ठंड के कारण कंपकंपी क्यों आती है ?
यह एक आम अनुभव की बात है कि यदि जाड़े के दिनों में हम ऊनी कपड़े न पहने हों तो ठंड के कारण हमें कंप कंपी आने लगती है । अगर हम कंपकंपी को रोकना चाहें तो रोक नहीं सकते ।
क्या तुम जानते हो कि ठंड के दिनों में हमारे शरीर में कंपकंपी क्यों आने लगती है ?
शरीर विज्ञान के अनुसार कंपकंपी आना मांसपेशियों की एक स्वचालित गति है । जब हमें कंपकपी आती है तो मांसपेशियां बहुत जल्दी - जल्दी सिकुड़ती और फैलती रहती हैं ।
हर बार जब हमारी मांसपेशियां सिकुड़ती हैं तो उनकी कोशिकाओं में अधिक खाद्य और ऊर्जा का व्यय होता है । इससे ऊष्मा पैदा होती है । इस प्रकार कंपकपी आना शरीर की एक ऐसी क्रिया है जो शरीर को गर्म रखने में मदद देती है ।
इससे शरीर का तापमान एक निश्चित बिदु से नीचे नहीं आ पाता । यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मांसपेशियां कठिन मेहनत करती हैं तथा शरीर को गर्म रखती हैं ।
अतः यदि हम ठंड के दिन कोई कसरत करें , गेंद खेलें या दौड़ लगाएं तो हमें कंपकंपी नहीं होगी । कसरत करना एक प्रकार से अपनी मांसपेशियों से कठोर काम लेना है । कसरत शरीर को गर्म करती है । वास्तव में , बिना कसरत किए कंपकपी भी यही काम करती है ।
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