जनन नियंत्रण क्या है ?
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| Birth Control by Nick Youngson |
जब मानव शरीर की एक शुक्राणु कोशिका महिला के शरीर में एक अंड कोशिका संसेचित कर देती है तो वह महिला गर्भवती हो जाती है । उसके गर्भ के अन्दर एक शिशु विकसित हो जाता है ।
यदि कोई पुरुष अथवा महिला इस प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं तो वे जनन नियंत्रण अथवा गर्भ निरोध विधियों का प्रयोग कर सकते हैं । गर्भ निरोध विधियां उन दम्पतियों द्वारा प्रयोग की जाती हैं जो गर्भाधान को रोकना चाहते हैं । गर्भ को प्रभावी ढंग से रोकने की कई विधियां हैं ।
इन तरीकों को पांच वर्गों में निम्न प्रकार बांटा जा सकता है : -
( i ) प्राकृतिक तरीके ,
( ii ) बाधा पहुंचाने के तरीके
( iii ) अंतरगर्भीय उपकरण
( iv ) खाने वाले गर्भ निरोधक तथा नसबंदी ।
( i ) प्राकृतिक तरीके : - जनन नियंत्रण के दो प्राकृतिक तरीकों में से एक सुरक्षित अवधि से सामंजस्य बैठाना तथा दूसरा मैथुन भंग करना है ।
28 दिन के नियमित रजो चक्र ( Menstrual cycle ) वाली महिलाओं के लिए डिबकरण ( मासिक धर्म की शुरुआत के 10 दिन पश्चात के अनुमानित समय के तीन दिन पहले व तीन दिन बाद सम्भोग न करना जन्म नियंत्रण का सफल तरीका है ।
लेकिन यदि किसी महिला का रजो चक्र सम्पूर्ण नियमितता से न होकर 26 से 31 दिनों के बीच बदलता रहता है तो प्रति चक्र केवल मासिक धर्म शुरू होने के 12 वें दिन से 18 वें दिन तक संभोग से दूर रहना चाहिए ।
दूसरा प्राकृतिक तरीका मैथुन भंग करने का है । इससे मौन समागम के दौरान पुरुष द्वारा वीर्यपात से पहले संभोग को रोक दिया जाता है । लेकिन इस तरीके में गर्भाधान का काफी भय रहता है ।
( ii ) बाधा डालने के तरीके : - बाधा डालने के गर्भ निरोधक तरीकों में प्राणशक्ति वाले शुक्राणु को योनि में घुसने से अथवा गर्भाशय में पहुंचने से रोक दिया जाता है ताकि वह डिम्बवाही नली में तैर न सके और डिब को संसेचित न कर सके ।
इन तरीकों में पुरुष द्वारा कण्डोम का प्रयोग , महिलाओं द्वारा डायफ्राम तथा यौनि रासायनिक गर्भ निरोधक का प्रयोग शामिल है । कण्डोम का प्रयोग गर्भ निरोध का विश्वसनीय तरीका है । यह शुक्राणुओं को योनि में प्रवेश करने से रोक देता है ।
डायफ्राम भी जन्म नियंत्रण का काफी प्रभावशाली तरीका है । यह शुक्राणुओं को गर्भाशय तक नहीं पहुंचने देता । योनि में इस्तेमाल किए जाने वाले रासायनिक गर्भ निरोधकों में कुछ क्रीमें तथा जेली होती हैं जो शुक्राणुओं को गतिहीन अथवा नष्ट कर देती हैं ।
( iii ) अंतर गर्भीय उपकरण : - विश्व के विभिन्न देशों में अंतर गर्भीय उपकरणों की लगभग अनंत किस्में आज कल मिलती हैं । रिंग , लप , स्पाइरल , कौइल , डालरम शील्ड व कापर ' टी ' इत्यादि इनमें मुख्य हैं ।
ये उपकरण गर्भाशय के द्वार में प्रवेश करके फिट कर दिए जाते हैं । इन उपकरणों के प्रयोग से रक्तस्राव , संक्रमण आदि कुप्रभावों का डर रहता है ।
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| By - LeiaWonder |
( iv ) खाने वाले गर्भनिरोधक : - खाने वाले गर्भनिरोधकों में जन्म नियंत्रण की गोलियां होती हैं जो स्त्री की डिम्ब ग्रंथि से अंडे को बाहर निकलने से रोक देती हैं । इस प्रकार स्त्री गर्भवती नहीं हो पाती ।
इन गोलियों में ओस्ट्रोजन तथा प्रोगेस्टेरोन हारमोन होते हैं । जब रजो चक्र के 21 दिनों के लिए एक - एक गोली खाई जाती है तब ओस्ट्रोजन तथा प्रोगेस्टेरोन हारमोनों का ऊंचा स्तर बना रहता है , जिससे डिम्ब क्षरण नहीं हो पाती और बिना डिम्ब के गर्भाधान नहीं हो सकता ।
( v ) नसबंदी : - यह गर्भ निरोध का अत्यंत प्रभावशाली और स्थायी तरीका है । पुरुष अथवा स्त्री की किसी भी शल्य चिकित्सक द्वारा नसबंदी की जा सकती है ।
पुरुषों में शुक्रवाहिनियों को काटने और बांध देने की शल्य क्रिया करके शुक्राणुओं के अण्डकोषों से निकलने पर रोक लगा दी जाती है ।
महिलाओं में शल्य चिकित्सक अंड कोशिकाओं को गर्भाशय तक पहुंचने से रोकने के लिए डिबवाहिनी नलियों को बंद कर देते हैं । ..
विभित्र गर्भनिरोधक उपायों का उपयोग करके इच्छा अनुसार बच्चे पैदा किए जा सकते हैं तथा दो संतानों के बीच अंतर भी इच्छानुसार रखा जा सकता है ।
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