शरीर में तिल्ली की क्या क्रिया है ?
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| 3D Spleen image, by - https://www.scientificanimations.com |
तिल्ली ( spleen ) एक लसीका सम्बंधी ( lymphoid ) अंग है जो उदर गुहा की बाईं तरफ तंतु पट ( diaphragm ) के नीचे स्थित रहता है । यह रक्त को प्राथमिक रूप से छानने का काम करता है ।
एक वयस्क के अंदर तिल्ली की लम्बाई 12.5 सेमी . ( 5 इंच ) तथा चौड़ाई 7.5 सेमी . से 10 सेमी . ( 3 से 4 इंच ) तक होती है । तिल्ली का वजन लगभग 200 ग्राम होता है ।
यह एक दूसरे से सम्बंधित मोटे ऊतकों के कैप्सूल में बंद रहती है । इसके अंदर तिल्ली के ऊतक दो किस्म के होते हैं , लाल लुगदी और सफेद लुगदी । ये आपस में मिले जुले तथा पूरी तिल्ली में वितरित होते हैं ।
श्वेत लुगदी लसीका सम्बंधी ऊतक होती है तथा लाल लुगदी रक्त से भरी हुई नलियों का जाल होता है । अधिकतर रक्त लाल लुगदी में ही छनता है ।
रक्त में पहुंचने वाले अत्यंत सूक्ष्म अवयवियों ( microorganisms ) तथा अन्य प्रतिजनों ( antigens ) के प्रति तिल्ली की श्वेत लुगदी प्रतिक्रिया करती है ।
लाल और श्वेत लुगदी में फागोसाइटिक ( phagocytic ) कोशिकायें रक्त से विजातीय पदार्थ हटाने का काम करते हैं तथा एक प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया की शुरुआत करते हैं जिससे एण्टीबाडीज ( antibodies ) का उत्पादन होता है ।
रक्त को छानने के अलावा भी लाल लुगदी की एक विशेषज्ञ भूमिका होती है । इसी भूमिका के तहत पुरानी और बेकार लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है ।
एक लाल कोशिका का जीवन 120 दिन लम्बा होता है । एक स्वस्थ मनुष्य में प्रत्येक सेकंड 10 करोड़ लाल कोशिकायें नष्ट की जाती हैं ।
आपात स्थिति में आवश्यक अतिरिक्त लाल कोशिकायें तिल्ली में एकत्रित रहती हैं । इसलिये तिल्ली रक्त के संचय के रूप में भी काम करती है तथा जब नस फटने ( hemorrhage ) इत्यादि से शरीर में रक्त की कमी हो जाती है तो तिल्ली से कुछ रक्त मिल जाता है ।
तिल्ली मोनोसाइट ( monocyte ) नामक श्वेत रक्त कोशिकाओं का निर्माण भी करती है ।
तिल्ली के बारे में सबसे दिलचप तथ्य यह है कि अगर यह रोगग्रस्त हो जाय तो इसे शल्यक्रिया द्वारा शरीर से अलग कर दिया जाता है तथा शरीर के अन्य अंग इसकी महत्त्वपूर्ण क्रियाओं को करने की जिम्मेदारी ले लेते हैं ।
कभी - कभी जब तिल्ली विकार ग्रस्त हो जाती है तो उसे शरीर से शल्यक्रिया द्वारा अलग करना पड़ता है ।
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