यकृत - वृद्धि / जिगर का बढ़ जाना [ Enlargement of the Liver ]
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| यकृत - वृद्धि / जिगर का बढ़ जाना [ Enlargement of the Liver ] |
पर्याय -
इसे सामान्य भाषा में जिगर का बढ़ना कहते हैं ।
परिचय -
यकृत के नये प्रदाह( infamation ) के पश्चात उसके परिणामस्वरूप अथवा यकृत में बार - बार रक्त संचार होते रहने पर यकृत का प्रदाह होकर यकृत की वृद्धि हो जाती है ।
रोग के प्रमुख कारण -
◆ अधिक मद्यपान ।
◆ अधिक मसालेदार भोजन ।
◆ अधिक ऐश - आराम का जीवन ।◆ संक्रामक ज्वर ।
◆ यकृत - विद्रधि( फोड़ा या व्रण ) ।
◆ पित्ताश्मरी एवं पित्ताशय शोथ से ।
◆ पारद अथवा तीव्र क्षार से युक्त औषधियों का निरन्तर प्रयोग ।
◆ सामान्य कामला( पीलिया ) एवं मूषक विष ।
प्रमुख लक्षण -
● अग्निमांद्य ( Loss of appetite )
● पेट के दाहिनी तरफ भारीपन ।
● जिह्वा पर सफेद लेप ।
● मुँह का स्वाद कडुवा ।
● आँखों में पीलापन ।
● मलावरोध अथवा अतिसार ।
● अजीर्ण एवं बदहज्मी ।
● कभी - कभी बुखार ।
● पेट फूल जाना ।
विशेष कारण -
■ रक्त के रोग ।
■ हृदय , फेफड़ा एवं गुर्दे के जीर्ण रोग ।
■ पित्त प्रणाली का अवरोध ।
■ पित्तकारक द्रव्यों का अधिक सेवन ।
■ यकृत प्रदाह के परिणामस्वरूप ।
■ लाल मिर्च , धनिया , मेथी , लौंग , जीरा , नमक , मसालेदार सब्जियाँ , चाट आदि के अधिक खाने से ।
रोग की पहिचान -
रोगी को लिटा कर हाथ की अंगुलियों से सबसे नीचे वाली पसली के बराबर जिगर को दबाया जाय तो वह कड़ा प्रतीत होता है और सुई के समान चुभने वाला दर्द रोगी महसूस करे तो समझना चाहिये कि रोगी का जिगर बढ़ा हुआ है ।
रोग का परिणाम -
◆ उचित चिकित्सा न करने पर लिवर सिरोसिस , यकृत विद्रधि एवं कामला( पीलिया ) की आशंका ।
◆ पित्तवर्धक वस्तुओं के प्रयोग से जिगर में पुराना प्रदाह होकर जिगर बढ़ जाता है ।
विशिष्ट लक्षण -
★ जब यकृत नीचे की ओर बढ़ता है → पंजेर की हड्डी के नीचे हाथ से दबाने पर प्रतीत होता है ।
★ जब यकृत ऊपर की ओर बढ़ता है → कंधे की हड्डी में पीड़ा , खाँसी , श्वांस कष्ट आदि लक्षण होते हैं ।
चिकित्सा विधि -
★ मूल कारण को दूर करना ही इसकी एक मात्र चिकित्सा है ।
★ कोष्ठबद्धता( कब्ज ) से बचायें । इसके लिये मृदु विरेचन आवश्यक है ।
★ दीपन , पाचन तथा विशिष्ट यकृत विकार नाशक औषधियों की पूर्ण व्यवस्था ।
सहायक चिकित्सा एवं पथ्यापथ्य -
∆ पूर्ण विश्राम आवश्यक ।
∆ यकृत पर गर्म सेंक ।
पथ्य के रूप में -
∆ कच्चे पपीते का शाक । पका पपीता भी लाभकारी ।
∆ बुखार की स्थिति में - साबूदाना एवं अरारोट का सेवन ।
∆ दूध , शाक - सब्जी की अधिक मात्रा का उपयोग ।
औषधि चिकित्सा -
Rx
★ मिक कैप्सूल ( Mic Cap . ) नि . एलेम्बिक 1-2 कै.- दिन में 2 या 3 बार ।
अथवा-
निओ - मेथिडिन ( Neo - methidine ) 1 टे . + सीलिन 100 मि . ग्रा . 1 टेबलेट । दोनों को मिलाकर दिन में 3 बार दें ।
साथ ही-
★ इन्जे . मेक्राबिन ( Inj . Mecrabin ) ग्लैक्सो ' 1 मि . ली . मांस में - नित्य 10 दिन तक ।
अथवा-
इन्जे . लिवर एक्स्ट्रेक्ट विद विटा. 'बी' 2 मि . ली . नित्य या तीसरे दिन मांसपेशीगत ।
साथ ही-
★ लिवोजिन सीरप ( Livogin Syrup ) एलन वरीज 2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार- भोजन के बाद ।
यकृत - वृद्धि की लक्षणों के अनुसार चिकित्सा -
1. यकृत के स्थान पर पीड़ा → ग्लिसरीन बेलाडोना का स्थानीय प्रयोग ।2. खून की कमी में → टे . फोलिक एसिड 1-3 टे . दिन में 1 बार 10 दिन । तत्पश्चात 1 टे . नित्य ।
3. अत्यधिक पीड़ा की स्थिति में → टे . सिवाल्जिन 1 टे . , टे . ट्रांसिण्टिन 1 टे . , ग्लूकोज 600 मि . ग्रा . । 1 मात्रा । ऐसी एक मात्रा दिन में कई बार ।
साथ ही -
टेट्रासाइक्लीन कै . 250 मि . ग्रा . - 1 कै . दिन में कई बार ।
Rx ( प्रिस्क्रिप्शन ) -
★ दिन में 1 बार ~ इन्जे . लिवोजिन नि . ' एलनवरीज 2 मि . ली . मांस में , नित्य या 1 दिन छोड़ कर । बच्चों को 1/2 से 1 मि . ली . ।
★ दिन में 2 बार भोजन के बाद ~ जेटोसाइटोल ( Jetositol ) इथनार ' 2 टे . भोजन के साथ दिन में 2 बार । बच्चों को 1/2 से 1 टेबलेट ।
★ भोजन के बाद 2 बार ~ ' टोना - लिवर ' नि . स्टेडमैड 2-3 चम्मच , बराबर जल से।
★ रात सोते समय ~ मायोलिव ( Mayoliv ) ' मायो 1-2 टेबलेट , जल से ।
यकृत वृद्धि में उपयोगी ऐलो . पेटेण्ट टेबलेट । कैप्सूल -
■ मिक कै . ( Mic Cap ) नि . ' एलेम्बिक → 1-2 कै . नित्य आवश्यकतानुसार ।
■ मैक्राबीन ( Macrabin ) नि . ' ग्लैक्सों ' → 2 - 4 टे . दिन में 3 या 4 बार ।
■ लिट्रीसन ( Litrison ) नि . ' रोशे → 3 टे . खाने के बाद - दिन में 3 बार ।
■ मिथियोनिन ( Methionin ) नि . ‘ एलबर्ट → 1-2 टेबलेट दिन में 3 बार ।
■ लिव्यूल्स विद फोलिक नि . ' एलेम्बिक एसिड बी-12 → 1 कै . दिन में 2 या 3 बार ।
■ जेटोसिटॉल ( Jetositol ) नि . एथनॉर → 2 टे .- भोजन के साथ दिन में 2 या 3 बार ।
■ टेफ्रोली ( Tefroli ) नि. टी. टी. के. → 2 टेबलेट दिन में 3 बार ।
■ फोलिप्लेक्स ( Foliplex ) नि. ' कोपरान → 1 कै . दिन में 2 बार ।
■ लिवोजेन ( Livogin ) नि . एलनवरीज → 1-2 कै . भोजन के बाद दिन में 2 या 3 बार ।
■ स्टिमुलिव ( Stimuliv ) नि . ' फ्रेन्को- इंडियन → 1-2 टे . दिन में 3 बार । बालकों को आधी मात्रा ।
सावधान - प्रयोग काल में - मद्यपान , मसालेदार वस्तुयें , लालमिर्च , तेल , खटाई वर्जित ।
यकृत वृद्धि में सेवन कराने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेण्ट पेय -
● टेफ्रोली नि . टी . टी . के . → 1-2 चम्मच दिन में 3 बार । बच्चों के लिये ड्राप्स - मात्रा 5-10 बूंद दिन में 3 बार ।
● फोलिप्लेक्स ( Foliplex ) नि . कोपरान → 1 चम्मच दिन में 2 बार ।
● विटोनेक्स ( Vitonex ) नि . जगत फार्मा → 2 चम्मच दिन में 2 बार । बच्चों को आधी मात्रा ।
● लिवरजेन ( Livergen ) नि . ' स्टेण्डर्ड → 1-2 चम्मच दिन में 3 बार बराबर जल से ।
● स्टिमुलिव ( Stimuliv ) नि . ' फ्रेन्को इंडियन → 1/2 - 2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार । बच्चों को आधी मात्रा ।
● डेल्फीकोल ( Dilphicol ) नि . ' लीडर्ले → 2-3 चम्मच खाने के बाद दिन में 3 बार ।
● निओ - किन ( Nio - Kin ) नि . ' डेज → 1-2 चम्मच खाने के बाद दिन में 3-4 बार ।
● फैरो ' बी लिवर ( Ferro ' B ' Liver ) " यूनीकेम ” → 1 चम्मच बराबर जल के साथ हर भोजन के बाद ।
● लिवोटोन ( Livotone ) नि . ' ईस्ट इंडिया → 1-2 चम्मच दिन में 3 बार खाने से पूर्व ।
● यूनीवाइट ( Univite ) नि . ' यूनीकेम → 1-2 चम्मच दिन में 2 या 3 बार जल से ।
यकृत वृद्धि में लगाने योग्य अपटूडेट ऐलो . पेटेण्ट इन्जेक्शन -
◆ लिवर एक्स्ट्रेक्ट विद ' बी ' नि . बंगाल इम्यूनिटी → 2-3 मि . ली . मांस में 1 दिन छोड़ कर ।
◆ बेरिन ( Berin ) नि . ग्लैक्सों → 50-100 मि.ग्रा . मांस या नस में नित्य ।
◆ लिवोजेन ( Livogin ) नि. एलेनवरीज → 1-2 मि . ली . मांस में नित्य ।
◆ मेक्राबिन ( Macrabin ) नि . ' ग्लैक्सों → 1/2-1 मि.ली. मांसपेशीगत नित्य या तीसरे दिन ।
◆ अल्फासिलिन ( Alfacilin ) नि . ' वेलानोवा → 250-500 मि . ग्रा . के इन्जे . मांस में प्रति 8 घण्टे पर ।
◆ कम्पोलान ( Compolan ) नि . बायर ' → 2 मि . ली . मांसपेशीगत प्रति तीसरे दिन ।
◆ रिपोसोन ( Riposon ) नि. ओरिएण्ट फार्मा → 2-3 मि . ली . मांस या नस में , नित्य 4 सप्ताह तक ।
◆ निओमेथीडीन फोर्ट नि . निओफार्मा → 2.5 मि . ली . के 2-3 एम्पुल तक नित्य मांस में लगावें ।
यकृत वृद्धि की अनुभूत चिकित्सा ~
★ ' विटोनेक्स ' सीरप ( जगत ) 2 चम्मच दिन में 2 बार दें । बच्चों को 2.5 से 5 मि . ली . ( 1/2-1 चम्मच ) दिन में 2-3 बार ।
साथ ही-
अल्फासिलिन ( वेलानोवा ) 250-500 मि . ग्रा . के इन्जेक्शन मांस में नित्य लगावें । एवं इसका 250 से 500 मि . ग्रा . का 1 कै . दिन में 4 बार दें । बच्चों को इसका सीरप तथा ड्राप्स दें ।
सावधान - पेनिसिलीन के सुग्राही रोगियों में इसका प्रयोग न करें ।
★ ' रिपासोन ' 2-4 मि . ली . मांस में नित्य या तीसरे दिन ।
साथ ही-
' लिवरजेन' 5-10 मि . ली . ( 2-3 चम्मच ) तरल सम भाग जल से नित्य दिन में 3 बार ।
विशेष उपयोगिता - यह यकृत वृद्धि को घटाता है ।
★ लिवोजेन - 1-2 मि . ली . मांस में नित्य दें । साथ ही इसका सीरप 2 चम्मच दिन में 2-3 बार बराबर जल के साथ ।
★ ' निओ - मेथिडिन ' की 1 टे . + सीलिन 100 मि . ग्रा . की 1 टे . खरल में घोंट कर दिन में 3 बार जल से ऐसी एक मात्रा दें ।
★ मैक्राबिन - 1/2-1मि . ली . नित्य या एक दिन छोड़कर मांस में लगावें । साथ ही इसी का पेय 2-4 चम्मच दिन में 3 बार हर खाने के बाद दें ।
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