निमोनिया ( Pneumonia ) क्यों हो जाता है ?
![]() |
| Lobar pneumonia |
निमोनिया फेफड़ों की एक ऐसी बीमारी है जो निमोकोकस ( pneumococcus ) व मायकोप्लास्मा ( mycoplasma ) जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं ( micro - organism ) द्वारा होती है ।
एक्स - रे जैसे विकिरणों के पड़ने से , रासायनिक धुए अथवा पाउडरों में सांस लेने से भी निमोनिया हो जाता है । फेफड़ों की थैलियों में निमोनिया की वजह से जलन होने लगती है । ऐसी स्थिति में शरीर हवा की थैलियों में संक्रामण रोकने के लिये शारीरिक तरल पदार्थों और श्वेत रक्त कणों को भेजता है ।
ठण्ड लगना , बुखार हो जाना , सीने में दर्द होना , कफ आना तथा सांस लेने में दिक्कत होना आदि निमोनिया होने के लक्षण हैं । रोग से ग्रसित व्यक्ति बार - बार जंग के रंग का बलगम बाहर निकालता है जिसमें फेफड़ों के सूजे हुये ऊतकों का रक्त मिला होता है ।
ये लक्षण एक सप्ताह अथवा 10 दिन तक रहते हैं जब तक कि शरीर की प्रतिरक्षात्मक प्रणाली रोग के ऊपर नियंत्रण करना प्रारम्भ नहीं कर देती । इस रोग का इलाज करने के लिये एण्टीबायोटिक्स दिये जाते हैं जिससे रोगी जल्दी अच्छा होने लगता है । एण्टीबायोटिक्स ने निमोनिया से होने वाली मौतों की दर कम करने में प्रमुख भूमिका निभाई है ।
![]() |
| Symptoms of pneumonia. |
निमोकोकस जीवाणुओं के कारण हुआ निमोनिया चिकित्सा के दृष्टिकोण से बहुत भयंकर रोग होता है । निमोकोकी बहुत से स्वस्थ व्यक्तियों के शरीर में उपस्थित होते हैं लेकिन आमतौर पर ये नियंत्रित रहते हैं ।
लेकिन ठण्ड लगने , शल्यक्रिया , किसी दूसरे रोग अथवा थक जाने से शरीर कमजोर हो जाय तो निमोकोकी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भंग कर देते हैं तथा व्यक्ति निमोनिया का शिकार हो जाता है ।
मायकोप्लास्मल निमोनिया, मायकोप्लास्मा निमोनियायी जीवाणुओं के कारण होता है और सामान्यतः 15 से 20 साल तक के युवकों पर आक्रमण करता है । एक बार इस रोग से पीड़ित हो जाने से शरीर अपने आर्गनिज्म ( अवयवी ) के प्रति रोधक्षमता पैदा कर सकता है । 50 साल से ऊपर के व्यक्तियों को इस प्रकार का निमोनिया बहुत ही कम होता है ।
फेफड़ों की आंतरिक संरचना निर्मित करने वाली श्लेष्म झिल्ली पर मायकोप्लास्मा निमोनियायी जीवाणु वृद्धि करते हैं । ये जीवाणु एक ऐसा आक्सीकारक पैदा करते हैं जो कोशिकाओं का विनाश कर देता है । ये जीवाणु अवयवी ब्रोंकी ( bronchi ) व अल्वेयोली ( alveoli ) ( हवा की थैलियां ) में सूजन पैदा कर देते हैं ।
![]() |
| Micro scope image of pneumonia, by - Yale rosen |
कुछ प्रकार के निमोनियों का नाम शरीर के प्रभावित अंगों के आधार पर रखा गया है । लोबार निमोनिया फेफड़ों के एक या अधिक लोव्स ( lobes ) पर असर डालता है । डबल निमोनिया में दोनों फेफड़ों में लोवार निमोनिया हो जाता है ।
ब्रोकोनिमोनिया में फेफड़ों की ओर जाने वाली नलियों , ब्रोंकी तथा ब्रोंकीओल्स , प्रभावित हो जाती हैं । निमोनिया एक गम्भीर बीमारी है जिसका हमेशा डाक्टर द्वारा इलाज करवाना चाहिये । रोगी के लिये विश्राम , द्रव भोजन व ताजी हवा बहुत आवश्यक है । उसे भीड़ - भाड़ तथा दूसरे व्यक्तियों के सम्पर्क से बचना चाहिये ।
List of General Knowledge ( GK ) ~


