विभिन्न मानसिक रोग क्या हैं ?
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| mental illnesses? BY - Alachua County |
मानसिक रोग का अर्थ है मस्तिष्क की बीमारी । अन्य रोगियों की भांति मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को भी विशेष इलाज की आवश्यकता होती है ।
मानसिक और भावात्मक विकारों को रोकना तथा रोगी की बीमारी का पता लगाना , उसका इलाज करना तथा उसे पुनः सही हालत में लाना मानसिक स्वास्थ्य के अन्तर्गत आते हैं ।
मानसिक रोग दो प्रकार के होते हैं : जैविक तथा क्रियात्मक । जैविक मानसिक रोग मस्तिष्क को क्षति पहुंचने से होते हैं । ये रोग तेज ज्वर , दुर्घटना अथवा शरीर द्वारा पैदा किये जाने वाले हार्मोस की मात्रा में परिवर्तन में पैदा होते हैं ।
जैविक मानसिक रोग कई प्रकार के होते हैं । एपिलेप्सी ( epilepsy ) एक ऐसी बीमारी है जो अक्सर क्षतिग्रस्त मस्तिष्क के कारण होती हैं , लेकिन यह स्वस्थ लोगों को भी हो जाती है । सामान्य व्यक्ति को होने वाली एपिलेप्सी को इडियोपेथिक कहते है ।
यह मस्तिष्क के ऊतकों में उन सूक्ष्म स्कार द्वारा हो सकती है जो सूक्ष्मदर्शी से ही देखे जा सकते हैं । मस्तिष्क रक्त स्राव तथा थाम्बोसिस होने पर मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति क्षतिग्रस्त हो जाती है ।
प्रमस्तिष्कीय फालिज और स्तब्ध कर देने वाले पक्षाघात का कारण बचपन में मस्तिष्क में हुई क्षति होती है । मांसपेशियों तथा रक्त धमनियों के कठोर होने से मस्तिष्क के ऊतकों की क्षति हो जाती है ।
मस्तिष्क के रसायनों में गड़बड़ी होने से कम्पवायु का रोग हो जाता है । अन्य जैविक मानसिक विकार मस्तिष्क में चोट लगने से होते हैं । अमनेसिया - रोग में याददाश्त कम हो जाती है । विचार और संचार के विकारों को अफासिआ ( aphasia ) कहते हैं ।
अधिकांश मानसिक रोग मस्तिष्क की क्रियात्मक गड़बड़ी के कारण होते हैं । कार्यप्रणाली की गड़बड़ी के फलस्वरूप व्यक्ति का मस्तिष्क बिना किसी प्रत्यक्ष क्षति के रोगग्रस्त हो जाता है ।
इन विकारों को मुख्य रूप गे दो समूहों में बांटा जाता है । उन दोनों में अधिक आम रोग न्यूरोसिस या मानसिक विक्षिप्ति है । विक्षिप्त एक हल्का भावात्मक विकार है । किसी विक्षिप्त व्यक्ति के विचारों अथवा क्रियाओं से उसके सम्बंध अन्य व्यक्तियों से बिगड़ सकते हैं अथवा उसके स्वयं के जीवन से खुशी समाप्त हो सकती है ।
विक्षिप्ति की कई एक सी किस्में होती हैं । उनमें चिंता स्थिति , भावोन्मादी प्रतिक्रियाओं व मनोग्रस्ति विषयक बाध्यकारी गड़बड़ियों सम्बन्धी विक्षिप्ति शामिल है ।
चिंता विक्षिप्ति में रोगी असामान्य प्रकार के भय , जैसे , मृत्यु , कुछ खास स्थानों अथवा व्यक्तियों के भय से ग्रस्त हो जाता है । कभी - कभी इन डरों को फोबिया भी कहते हैं ।
फोबिया किसी भी व्यक्ति के जीवन को गम्भीर रूप से परेशान कर सकता है । इसके कुछ आम उदाहरणों में क्लाउस्ट्रोफोबिया ( बंद स्थानों के प्रति भय ) तथा आक्रोफोबिया ( ऊंचाइयों के प्रति भय ) शामिल है । भावोन्माद ( hysteria ) के शारीरिक लक्षण होते हैं जिनमें बिना किसी शारीरिक कारण के पक्षाघात शामिल है ।
मनोगस्ति विषयक बाध्यता विक्षिप्ति में रोगी में कुछ खास किस्म की क्रियायें करने की बाध्यकारी इच्छा रहती है । इस तरह के रोगी एक ही काम बार - बार करने में अपना समय नष्ट करते रहते हैं । चरित्र सम्बंधी विक्षिप्ति में रोगी निष्क्रियता , आक्रामकता , मूडीपन व उमंग का शिकार हो जाता है ।
दूसरे प्रकार के क्रियात्मक विकारों को मनोविक्षिप्ति कहते हैं । विक्षिप्त व्यक्ति कल्पना और यथार्थ के बीच अंतर बता सकता है लेकिन मनोविक्षिप्त का शिकार व्यक्ति कल्पित घटनाओं का यथार्थ की तरह स्वीकार कर लेता है ।
मनोविक्षिप्ति रोग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं : -
- चक्र मनोविक्षिप्ति ( manic - depressive psy chosis ) तथा,
- सीजोफ्रेनिया मनोविक्षिप्ति ।
चक्र मनोविक्षिप्ति में मरीज को उत्तेजना , उमंग , दुख , उदासी व निराशा की अनुभूति होती है । इसे ठीक करना अथवा इससे राहत देना औषधियों से सम्भव हो सकता है ।
इससे स्पष्ट है कि मस्तिष्क में होने वाले कुछ रासायनिक परिवर्तन सम्भवतः इस बीमारी के मुख्य कारण होते हैं । लेकिन अवसाद किसी सदमे का परिणाम भी हो सकता है - जैसे - किसी अच्छे मित्र की मृत्यु ।
सीजोफ्रेनिया में व्यक्ति का सम्पूर्ण मस्तिष्क तथा व्यक्तित्व बिखर जाता है । सीजोफ्रेनिया का अर्थ ही होता है - " मस्तिष्क भंग " । केटेलोनिक ( catalonic ) सीजोफ्रेनिया में रोगी पूरी तरह निष्क्रिय तथा गतिहीन हो जाता है ।
हो सकता है कि वह यथार्थ को समझने की शक्ति खो बैठे । हेबेफ्रेनिक ( hebephrenic ) सीजोफ्रेनिया में रोगी विचित्र तरीके से बात करना तथा व्यवहार करना शुरू कर देता है । उसका व्यवहार बचकाना हो जाता है ।
पेरेनोइड ( paranoid ) सीजोफ्रेनिया में रोगी यह सोचता है कि सभी लोग उसे सताना चाहते हैं । तब वह अपनी इसी समझ के अनुसार व्यवहार करता है ।
मानसिक रोग के उपचार के लिये विशेषज्ञों में मतभेद भी हो सकता है । मानसिक रोगों के उपचार में कुछ डाक्टर विशेषज्ञ होते हैं , उन डाक्टरों को मनश्चिकित्सक कहते हैं ।
मानसिक रोगों को ठीक करने के लिये इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्साओं को साइकोथेरेपी ( psychotherapy ) , समूह व व्यवहार थेरेपी ( group & behaviour therapy ) , औषधि थेरेपी ( drug therapy ) तथा इलेक्ट्रो - कन्वल्सिव थेरेपी ( electro convulsive therapy ) कहते है ।
List of General Knowledge ( GK ) ~


