च , खटाई एवं तीखी
वस्तुयें अधिक खाने से ।
- पाचन शक्ति की कमी ।
- सिगरेट , तम्बाकू , भांग , चरस , गांजा , मांस आदि के अधिक सेवन से ।
रोग के लक्षण -
- आलस्य एवं चिन्ता ।
- कमर दर्द ।
- शारीरिक निर्बलता ।
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- काम करने को दिल न चाहना ।
- भोजन की इच्छा न होना ।
- नींद न आना ।
- श्वास - खांसी एवं सिर दर्द ।
- जी मिचलाना ।
- प्यास की अधिकता ।
- रोग बढ़ जाने पर मामूली रगड़ , साइकिल व घोड़े की सवारी एवं स्त्री मात्र ख्याल करते ही वीर्य निकल जाता है ।
प्रमेह रोगी की चिकित्सा विधि -
- कामोत्तेजक वातावरण से बचाकर रचनात्मक कार्यों में स्वयं को व्यस्त रखना ।
- कब्ज को न रहने दें ।
- इस रोग में धातु पौष्टिक औषधियाँ( वे औषधिया जिसमे धातु की मात्रा उपस्थित हो ) कभी न दें । ये कब्ज लाती हैं । साथ ही इनका प्रभाव गर्म होता है ।
- मूल कारण की चिकित्सा ।
- पाचन संस्थान को सबल बनावें ।
- जननेन्द्रिय को अनावश्यक उत्तेजना से बचायें ।
पथ्यापथ्य एवं सहायक व्यवस्था ~
पथ्य - जौ की रोटी बहुत ही उत्तम है । धारोष्ण दूध , गेहूँ , चने , अरहर , शाली चावल , मूंग , कोदों , परवल , एवं कड़वे शाक देना चाहिये । दाल और शाक में सेंधा नमक और काली मिर्च का प्रयोग करें ।
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अपथ्य - घी और दही का सेवन न करें । नया अन्न , शराब , तेल की बनी चीजें , गुड़ , खट्टे पदार्थ , गन्ने का रस आर पेशाब लाने वाली चीजें खाने को नहीं देनी चाहिये ।
याद रखिये- धातु जाना ( वीर्य प्रमेह ) कोई रोग नहीं है । यह एक शारीरक क्रिया है । इससे नपुंसकता नहीं होती ।- धातु स्राव की रोकथाम या बन्द करने की कोई दवा नहीं है । जब रोगी का विवाह हो जाता है तो धातुस्राव से स्वयं ही मुक्ति मिल जाती है ।
....... - रोगियों के विशेष आग्रह करने पर दवा भी देना जरूरी हो जाता है ।
• वीर्य प्रमेह की औषधि चिकित्सा ~
इसकी चिकित्सा स्वप्नदोष के समान की जाती है । जब ' स्वप्नदोष और प्रमेह दूर हो जाते हैं तब वीर्य को गाढ़ा करने वाली ' शक्तिवर्द्धक औषधियाँ दी जाती हैं । जैसे - ' टेन्टेक्स फोर्ट , ' फोर्टेज आदि ।
- इसमें सबसे अधिक व्यवहार( उपयोग ) टिंक्चर बैलाडोना का होता है । प्रारम्भ में 1 सप्ताह तक 10-10 बूंद टिंक्चर बैलाडोना को पानी में मिलाकर दिन में 3 बार देते हैं । लाभ न मिलने पर इसको दो गुनी मात्रा में देते हैं । अथवा जहाँ तक रोगी सहन कर सके ।
- चूने के रंग का धातुस्राव होने पर - इस प्रकार का स्राव वास्तव में प्रोस्टेट ग्रन्थि से निकलता है जिसमें फास्फेट होते हैं । इसके लिये एसिड सोडियम फोस्फेट 1 ग्राम + अमोनियम क्लोराइड 2/3 ग्राम इन दोनों को 1 कप जल में घोल कर पिला दें । यह 1 खुराक है । ऐसी 3 खुराक दिन में देनी चाहिये ।
नोट- इससे फास्फेट निकलना बंद हो जाते हैं ।
याद रखिये -
विटामिन ' सी ' ( सीलिन - ग्लैक्सो ) 500 मि . ग्रा . की 5 या 6 टेबलेट, प्रतिदिन सेवन कराने से मूत्र की प्रतिक्रिया अम्लीय ( Acidie ) हो जाती है जिससे फास्फेट का बनना बंद हो जाता है।
वीर्य प्रमेह में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट टेबलेट ~
1. कैस्टोफीन टेबलेट ( Castophene Tablet ) - 1-2 टेबलेट रात सोते समय गर्म किये मीठे दूध के साथ। कब्ज की स्थिति में ।
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2. निओ ( Neo ) चरक फार्मास्युटिकल्स - 1-1 टेबलेट दिन में 3 बार दें ।
3. स्पीमेन फोर्ट ( हिमालय ड्रग्स ) - 2-2 टेबलेट दिन में 3 बार खाने के बाद दें ।
4. बी . एच . पिल्स ( B.H. Pills ) गैम्बैसी ' - 2-2 टेबलेट दिन में 3 बार भोजन के बाद दें ।
नोट - पोटाश ब्रोमाइड 1 ग्राम टे . बैलाडोना 5 बूंद , टे . हायोसायामस 2 मि . ली . , एक्वा सिनामम 30 मि . ली . । यह 1 खुराक है । ऐसी 1 खुराक दिन में 3 बार दें ।
धातु स्राव में लगाने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेन्ट इन्जेक्शन ~
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1. पैरेण्ड्रान ( सीबा ) ( Parandrin ) - 10-25 मि.ग्रा . ( प्रति मि . ली . ) सप्ताह में 2 बार मांस में लगावें ।
2. कैल्सीब्रोनेट ( Calcibronate ) नि . ' सैण्डोज कं . - 10 मि . ली . सप्ताह में 2 बार नस में लगावें ।
3. इर्गोटीन साइट्रेट - 1/32 - 1/8 ग्रेन डिस्टिल्ड वाटर में घोलकर त्वचा के नीचे लगावें ।
4. फास्फोटोन - योहिम्बीन ( सिपला ) - 1 मि . ली . हफ्ते में 2 बार दें ।
• धातुस्राव की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा ~
1. प्रोस्टेट ग्रन्थि वृद्धि के कारण रोग - सीमेन फोर्ट ( हिमालय कं . ) की 1-2 टेबलेट दिन में 3 बार दें । रोग की बढ़ी हुई अवस्था में स्पीमेन फोर्ट ।
2. फंगस के कारण रोग - फ्ले जिल ( रेन - पुलेन्क ) की 1-1 टेबलेट दिन में 3 बार जल से दें ।
• धातु स्राव को मिश्रित औषधि चिकित्सा ~
1 . फोर्टज ( एलासिन ) 1 टे . , टेन्टेक्स फोटे ( हिमालय ड्रग्स ) 1 टे . । ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 3 बार दें ।
2 . पाल रिवन फोर्ट ( Pall Rywyn forte ) 1 टे . , फोर्टेज ( एलार्सिन ) 1 टे.। ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 3 बार गर्म दूध के साथ दें ।
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