जीर्ण अतिसार [ Chronic Diarrhoea ]
| जीर्ण अतिसार [ Chronic Diarrhoea ] ,by - Armanjain011 |
परिचय -
इसमें रोगी को बहुत लम्बे समय से दस्त आये रहते हैं । चिकित्सकों के पास बहुत से ऐसे रोगी आते हैं जो यह शिकायत करते हैं कि उन्हें अतिसार का बहुत पुराना रोग है ।
रोग के प्रमुख कारण -
● गलत आहार ।
● आन्त्रिय संक्रमण ।● विष ( Poisons ) ।
● आन्त्रिय प्रदाह ।
● तंत्रिकीय प्रभाव ।
● प्रमुख कारण - अमीबा का वृहदांत्र में संक्रमण होना होता है ।
● जीर्ण अतिसार का एक कारण आँतों में - यक्ष्मा के जीवाणुओं का संक्रमण भी हो सकता है ।
रोग के प्रमुख लक्षण -
◆ प्रति दिन मरोड़ के साथ 4-5 दस्त होते हैं । जिनमें मल की मात्रा कम , परन्तु इसके साथ आंव( सफेद चिपचिपा बलगम जैसा ) आती है ।
◆ शादी - ब्याह में दावत खाने के बाद दस्तो की शिकायत बढ़ जाती है।◆ चटपटा मसालेदार भोजन के बाद दस्तों की संख्या बढ़ जाती है । अर्थात दस्त अधिक आते हैं ।
नोट - अक्सर कृमियों( worms ) के कारण अतिसार बना रहता है ।
रोग की पहिचान -
●उदर( अमाशय ) की परीक्षा करने पर वृहदांत्र के क्षेत्र को दबाने पर पीड़ा होती है।
●मल परीक्षा में ( In stool test ) प्रायः ' एण्ट - अमीबा हिस्टोलिटिका नहीं मिलते । अक्सर थोड़ी सी संख्या में ' पूय कोशिकायें मिल जाती हैं ।
●प्रायः E.S.R. बढ़ा हुआ मिलता है ।
पथ्यापथ्य चिकित्सा -
●Curds एवं Butter Milk दिया जा सकता है ।
● पुराने अतिसार में दूध बहुत हितकारी होता है । परन्तु दूध में तीन गुना पानी मिलाकर औटायें और जब दूध मात्र शेष रह जावे तब पिलावें ।● गेहूँ , उड़द , गुड़ , मदिरा , काशीफल , खीरा , ककड़ी एवं खट्टे पदार्थ का परहेज करना चाहिये ।
याद रखिये - आँतों का यक्ष्मा होने पर रोगी में जीर्ण अतिसार के अतिरिक्त उदर में पीड़ा , हल्का ज्वर , शरीर भार में कमी , कांस आदि लक्षण पाये जाते हैं । पूरे उदर( पेट ) को दबाने पर पीड़ा होती है ।
क्रानिक डायरिया ( जीर्ण अतिसार ) की औषधि चिकित्सा -
Rx .
◆ टेबलेट पेन्जीनार्म ( Tab . Penzynorm ) - 1 टेबलेट
◆ टेबलेट कोडीन ( Tab codine ) - 1 टेबलेट
◆ टेबलेट स्पोरोलेक ( Tab . Sporolac ) - 1 टेबलेट ऐसी 1 मात्रा- दिन में 3 बार।
साथ ही-
◆ ' बी कम्पलेक्स 1 टे .
◆ फोलिक एसिड - 5 मि.ग्रा . - 1 टेबलेट ऐसी 1 मात्रा - दिन में 3 बार ।
जीर्ण अतिसार की चिकित्सा इस प्रकार से भी -
● प्रारम्भ में - डाई - आयोडो - हाइड्रोक्सीक्वीनोलीन
व्या. नाम - डायोडोक्वीन ( Diodoquine ) एवं क्वीनोडोनक्लोर ( Quinodonchlor ) 2-2 टे . दिन में 3 बार भोजन के बाद -2 सप्ताह तक ।
● इसके बाद - ग्लाइकोविआसोल ( संखिया का यौगिक )
व्या.नाम - मिलिबिस ( Milibis ) 250 मि . ग्रा . 1 टे . - दिन में 2 बार भोजन के बाद 10 दिन तक ।
अथवा-
मेट्रोनिडाजॉल ( फ्लेजिल ) 200 मि.ग्रा . ( इसके स्थान पर ) 1-1 टेबलेट - दिन में 3 बार 10-12 दिन तक ।
●● कुछ रोगियों में कोई औषधि न देकर केवल मेक्साफार्म ( Mexaform ) 1-1 टे . दिन में 3 बार - भोजन के बाद -10 दिन तक ।
तत्पश्चात - 1 टे . दिन में 2 बार - अगले सप्ताह तक देते रहने से विशिष्ट लाभ ।
नोट - यदि रोग का आक्रमण गम्भीर हो , जिसमें आंव के साथ रक्त भी मल में मिल कर आ रहा हो तो- ' इमेटीन के इन्जेक्शन लगायें ।
● यदि लाभ न मिले तो वैसिलस के संक्रमण को दृष्टि में रखते हुए ' थैलाजोल 0.5 ग्रा . टेबलेट 2-2 दिन में 4 बार 2-3 सप्ताह तक दें ।
■' बेसिलस और ' अमीबा ' दोनों की उपस्थिति की सम्भावना में - ' थैलाजोल और डाई - आयोडो - हाइड्रोक्सीक्वीनोलीन वर्ग की औषधियाँ साथ- साथ 2 सप्ताह तक दें ।
■" जियार्डिया ' नामक परजीवी के परिणामस्वरूप रोग होने पर - ' क्लोरोक्वीन ' अथवा ' फ्लेजिल ' का उपयोग करें ।
Rx . ( मेडिकल प्रेस्किप्शन )
● फ्लेजिल ( Flagy ) 200 - प्रातः सायं 1 टे . 10 दिन तक ।
● इमोडियम ( Imodium ) इथनोर 2 मि.ग्रा . कै . 2 कै . नित्य एवं 1 कै . हर दस्त के बाद ।
अथवा -
● इमोसेक - एस ( Imosec - S ) इथनोर ' 1 कै . दिन में 4 बार 3-5 दिन तक । -
● कोबाडेक्स कै . ( Cobadex cap . ) + फोलिक एसिड - 1 टे . एवं 1 कै . प्रातः , दो . , शाम 1 माह तक । ( दोनों साथ - साथ )
● टे . स्पोरोलेक - 2 टे .
● टे.पेन्जीनार्म - 1 टे .
● टे . कोडीन - 1 टे . ( तीनो प्रातः नास्ते के बाद , दो . एवं रात सोते समय । )
पाचन संबंधित अन्य और रोगों को जाने -


































































