मूषिक दंशज ज्वर [ Ratbite Fever ] रोग क्या है, इसका पहिचान, लक्षण एवमं चिकित्सा विधी क्या है ? What is Mushik Danjhwar Fever [Ratbite Fever], what is its diagnosis, symptoms and treatment method??

 मूषिक दंशज ज्वर [ Ratbite Fever ] 

मूषिक दंशज ज्वर [ Ratbite Fever ]

नाम - 

चूहे काटे का बुखार । इसे आखुदंश ज्वर भी कहते हैं । 

परिचय - 

यह ज्वर चूहों के काटने से होता है । 3 % घर के चूहे इस रोग के वाहक होते हैं । 

..चूहा काटने के 16 से 24 दिन के बाद मितली एवं वमन( उल्टी ) , शरीर दुर्द के साथ हल्का ज्वर होता है जो 4-5 दिन में उतर जाता है एवं 4-5 दिन में पुनः चढ़ आता है ।

रोग के कारण - 

इस रोग को उत्पन्न करने वाले जीवाणु हैं , जिन्हें स्पाइरीलम मीनस , स्ट्रेप्टो , बेसीलस मोनिली फोर्मिस कहते हैं । 

- यह जीवाणु पहले चूहों के अंदर प्रविष्ट हो जाते हैं और फिर वह चूहे मनुष्य को काटते हैं ।


रोग के लक्षण - 

रोग का संचय काल 10 दिन तक का । 

- मितली एवं शिरःशूल( सिरदर्द ) के साथ ज्वर प्रारम्भ । 

- काटने की जगह में शोथ( सूजन ) एवं कभी - कभी वहाँ ऊतकनाश । 

- स्थानिक लसग्रन्थियों में सूजन । 

- हाथ - पाँव पर भी सूजन ।  

- ज्वर 100 से 102 डि . फा . तक , जो तीसरे दिन 104 डि . फा . तक पहुंच जाता है । जो 2-3 दिन रहकर उतर जाता है । ज्वर पुनः चढ़ता है ।


विशेष लक्षण - 

पाण्डु रोग तथा दंशस्थान पर लालिमा । 

- कभी - कभी ज्वर रिलेप्सिंग स्वरूप का( छोड़ - छोड़ आने वाला ) । 

- 5-6 दिन बाद ज्वर का दूसरा दौरा , इसी प्रकार ज्वर के दौरे महीनों या वर्षों भर तक आते रहते हैं । 

- कभी - कभी त्वचा पर चकत्ते । लाल रंग के फफोले । 

- ज्वर के आक्रमण के साथ दुर्बलता में वृद्धि ।


रोग की पहिचान -

- रक्त परीक्षा में ' श्वेत कणों की अधिकता । 

- परीक्षा में रोगी से पूछने पर मूषिक दंश का जानकारी मिलता है । 

- स्थानीय लक्षणों से आसानी से पहिचाना जा सकता है ।


रोग का परिणाम - 

यह घातक न होने पर भी दीर्घकालिक बीमारी है और उपयुक्त उपक्रम न होने पर महीनों अथवा वर्षों तक स्थिर रहता है । 

- रोगी कमजोर व दुर्बल हो जाता है । दुर्बलता अत्यन्त होने पर मृत्यु ।


मूषिक दंश ज्वर की चिकित्सा - 

इस रोग में ' पेनिसिलीन ' , टैरामाइसीन एवं सालवर्सन ( Salverson ) के इन्जेक्शन लाभ पहुँचाते हैं । 

निओआर्स फिनैमीन 0.3 से 0.6 ग्राम के । या 2 ज्वर आने के समय देना चाहिये । यदि रोग दुबाराआने का भय रहे तो 3 - 6 सुइयाँ लगानी चाहिये ।  

- हृदय को बल देने के लिये ' स्ट्रिकनीन ' , ' कोशमीन का उपयोग सही माना जाता  है । 

नोट - चूहे के काटते ही कटी जगह से तत्काल थोड़ा सा रक्त निकाल कर उसको बेटाडीन लोशन से धोकर वेटाडीन अथवा निओ स्पोरिन आयन्टमेण्ट लगा दें ।

चूहे काटे के बुखार की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा -

1. साधारण रोग में , - ' स्पाइरोसीड की पहले दिन 2 टेबलेट । तत्पश्चात् 3 टेबलेट रोजाना , 2-3 दिन से ज्वर उतर जाता है । 

2. सामान्य सरल चिकित्सा → ' प्रोकेन पेनिसिलीन जी की 4 लाख यूनिट की सुई हर 12 घण्टे बाद मांस में लगावें । साथ ही सेप्ट्रान को 1-1 टेबलेट दिन में 2 बार दें ।


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