कभी - कभी मानसिक रोगियों को बिजली का झटका क्यों दिया जाता है ? Why are electric shock sometimes given to mental patients?

 कभी - कभी मानसिक रोगियों को बिजली का झटका क्यों दिया जाता है ?  

By - BruceBlaus

कुछ खास मानसिक रोगों का उपचार करने के लिए विद्युत धारा के झटके देकर इलाज किया जाता है । इस पद्धति को इलेक्ट्रोशॉक थैरेपी कहते हैं । यह तरीका आमतौर पर तीव्र अंतः जात ( endogenous ) अवसादों तथा स्कीजोफ्रेनिया रोग की कुछ किस्मों के इलाज में प्रयोग किया जाता है । इस थैरेपी का प्रभाव किस प्रकार पड़ता है , यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है । 

मानसिक रोगों का इलाज करने के लिए पहली बार 1938 में रोम में यू सेरलेट्टी ( U. Cerletti ) तथा एल बिनी ( L. Bini ) ने इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थैरेपी का प्रयोग किया था । इसके बाद इसका व्यापक प्रयोग उन्मादग्रस्त अवसाद ( विक्षिप्तता ) तथा विभिन्न किस्म के अन्य अवसादों के इलाज के लिए होने लगा । 

इलेक्ट्रोशॉक थैरेपी में मरीज के सिर पर दो इलेक्ट्रोड उपयुक्त स्थिति में लगाए जाते हैं तथा 50 से 60 हर्ट्ज की प्रत्यावर्ती धारा को इन इलेक्ट्रोडों से 0.1 सेकंड तक गुजारा जाता है ।

इस तकनीक में यद्यपि बहुत सी विभिन्नताएं (types) आती रही हैं , लेकिन इसका सिद्धांत वही है । विद्युत धारा के गुजरने से चेतना में तुरंत ही ठहराव आ जाता है और व्याक्षोभ ( Ferment ) का दौरा पैदा होता है ।

2 से 6 सफ्ताह तक की अवधि तक इलेक्ट्रोकन्वल्सिव थैरेपी सप्ताह में तीन बार की जाती है । कुछ गंभीर मामलों में डाक्टर इस थैरेपी का दिन में तीन बार भी प्रयोग करते हैं । 

इलेक्ट्रोशॉक थैरेपी से गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं । इसलिए इसका प्रयोग केवल कुछ चुने हुए मरीजों पर बेहद कुशलता और उपयुक्त निर्णय के बाद किया जाता है । यद्यपि मानसिक रोगों के उपचार में यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण सिद्ध हुई है । 

लेकिन कुछ मामलों में इसका कोई असर नहीं होता और कभी - कभी तो यह रोग को और भी बिगाड़ देती है ।


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