कुअवशोषण संलक्षण ( मैलएब्सॉर्पशन सिण्ड्रोम ) [ Malabsorption Syndromes ] की समस्या क्या है, क्यो होती है,? इसकी चिकित्सा किस प्रकार सम्भव है ? What is the problem of Malabsorption Syndromes? How is its treatment possible?

 कुअवशोषण संलक्षण ( मैलएब्सॉर्पशन सिण्ड्रोम ) [ Malabsorption Syndromes ]

कुअवशोषण संलक्षण ( मैलएब्सॉर्पशन सिण्ड्रोम ) [ Malabsorption Syndromes ]
कुअवशोषण संलक्षण ( मैलएब्सॉर्पशन सिण्ड्रोम ) [ Malabsorption Syndromes ]
 

पर्याय - 

कुछ पदार्थों को अवशोषित करने में छोटी आंत की असमर्थ हो जाती है और यही से यह रोग उतपन्न होता   । 

किसी आवश्यक कारक के बिना भी न्यूनताजन्य( minimalistic ) रोग का यह कारण हो सकता है ।

परिचय - 

कुअवशोषण संलक्षण से अभिप्राय उस अवस्था से है , जिसमें रोगी को यदा - कदा बड़ी मात्रा में पतले और स्निग्ध ( Greasy ) दस्त आते हैं और रोगी दुर्बल हो जाता है ।

प्रधान कारण -

1. पाचन सम्बन्धी विकार -

●आमाशय के शल्यकर्म( opration ) के बाद ।

●अग्न्याशय रोग । 

●पित्त अवरोध ( Riliary Obstruc tion ) ।

●यकृत विकार आदि । 

2. पाचित पदार्थों के आचूषण( suction ) में बाधा -

●आन्त्र की श्लेष्मिक कला की खराबियाँ ( Mucosal Abnorma lity ) । 

नोट - जैसा कि टी.बी. ' तथा ' संग्रहणी ' में देखा जाता है । 

आचूषण में बाधा निम्न अवस्थाओं में भी पहुंचती है - 

●जियार्डिया ,

●हुकवर्स ,

●औषधियों में 'पास' ( PAS ) ,

●रेचन द्रव्य ( Purgatives ) एवं सन्धि शोथ , 

●एवम् रेडिएशन आदि से ,

प्रधान लक्षण - पाचित पदार्थों के शरीर के जरूरी अंशों का आहार नली द्वारा भली प्रकार आचूषण न होने के परिणामस्वरूप कई प्रकार के लक्षण उत्पन्न होते हैं । 

1. वसा ( Fats ) के आचूषित( suction ) न होने से -

■आन्त्र के द्वारा कुअवशोषण( पोषक तत्वों का अवशोषण न करना ) के कारण मल में वसा की अत्यधिक उपस्थिति ( Staatorrhoea ) ।

■शरीर भार में कमी । 

2. कार्बोहाइड्रेट्स के आचूषित न होने से -

■अफारा( गैस ) , 

■अग्निमांद्य ,

3. फोलिक एसिड के आचूषित न होने से -

■मेक्रोसाइटिक अनीमिया । 

■जिह्वा शोथ । 

4. विटामिन बी-12 की कमी से -

■मेक्रोसाइटिक अनीमिया । 

■मानसिक एवं तंत्रिका तंत्र विकार । 

5. बी कम्पलेक्स के आचूषित न होने से - 

■मुख पाक ( Angular Stomatitis ) ।

■त्वक शोथ ।

■बहुतंत्रिका शोथ ( Polyneuritis ) ।

6. विटामिन ' सी ' के आचूषित न होने से - 

■रक्तस्राव की प्रवृत्ति । 

7. विटामिन ' ए ' के अभाव में -

■त्वक विकार ( Skin Disease ) । 

■जीराफ्थैलमिआ - शुष्काक्षि पाक । 

8. विटामिन ' डी ' एवं कैल्शियम की कमी से - 

■टिटेनी , 

■अस्थि मृदुता ( Oesteomalacia ) 

9. विटामिन ' के ' के आचूषित न होने से -

■रक्तस्राव , 

■रक्तचिन्तता ( Purpura ) ।

10. लौह के आचूषित न होने से - 

■पेशी दुर्बलता । एवं उद्वेष्ट ( ऐठन, Cramps ) । 

11. पोटेशियम की कमी से - 

■शिथिलता ( Flaccidity ) , 

■अतालता ( Arrhthmia ) । 

12. मैगनेशियम के आचूषित न होने - 

■पेशी दुर्बलता ।

जब उपरोक्त पदार्थों का आहार पथ द्वारा भली प्रकार आचूषण नहीं हो पाता है , तो शरीर में इनका अभाव हो जाता है , जिससे अनेक प्रकार के शरीर में बीमारी के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं । 

■शरीर भार में कमी ,

■बलक्षय 

■स्वास्थ्य का धीरे - धीरे गिर जाना , 

■बच्चों में वृद्धि का रुक जाना आदि प्रमुख है ,

■■पेट में अफारा रहता है , एवं मल वसायुक्त होता है । दुर्गन्ध युक्त पीले , पतले दस्त आते हैं । जो पानी में तैर आते हैं । मलपात्र आसानी से साफ नहीं होता है ।  

याद रखिये - 

■फोलिक एसिड और लौह की कमी से - रक्त न्यूनता ( Anaemia ) ।

■विटामिन्स की कमी से - बाल गिरने लगते हैं , उनमें पुनः उगने की क्षमता रहती है।

■■अंगुलियों के मुद्गरण ( Clubbing ) अर्थात हाथ - पाँव की उंगलियों के पोरों का चौड़ा एवं मोटा हो जाना है । 

■रक्त दाब ( B.P. ) कम हो जाता है और सम्भव है कि अल्प , अल्बूमिन रक्तता ( Hypoalbuminaria ) से सूजन हो जाय ।

चिकित्सा - 

संदिग्धावस्था में सही - सही रोग निर्णय होने तक निम्नलिखित उपचार प्रारम्भ किये सकते हैं -


 
◆शरीर में ' तरल ' एवं ' इलेक्ट्रोलाइट्स ' की कमी को दूर करने के लिये शिरामार्ग से ( I / V ) तरलाधान ( Infusion ) ।

दीर्घकालीन अवस्थाओं में रक्त में कैल्शियम की कमी ( Hypocal . caemia ) होने पर - कैल्शियम ग्लोकोनेट , कैल्शियम लैक्टेट ओरली( मुख द्वारा ) ! 

टिटेनी नामक विकार हो तो - विटामिन डी तथा शिरामार्ग से कैल्शियम ग्लुकोनेट (C) 100 % का प्रयोग आवश्यक होता है ।

रक्तस्राव की प्रवृत्ति में - विटामिन ' के ' का उपयोग । 

◆जिह्वा शोथ ( Glossitis ) , होंठ का फटना एवं त्वचा में सल्वेट पड़ना ( Crazy Paving ) आदि लक्षण होने पर विटामिन ' बी कम्पलेक्स ' से लाभ होता है । - 

रक्त न्यूनता के लिये - ' लौह एवं फोलिक एसिड युक्त इन्जेक्शन लगावें । 

विशिष्ट उपचार के लिये , उपरोक्त उपायों से लाभ न मिलने पर - ग्लूटीन ( गेहूँ का स्निग्ध भाग ) रहित आहार दें । प्रोटीन प्रधान पर वसारहित भोजन विशेष रूप से लाभकर होता है । 

◆◆कुछ रोगियों में कार्टिकोस्टेराइड्स ' से आश्चर्यजनक लाभ मिलता है । 

याद रखिये  - 

■ कभी - कभी ऑपरेशन कर आँत के पीड़ित भाग को निकालना पड़ता है । 

■कई बार , कई रोगियों में एण्टीबायोटिक्स विशेषकर टैरामाइसीन एवं सल्फामेथोक्साजोल ( Sulphamethoxazole ) उपयोगी पाये गये हैं ।


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