पीलिया ( Jaundice ) का रोग क्या है ?
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| Jaundice patient, by - https://www.myupchar.com/en |
पीलिया यकृत ( liver ) की एक ऐसी बीमारी है जो त्वचा और आंखों को पीला कर देती है । यह रोग तब होता है जब पित्त नामक यकृत द्रव , रक्त में मिल कर त्वचा की आंतरिक परतों में जमा हो जाता है ।
पीलिया के लक्षण दिन के प्रकाश में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं लेकिन कृत्रिम प्रकाश में वे स्पष्ट दिखाई नहीं भी दे सकते हैं । पीले रंग का गहरापन रक्त में पित्त के रंजकों के संकेन्द्रण( Concentration ) , इसकी ऊतकों में विसरण दर( Diffusion rate ) , अवशोषण(Absorption) और संयोगीकरण(Combination) पर निर्भर करता है ।
पित्त के रंजक द्रव्य तंतुओं के द्रव में प्रवेश करते ही उन जगहों पर अधिक शीघ्रता से अवशोषित कर लिये जाते हैं जहां पहले से ही सूजन अथवा त्वचा शोथ( Skin inflammation) का प्रभाव होता है ।
यकृत से निकला पित्त छोटी अंतड़ियों के चर्बी वाले तत्त्व पर हमला करता है तथा उन्हें आंशिक रूप से तोड़ देता है ताकि उन्हें और ज्यादा तेजी से अवशोषित किया जा सके । पित्त के अधिकांश लवण रक्त की धारा द्वारा पुनः अवशोषित कर लिये जाते हैं । लेकिन जो लवण विलोपित( Annihilated )हो जाते हैं वे चेहरे पर लालामी( Redness )लाते हैं ।
लेकिन यदि पित्त रक्त में मिल जाय तो वह यकृत में पुनः चला जाता है तथा यकृत की कोशिकाओं द्वारा वह छोटे - छोटे कणों में तोड़ दिया जाता है जो उत्सर्जन द्वारा शरीर से बाहर आ जाता है ।
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| person suffering from jaundice, by - https://www.myupchar.com/en |
पीलिया का सर्वाधिक सामान्य कारण यकृत द्वारा पित्त को अत्यधिक पैदा करना है । पित्त के रंजक द्रव्यों को हानि पहुंचाने वाले जन्मजात विकार भी पीलिया का कारण बन सकते हैं। यकृत की कुछ बीमारियों के कारण यकृत की कोशिकायें ठीक काम नहीं कर पाती हैं इससे रक्त धारा में अतिरिक्त यकृत कोशिकायें आ जाती हैं ।
पीलिया की आमतौर पर दो किस्में होती हैं - प्रतिरोधन पीलिया ( retention jaundice ) व प्रत्यावहन पीलिया ( regurgitation jaundice ) ।
प्रतिरोधन पीलिया में निष्कासन तन्त्रों के विकार के कारण रक्त धारा में पित्त के रंजक द्रव्य रह जाते हैं । प्रत्यावहन पीलिया में रक्त से पित्त के निष्कासित हो जाने के बाद भी रंजक द्रव्यों के असामान्य रूप से लीक करने के कारण अथवा सीधे - सीधे पित्त नलिकाओं से रंजक द्रव्यों के लीक करने के कारण रक्त धारा में वे मिश्रित हो जाते हैं ।
रक्ताल्पता ( anaemia ) , परिसंचरण तंत्र में रक्त संकुलता , ( congestion in the circulatory system ) , निमोनिया ( pneumonia ) यकृत कोशिकाओं की क्षति , यकृत ऊतकों में खरोंचें तथा यकृत व पित्त नलिकाओं में ट्यूमर जैसी बीमारियों से भी पीलिया का रोग हो जाता है ।
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