खून की कमी ( Anemia ) क्या है ?
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What is anemia? BY - md uthman |
खुन की कमी या रक्ताल्पता एक ऐसी विशेष शारीरिक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति के रक्त में हेमोग्लोबिन ( hemoglobin ) की मात्रा अर्थात लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य से कम हो जाती है ।
हेमोग्लोबिन वास्तव में लौह युक्त प्रोटीन होता है । मानव रक्त की लाल रक्त कोशिकाओं में यह प्रवेश करके उन्हें लाल रंग प्रदान करता है । हेमोग्लोबिन की वजह से रक्त आक्सीजनयुक्त होने में सक्षम हो पाता है ।
प्रत्येक मानव में हेमोग्लोबिन का एक निश्चित स्तर होता है । पुरुषों में हेमोग्लोबिन का औसत प्रति डेसीलीटर 15 ग्राम होता है तथा स्त्रियों में यह प्रति डेसीलीटर 13.5 ग्राम होता है ।
औसत मान से यदि हेमोग्लोबिन 2.5 अथवा 3 ग्राम प्रति डेसीलीटर कम हो जाती है तो यह कहा जाता है इस व्यक्ति में खून की कमी हो गई है । बालिग पुरुषों का मध्यमान स्त्रियों तथा बच्चों से अधिक होता है ।
रक्ताल्पता का पता लगाने के लिये रक्त में तीन चीजों की सांद्रता का पता लगाना पड़ता है । ये हैं - हेमोग्लोबिन, रक्त कोशिकाओं की संख्या तथा हेमाटोक्रिट । अगर तीनों चीजों का औसत सामान्य स्तर से नीचे जाये तो वह व्यक्ति रक्ताल्पता का शिकार ( anemic ) माना जायेगा ।
इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं । इसके मुख्य कारण ये हैं -
( i ) त्रुटिपूर्ण रक्त की रचना ,
( ii ) कोशिकाओं का नष्ट होना व
( iii ) शरीर से बहुत सारा खून बह जाना ।
इसके अलावा ऐसी कई शारीरिक गड़बड़ियां होती हैं जिनकी वजह से विभिन्न किस्म की रक्ताल्पता हो सकती है । कुछ विशेष किस्म की रक्ताल्पतायें ये हैं -
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| By - Diana grib |
( i ) माइक्रोसाइटिक रक्ताल्पता ( लाल कोशिकायें अपने सामान्य आकार से छोटे आकार की हों ) ,
( i ) माक्रोसाइटिक रक्ताल्पता ( यदि लाल कोशिकायें सामान्य आकार से बड़े आकार की हैं ) ,
( iii ) नार्मोसाइटिक रक्ताल्पता ( यदि लाल कोशिकायें सामान्य आकार की हैं ) ,
( iv ) हाइपोक्रोमिक रक्ताल्पता ( यदि कोशिकाओं में बहुत कम हेमोग्लोबिन है ) । अचानक अधिक मात्रा में रक्त स्राव होने से पैदा हुई रक्ताल्पता आमतौर पर होर्मोसाइटिक होती है ।
लाल रक्त कोशिकाओं का परिसंचरण में औसत जीवन 120 दिन का होता है । एक स्वस्थ व्यक्ति के रक्त परिसंचरण में हर दिन प्रति माइक्रोलीटर 45000 लाल कोशिकायें निकल जाती हैं । इनकी जगह हड्डी की मज्जा से प्राप्त नयी कोशिकाओं द्वारा ले ली जाती है ।
रक्ताल्पता उस समय होती है जब रक्त परिसंचरण से निकल जाने वाली कोशिकाओं की संख्या उनकी जगह लेने वाली कोशिकाओं से अधिक होती है अथवा जब लाल कोशिकाओं के उत्पादन को क्षति पहुंचती है अथवा परिसंचरण में कोशिकाओं को पहुंचाने में मज्जा निष्प्रभावी हो जाती है ।
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| Anemia test, by - CDC Global |
लाल रक्त कोशिकाओं के निरंतर बढते हुये विनाश से हुई रक्ताल्पता को हेमोलेटिक रक्ताल्पता कहते हैं । विष के खाने से , एक विशेष प्रकार का मलेरिया होने से , अनुचित भोजन से , एलर्जी होने से या किसी आनुवंशिक स्थिति से यह रक्ताल्पता हो जाती है ।
लौह तत्त्व की कमी के कारण होने वाली रक्ताल्पता सामान्य रूप से महिलाओं में होती है । विशेषकर यह स्थिति गर्भकाल में होती है क्योंकि मां को इस अवधि में गर्भ में स्थित बच्चे की लौह पूर्ति करनी पड़ती है । ज्यादा दिनों तक मासिकधर्म होते रहने से भी रक्ताल्पता हो सकती है ।
रक्ताल्पता के अंतर्गत स्पष्ट लक्षण चक्कर आना , सांस रुकना , त्वचा पीली पड़ जाना तथा भूख कम लगना आदि होते हैं ।
इस बीमारी का इलाज करने के लिये डाक्टर इसके कारण का इलाज करते हैं । कई बार इसका इलाज भोजन में विटामिन तथा आइरन की गोलियां शामिल करके किया जाता है ।
टोक्सिक तत्त्वों को हटा कर औषधियों द्वारा गड़बड़ी को ठीक करके अथवा संचारण द्वारा रक्त के आयतन को पुनः प्राप्त करके भी इसका इलाज किया जा सकता है ।
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