यकृत का सिरोसिस ( cirrhosis ) क्या है ? What is liver cirrhosis?

 यकृत का सिरोसिस ( cirrhosis ) क्या है ? 

यकृत का सिरोसिस ( cirrhosis ) क्या है ? What is liver cirrhosis?

What is liver ( alcoholic )cirrhosis? BY - BruceBlaus


सिरोसिस यकृत की एक ऐसी बीमारी है जो यकृत के स्पंजी ऊतकों को घायल तथा बीमार कर देती है । यह बीमारी अत्यधिक शराब पीने , दूषित भोजन करने , विषैले धुएं , यकृत शोथ अथवा यकृत में सूजन आ जाने से हो सकती है । 

इस रोग से यकृत बेकार हो सकता है तथा प्रोटीन बनाना व रक्त शुद्ध करना बंद कर सकता है । सर्वाधिक सामान्य प्रकार के सिरोसिस को लाएनेक के सिरोसिस ( Laennec's Cirrhosis ) के नाम से जाना जाता है । 

वैसे तो यह बीमारी कभी भी हो सकती है लेकिन आमतौर पर यह 40 से 60 वर्ष उम्रवाले व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करती है । यह महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में अधिक पाई जाती है । 

इस रोग के आरम्भ होने पर यकृत की चर्बी में असामान्य वृद्धि होने लगती है । शीघ्र ही यकृत का क्षरण होने लगता है और अंत में केवल थोड़ी - सी चर्बी ही शेष रह जाती है । 

सिरोसिस यकृत को जानेवाली रक्तवाहिनियों को जाम कर सकता है । जिससे अन्दरूनी रक्त - स्राव होने की सम्भावना रहती है । सिरोसिस से पीड़ित कई लोग कमजोर हो जाते हैं तथा उनका वजन घट जाता है । कुछ रोगियों के पेट में शारीरिक तरल पदार्थों की बहुतायत के कारण सूजन आ जाती है । रोगी की त्वचा व आंखें पीली भी पड़ सकती हैं । 

यकृत का सिरोसिस ( cirrhosis ) क्या है ? What is liver cirrhosis?
Liver progression for non-alcoholic fatty liver disease, by - Signimu


सिरोसिस कई किस्म का होता है । टोक्सिनों में वाइरस संक्रमण से होने वाले सिरोसिस को पोस्ट्नेक्रोटी ( Postnecroti ) सिरोसिस कहते हैं । 

पिगमेंटरी ( Pigmentary ) सिरोसिस उस समय होता है जब यकृत कोशिकाओं में लोहा सामान्य स्तर से अधिक जमा हो जाता है । ऐसा रक्त - संचरण में गड़बड़ी , लीवर में अधिक लोहे के कारण या खून देने पर लोहे के जमा होने से होता है । 

विल्सन सिरोसिस में यकृत के अन्दर मौजूद तांबे की मात्रा बढ़ जाती है । सिफिलिटिक सिरोसिस के लक्षण यकृत में बड़े - बड़े मुलायम घावों से जाने जा सकते हैं जो ऊतकों को नष्ट करते हैं और अंततः घायल ऊतकों का ढेर छोड़ देती हैं ।

सिरोसिस से मुख्य शिरा ( portal vein ) मे उच्च रक्तचाप होने की सम्भावना रहती है जिससे तिल्ली , यकृत , भोजन नलिका अथवा अंतड़ी में रक्त - स्राव हो सकता है । 

ये बीमारियां औषधियों व उपयुक्त भोजन लेने तथा शराब त्याग देने से आरंभिक स्थिति में ठीक की जा सकती हैं । इलाज न होने की स्थिति में सिरोसिस से मुर्छा आती है तथा अंततः मृत्यु हो जाती है ।


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