ई . एस . पी . क्या है ? E. s . P. What is it ?

 ई . एस . पी . क्या है ? 

ई . एस . पी . क्या है ? E. s . P. What is it ?

ई . एस . पी . (  एक्स्ट्रा सेंसरी परसेप्शन ) ( extra sensory perception ) का संक्षिप्त रूप है । इसका अर्थ होता है इंद्रियातीत ज्ञान । सामान्यतः अपने परिवेश को जानने के लिए हम आंख , कान , जीभ , नाक व त्वचा जैसी पांच इंद्रियों का प्रयोग करते हैं । 

इन संवेगी यन्त्रों की सहायता से हम देखने , सुनने , स्वाद , गंध और स्पर्श का अनुभव करत हैं । ई . एस . पी . का अर्थ है - अपने परिवेश के विषय में कुछ ऐसी सूचनायें प्राप्त करना जिनके लिये इन पांच इंद्रियों का प्रयोग न किया गया हो । 

ई . एस . पी . के कुछ उदाहरणों में किसी दूसरे के मन की बात जानना , भविष्य की बात जानना अथवा मीलों दूर हो रही किसी घटना के बारे में जानना शामिल है । कुछ लोगों में ऐसी विशेष क्षमता होती है जो इन सबका पता लगा सकते हैं । 

अभी तक वैज्ञानिक ई . एस . पी के विषय में कुछ ठोस तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाये हैं । अगर इसका अस्तित्व है भी तो वैज्ञानिकों को इसका ज्ञान नहीं है कि यह क्षमता कैसे काम करती है । 

अधिकांश वैज्ञानिकों का विश्वास है कि ई . एस . पी . का होना सत्य हो सकता है लेकिन इसे बिना सन्देह अभी भी सिद्ध नहीं किया जा सका है । 

इंद्रियातीत के बोध के क्षेत्र में मुख्यतः 4 मूलभूत प्रयोग किये जाते हैं । ये प्रयोग हैं - टेलीपेथी , क्लेयरवायन्स , प्रोकाग्नीशन तथा साइकोकिनेसिस । ई . एस . पी . के शोधकर्ता एक विशेष प्रकार की ताश की गड्डी का प्रयोग करते हैं । 

इस गड्डी में 25 ताश होते हैं जिन पर कुछ विशेष किस्म के चिन्ह जैसे कट्टा , गोला , सितारा , लहरदार रेखायें ता वर्ग इत्यादि बने होते हैं ( नीचे का चित्र देखें ) विगत 50 वर्षों से ड्यूक विश्वविद्यालय ( नार्थ केरोलिना ) के प्रोफेसर जे.बी. रिने ने ई . एस . पी . पर अनेक प्रयोग किये हैं । 

ई . एस . पी . क्या है ? E. s . P. What is it ?

टेलीपेथी के प्रयोगों में शोधकर्ता ताशों का अनुमान लगा कर प्रयोग कर रहे व्यक्ति के मस्तिष्क का अध्ययन करने की कोशिश करता है । एक व्यक्ति द्वारा बिना किसी प्रत्यक्ष माध्यम के दूसरे व्यक्ति तक अपने विचारों , अनुभतियों तथा ज्ञान को प्रेषित करने की क्रियायें टेलीपेथी के अन्तर्गत आती हैं ।

किसी व्यक्ति को टेलीपेथिक मदद के बिना किसी घटना या व्यक्ति के विषय में मानसिक रूप से जान लेने की स्थिति को क्लेयरवायंस कहते हैं । क्लेयरवायस परीक्षणों में ताशों को बिना देखे हये विभिन्न तरीकों से पहचाना जाता है । 

यदि औसत व्यक्ति द्वारा लगाये जा सकने वाले सही अनुमानों की संख्या से किसी व्यक्ति के सही अनुमानों की संख्या से किसी व्यक्ति के सही अनुमानों की संख्या अधिक हो जाती है तो यह माना जाता है कि उस व्यक्ति में ई. एस . पी . का अस्तित्व है । 

ई . एस . पी . क्या है ? E. s . P. What is it ?
Mr. Zirkle and Miss Ownbey ESP experiment.

किसी घटना के घटित होने से पहले टेलीपेथी अथवा क्लेयरवायन्स द्वारा उसकी जानकारी प्राप्त कर लेना प्रीकोगनीशन कहलाती है । इस प्रकार के परीक्षणों में ताशों तथा पासों का प्रयोग करके घटित होने से पहले घटनाओं के क्रम का पूर्वानुमान लगाना होता है । 

भौतिक वस्तुओं पर मानसिक नियंत्रण करने को साइकोकिनेसिस कहते हैं । उदाहरण स्वरूप सिक्का उछालते समय कोई व्यक्ति अगर चित पर अपनी इच्छा - शक्ति को केन्द्रित कर दे और सिक्का चित ही गिरे तो इसे साइकोकिनेसिस कहेंगे । 

वैज्ञानिक इस परिघटना का अध्ययन करते रहे हैं क्योंकि वे इसके द्वारा पूर्वानुमान की अनेकों सम्भावनायें देखते हैं । ई . एस . पी . से युक्त व्यक्ति भविष्य में होने वाले युद्धों , कीमती खजानों का सही स्थान तथा दूसरी घटनाओं के घटित होने की पूर्वघोषणा कर सकता है ।


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