इलेक्ट्रोएंसफेलोग्राफी ( EEG ) ( Electroencephalography ) क्या है ? What is electroencephalography?

इलेक्ट्रोएंसफेलोग्राफी ( EEG ) ( Electroencephalography ) क्या है ? 

इलेक्ट्रोएंसफेलोग्राफी ( EEG ) ( Electroencephalography ) क्या है ? What is electroencephalography?
( EEG ) ( Electroencephalography ) ,by - Tim Sheerman-Chase 

इलेक्ट्रोएंसफेलोग्राफी ( EEG ) एक ऐसा बायो - मेडीकल ( bio - medical ) प्रक्रम है जो मनुष्यों तथा अन्य जीव जंतुओं के मस्तिष्कों में पैदा होने वाली हल्की से हल्की विद्यत धारा को अंकित करता है । 

इसकी खोज जेना ( जो अब पूर्वी जर्मनी में है ) के हांस बर्गर ने की थी । ई ई जी ने मस्तिष्क रोग के निदान में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है । 

मस्तिष्क में निरंतर ही कम शक्ति वाली विद्युत धारा पैदा होती रहती है । यहां तक कि यह विद्युत धारा नींद और मूर्छा के समय भी पैदा होती रहती है । इन धाराओं को छोटे - छोटे तारों ( इलेक्ट्रोड्स ) का खोपड़ी से सम्पर्क कराकर अंकित किया जा सकता है । 

सामान्य व्यक्ति के मस्तिष्क से निकलने वाली धारायें 100 माइक्रोवोल्ट की विद्युतीय शक्ति रखती हैं । इसलिये इस तरह के अंकन के लिये डाक्टर जिस मशीन का प्रयोग करते हैं उसमें खोपड़ी की सतह पर लगाये जाने वाले 20 ऐसे इलेक्ट्रोड होते हैं जिनके बीच बराबर अंतर होता है तथा -

जिनकी स्थिति अंतर्राष्ट्रीय ई ई जी संघ द्वारा स्वीकृत मानदण्डों के अनुसार निश्चित की जाती है ताकि किये जाने वाले उसी व्यक्ति के अंकनों की पहले वाले अंकनों से तुलना की जा सके । 

इलेक्ट्रोड एक एम्पलीफायर से जुड़े होते हैं जो वोल्टेज की 1000,000 गुना बढ़ा देता है । इसके बाद विद्युत धारा इलेक्ट्रोमेगनेटिक कलम में जाता है तो चार्ट पेपर पर ग्राफ बना देता है। 
इलेक्ट्रोएंसफेलोग्राफी ( EEG ) ( Electroencephalography ) क्या है ? What is electroencephalography?   Tim Sheerman-Chase
EEG Graph, by - Andrii Cherninskyi

एक सामान्य वयस्क व्यक्ति का ई ई जी अंकन लयबद्ध दोलनकारी तरंगों के लगभग 10 हर्ट्ज ( बारबारता की इकाई ) की दर पर दोहराव से होता है । इन तरंगों को अल्फा तरंगें कहते हैं । 

इन लहरों को सबसे अच्छी तरह केन्द्रीय स्नायु तंत्र ( मस्तिष्क ) के पिछवाड़े से उस समय प्राप्त किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति आराम की स्थिति में आंखें बंद किये हुए हो । ये तरंगें आंख खुलते ही या तो गायब हो जाती हैं अथवा उनमें रुकावट आ जाती है । 

सामान्यतः ई ई जी अधिक द्रुत लयबद्ध गति को प्रस्तुत करता है । इसमें बीटा नामक अपेक्षाकृत लघु तरंगें होती हैं जिनका दोहराव 18 से 25 हर्ट्ज होता है , इनका सम्बन्ध मस्तिष्क के संवेदी मोटर अंगों से होता है । 

नींद के दौरान , केन्द्रीय स्नायु तंत्र की कोशिकायें अपेक्षाकृत उच्च वोल्टेज की विद्युत तरंगें पैदा करती हैं लेकिन उनकी बारबारता 2 से 3 हर्ट्ज तक धीमी पड़ जाती है । मूर्छा के दौरान बहुत ही कमजोर तरंगें अंकित होती हैं।

EEG of child in sleep time, by - Jemaleddin Cole 

मस्तिष्क क्षति के स्थानीय हिस्से से निकलने वाली अनियमित धीमी तरंगें ( प्रति सेकंड में एक से तीन तक ) डेल्टा तरंगें कहलाती हैं । 4 और 7 हर्ट्स के बीच बारंबारता वाली लयबद्ध धीमी तरंगों को थीटा तरंगें कहते हैं । 

धीमी तरंगें वयस्कों में असामान्यता का पता बता सकती हैं लेकिन शिशुओं अथवा छोटे बच्चों में नहीं । जब तक बच्चा 8 से 12 साल का नहीं हो जाता तब तक विकसित होते हुये बच्चे का ई ई जी पैटर्न बदलता रहता है । इसी के बाद वयस्क पैटर्न सामने आता है । 

प्रत्येक व्यक्ति का अलग - अलग ई ई जी पैटर्न होता है । लेकिन एक से जुड़वां व्यक्तियों का पैटर्न लगभग एक सा होता है । मस्तिष्क की कार्य शैली को समझने के लिये ई ई जी काफी उपयोगी सिद्ध हुआ है । 

मस्तिष्क की बहुत सी बीमारियों का पता लगाने में ई ई जी से बहुत सहायता मिलती है । मस्तिष्क की असामान्यताओं के बारे में भी ई ई जी से जानकारी मिल सकती है । 

मिरगी ( epilepsy ) तथा असामान्य चयापचय ( metabolic ) सम्बंधी स्थिति का भी ई ई जी द्वारा अध्ययन किया जा सकता है । अगर अध्ययन के दौरान सपाट( blank ) ई ई जी प्राप्त होता है तो उसका अर्थ होगा कि मस्तिष्क की मृत्यु हो चुकी है ।


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