गुर्दे और गाल ब्लैडर की पथरियां क्या हैं ? What are kidney and bladder stones?

गुर्दे और गाल ब्लैडर की पथरियां क्या हैं ? 

गुर्दे और गाल ब्लैडर की पथरियां क्या हैं ? What are kidney and bladder stones?
kidney stones? By - https://www.myupchar.com/en

हम अक्सर सुनते हैं कि लोगों के गुर्दे अथवा गाल ब्लैडर में पथरियां पड़ जाती हैं । ये पथरियों का आकार एक पिन की नोंक से लेकर एक अंडे के आकार तक अलग - अलग होता है । 

आमतौर से गुर्दे में छोटे - छोटे पत्थर तथा ब्लैडर में बड़े - बड़े पत्थर बनते हैं । कुछ मामलों में छोटे - छोटे पत्थर मूत्रवाहिनी ( ureter ) से मूत्र के साथ निकल जाते हैं जबकि बड़े - बड़े पत्थरों को केवल शल्यक्रिया से ही हटाया जा सकता है । 

क्या तुम जानते हो कि ये पत्थर क्या हैं और इनका निर्माण कैसे होता है ? 

वैज्ञानिक शब्दावली में ये पथरिया केलकुली ( calculi ) कहलाती हैं । अधिकांश केलकुली मूत्राम्ल ( uric acid ) , यूरेट्स ( urates ) , केल्सियम आक्सलेट ( calcium oxalate ) तथा फास्फेट ( phosphates ) से मिल कर बने होते हैं । इनमें अंतिम दो चीजें अक्सर पाई जाती हैं । 

अधिकतर पथरियां एक केन्द्रीक केन्द्रक के आसपास संकेन्द्रीय ( concentric ) वलयों की व्यवस्था में बनी होती हैं । मूत्राम्ल से बने पत्थर एक्स - रे को अपने में से गुजरने नहीं देते इसरिये उनका इस तरीके से पता लग जाता है । 

5 से 8 प्रतिशत पत्थर इस किस्म के होते हैं । ये पत्थर विभिन्न किस्म के भूरे रंगों के होते हैं । ये चिकने और कड़े होते हैं ।

गुर्दे और गाल ब्लैडर की पथरियां क्या हैं ? What are kidney and bladder stones?
X - ray image of stone, by - Nevit Dilmen (talk)

केल्सियम आक्सलेट के पत्थर मुख्यतः पुरुषों में बनते हैं । इस किस्म के पत्थरों में फास्फेट की भी कुछ मात्रा होती है । ये पत्थर सबसे ज्यादा कठोर होते हैं । ये सामान्यतः खुरदुरे तथा अंडाकार होते हैं । 

फास्फेट के पत्थरों में केल्सियम , सोडियम व पोटेसियम होता है । इनकी रचना अक्सर गाल ब्लैडर में होती है और ये मुख्यतः महिलाओं में बनते हैं । ये पत्थर बढ़कर बड़े आकार के हो जाते हैं । ये पत्थर भी एक्स - रे के प्रति अपारदर्शी होते हैं ।

अभी तक पत्थरों की रचना क्रिया को पूर्ण रूप से समझा नहीं जा पाया है । यह विश्वास किया जाता है कि मुत्र का रुकाव , खासतौर से अगर मुत्र के रास्ते में संक्रमण हो , पत्थर का निर्माण कर सकता है । 

जिस समय मुत्र थोड़ा सा अम्लीय होता है अर्थात pH की स्थिति में केलकुलों में सोडियम यूरेट , मूत्राम्ल , केल्सियम फास्फेट तथा आक्सलेट समान्यतः बन जाते हैं । 

जिस समय मूत्र थोड़ा सा क्षारीय होता है अर्थात pH की स्थिति 7 और 8 के बीच होती है तो केल्सियम फास्फेट , मेगनीशियम अमोनियम फास्फेट और अमोनियम यूरेट की रचना हो जाती है । 

बैक्टीरिया के ढेर , एपीथेलियल ( epithelial ) व पीप ( pus ) कोशिकायें भी शरीर में विजातीय केन्द्रक के रूप में काम करके पत्थरों का निर्माण कर सकती हैं । 

पत्थर बनने से रोकने के लिये हर व्यक्ति को काफी पानी पीना चाहिये । व्यायाम तथा शरीर का गतिशील रहना भी महत्त्वपूर्ण है । भोजन में अत्यधिक आक्सलेट तथा फास्फेट नहीं होना चाहिये । लेकिन इन सुरक्षात्मक उपायों से पत्थरों के न बनने की गारंटी नहीं होती ।


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